छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में शिक्षा विभाग एक बार फिर चर्चा में है। व्हाइट बोर्ड और खेल सामग्री की खरीदी, टीचरों की भर्ती में गड़बड़ी के बाद अब नया मामला किताबों का हैं। विभाग की ओर से स्कूलों को जो किताबें भेजी गई हैं, उनमें प्रणव मुखर्जी को राष्ट्रपति, सुषमा स्वराज को प्रवासी मामलों की मंत्री और रमन सिंह को मुख्यमंत्री बताया गया है। यानी कि सारी की सारी किताबें पुरानी हैं। खास बात यह है कि इनकी खरीदी तीन गुना दाम पर फर्जी स्टीकर चस्पा कर दिखाई गई है।
मिडिल स्कूलों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें
दरअसल, देवभोग ब्लॉक के 50 मिडिल स्कूलों में किताबों से भरा नीले रंग का एक पार्सल पहुंचा है। इसमें जनरल नॉलेज के साथ ही महापुरुषों के जीवन चरित्र पर आधारित 104 किताबें हैं। यह किताबे मिडिल (8वीं क्लास तक) स्कूलों को भेजी गई हैं। जबकि किताबों पर साफ लिखा है कि वे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए हैं। इन किताबों के साथ ही उन्हें फर्म की लिस्ट के साथ ही भुगतान की राशि भी बताई गई है। राशि के अनुसार एनएफटी फॉर्म और चेक के साथ ब्लॉक कार्यालय बुलाया गया है।
25 लाख का करना होगा स्कूलों को भुगतान
जो पार्सल स्कूलों को भेजा गया है कि उसमें सबसे छोटी किताब 48 पेज की है, जिसका दाम 300 रुपए बताया गया है। इसी तरह किताब की अधिकतम एमआरपी 900 रुपए बताई गई है। इसके लिए किताब पर प्रिंट एमआरपी पर स्टीकर चस्पा किया गया है। नाम ना छापने की शर्त पर प्रधान पाठकों ने कहा कि इन किताबों को लाइब्रेरी के लिए भेजा गया है। अब उन पर तीन गुना दाम भुगतान के लिए दबाव बनाया जा रहा है। जो कि सभी स्कूलों का मिलाकर करीब 25 लाख रुपए होता है।
बिना कोटेशन खरीदारी, किसे भुगतान पहले से तय
पिछड़ा वर्ग प्राधिकरण की मद से 50-50 हजार रुपए की किताबें 50 स्कूलों को भेजी गई हैं। जबकि नियमानुसार, स्कूलों के खाते से सामग्री खरीद के लिए जनभागीदारी समिति बनाई गई है। अगर 10 हजार रुपए से ऊपर की खरीद की जाती है तो क्रय एवं भंडार नियम का पालन करना होता है। इसके लिए क्रय समिति अलग-अलग तीन फर्मों से कोटेशन मंगवाती है। जबकि यहां बिना कोटेशन के ही खरीदी की गई और किस फर्म को भुगतान किया जाना है, वह पहले ही बता दिया गया है।
लिस्ट भेजी गई, उसमें स्कूलों के सामने बैंक खाता नंबर
इस दौरान एक लिस्ट भी हाथ लगी है। इसके मुताबिक, प्रगति पब्लिशिंग हाइस प्राइवेट लिमिटेड व खुराना पब्लिशिंग को 20-20 स्कूलों और इनप्रेसिंग प्रिंटर्स को 10 स्कूलों को भुगतान करना है। स्कूल के नाम के आगे बैंक खाता नंबर और एमाउंट भी लिखा गया है। पार्सल के साथ ही इन तीनो फर्मों के कोटेशन भी भेजे गए हैं। इससे पता चलता है कि खरीदी दिखाने के लिए कोटेशन पहले मंगवाने की जगह खानापूर्ति पूरी की गई है। जिससे गड़बड़ी पर सवाल उठे तो बचा जा सके।
विधायक की अनुशंसा, पर खामोश, DEO बोले-सबको जानकारी
बताया जा रहा है कि यह खरीदी पिछड़ा वर्ग प्राधिकरण की मद से क्षेत्रीय विधायक डमरूधर पुजारी की अनुशंसा से की गई है। विधायक भी इस बात को स्वीकार करते हैं, लेकिन गड़बड़ी पर चुप्पी साध लेते हैं। वहीं पत्राचार और प्रकिया में भाग लेने वाले शिक्षा विभाग के उपसंचालक अरविंद ध्रुव ने डीईओ से बात करने कह दिया। DEO करमन खटकर का कहना है कि विधायक के अनुशंसा पर लाइब्रेरी के लिए किताबें खरीदी गई हैं। सारी प्रक्रिया की जानकारी कलेक्टर को भी है।