18 जुलाई से होने वाली विधानसभा सत्र को लेकर धमतरी जिले के कुरूद विधायक अजय चंद्राकर ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि ये आखरी सत्र है। इस बार तो दिन में तारे दिखाना है और बताना है कि आपकी 5 साल में उपलब्धियां क्या-क्या रही।
'कांग्रेस की आईडियोलॉजी क्या है'
विधायक अजय चंद्राकर ने कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्ण के बयान पर कहा है कि प्रमोद कृष्णम और विवेक तन्खा जिस-जिस प्रदेश से आते हैं। पहले वहां के हालात पर चर्चा कर लें। दूसरा कांग्रेस की आईडियोलॉजी क्या है, यह विवेक तन्खा बताएं कि किस दर्शन में कांग्रेस काम करती है। यह भी बताएं कि क्या महात्मा गांधी ने आजादी के बाद मिलने के बाद कांग्रेस को विसर्जित करने की बात कही थी कि नहीं। ये इतिहास सत्य है कि नहीं। हिंदुत्व पर कहा कि तन्खा जी वकील हैं, उनको सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट को देख लेना चाहिए। जो परिभाषा आचार्य प्रमोद कृष्णन करते हैं मैं उनको 14 जनवरी को रामलला के दर्शन के लिए आमंत्रित करूंगा।
हिंदुत्व किसी की बपौती नहीं वाले बयान पर पलटवार
हिंदुत्व किसी की बपौती वाले बयान पर अजय चंद्राकर ने कहा कि किसी की भी कोई बपौती नहीं है। हमने कब कहा कि बपौती हैं, जो सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी है। वह हम स्वीकार करते हैं। हम चुनावी हिंदुत्व की बात नहीं करते। हम चुनाव के समय जब तब गोत्र लपेटकर नहीं दिखाते हैं। हमारी आस्था दिखाने की नहीं है। राम मंदिर जो बन रहा है, वह 600 साल का संघर्ष है। सुकमा में आदिवासी लोग दूसरे धर्म के हित्य को जला रहे हैं, लेकिन यह ना प्रमोद कृष्णा को दिखेगा और न ही विवेक तंखा को दिखेगा। ना ही भूपेश बघेल को दिखेगा। भूपेश बघेल एक साल में कई बार रामायण करा चुके हैं है उनका बस चले तो और कई बार रामायण कराएंगे। अगली बार मैं तारीख भी बता दूंगा।
प्रियदर्शनी बैंक घोटालों में नार्कों टेस्ट की जांच को लेकर पुलिस को सौंपी गई रिपोर्ट पर कहा कि भूपेश बघेल आज तक बोलते रहे कि यह गड़बड़ है। कुछ शुरुआत में कार्रवाई की। हिम्मत है दम है तो जो आरोप लगाते हैं। उन सबके लिए भी जांच करा दें। अब तो न्यायालय के निर्देश पर हो रहे हैं। उन पर कार्रवाई करें, कोई मना नहीं किया है। वह कुछ भी नहीं कर सकते हैं। वह सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक इस्तेमाल करेंगे और चुनाव नजदीक आएगा तो ऐसा ही कुछ बोलेंगे। पूर्व मंत्री ने कहा कांग्रेस के बूथ चलो अभियान को लेकर कहा कि बूथ चलो के पहले कांग्रेस के नेता खुद दिल्ली चले जा रहे थे। मोहन मरकाम की कुर्सी खतरे में हैं, और कौन-कौन तीसरी-चौथी पंक्ति के नेता हैं, उनके बीच में उठापटक है. अभी तो पहले वह अपने पैर मजबूत कर लें। भाजपा को उनके आने से कुछ नहीं होगा।