त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दूसरे चरण के लिए भोपालपटनम जनपद क्षेत्र हुए चुनाव में जिस भोपालपटनम ब्लॉक को कांग्रेस का गढ़ माना जाता था। इस बार वहां से भाजपा ने अपना परचम लहराते हुए कांग्रेसी गढ़ में सेंध लगाते हुए भारी मतों से जीत हासिल की है।
भाजपा ने कांग्रेस का सूपड़ा साफ करते हुए भारी मतों से विजय प्राप्त की है, जिस जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक-1 से भाजपा ने आज तक अपना खाता तक नहीं खोला था। उस इलाके की जनता ने कांग्रेस को पटखनी दे दी है। वहां से दिग्गज नेता को पछाड़ते हुए भारी मत बटोरे हैं। वहीं, भोपालपटनम ब्लॉक की दूसरी सीट मद्देड में भी भाजपा आई है। वहां से चार प्रत्यासी मैदान में थे।
जनपद पंचायत के 10 सीटों में आठ पर भाजपा ने कब्जा जमाया है, जबकि सरपंच पद के उम्मीदवार अधिकतम भाजपा समर्पित जीतकर आए हैं। उसूर ब्लॉक के दिग्गज नेता व जिला पंचायत उपाध्यक्ष रहे कमलेश काराम भी चुनाव हार गए हैं। पामेड़ सीट में भी भाजपा काबिज हो गई हैं। दोनों चरण के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दो चरणों के लिए हुए मतदान में भाजपा के खाते में पांच सीट कांग्रेस के खाते में एक और एक निर्दलीय पर काबिज हैं।
नक्सलगढ़ में बुलेट पर भारी पड़ गया बैलेट
बीजापुर जिले के भोपालपटनम और उसूर ब्लॉक में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दूसरे चरण में जमकर वोट डले हैं। सेकंड पाली में हुए मतदान में नक्सल प्रभावित इलाकों में बुलेट पर भारी बैलेंट पढ़ गया। पिछले बार के मुकाबले में इस बार ग्रामीणों ने जमकर वोट डाला है। सुबह पांच बजे से ही पोलिंग बूथों में लंबी कतार लगी हुई थी। पुलिंग का समय समाप्त होने के बाद भी पोलिंग बूथों में लंबी कतार लगी हुई थी। रात तक मतदाता लाइन में खड़े होकर अपना नेता चुने हैं।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का रिकॉर्ड टूटा
भोपालपटनम जनपद में 72.28 प्रतिशत मतदान हुआ हैं। वही उसूर ब्लाक के जनपद पंचायत क्षेत्र में 49.2 प्रतिशत मतदान हुआ हैं। उसूर ब्लाक में पिछली बार के मुकाबले अधिक मतदान हुआ हैं।
क्यों हारी कांग्रेस?
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में कांग्रेस की हार का सबसे बड़ा कारण गुटबाजी रहा हैं। कई जगह से कांग्रेस समर्पित दो-दो प्रत्याशी खड़े हुए हैं। कई नेता बागी होकर चुनाव के मैदान में उतर गए। वहीं, दूसरी तरफ चुनावी मैदान में प्रचार और लोगो से संपर्क साधने में कांग्रेस फीकी रही हैं। उनके पास इस बार कोई रणनीति नही थी। जबकि भाजपा ने रणनीति के तहत चुनाव लड़ा और जीत सुनिश्चित हुई।
भाजपा क्यों जीती?
भाजपा ने प्रत्याशियों को खड़ा करने के लिए गहरा मंथन किया हैं और इलाके में महिला वोटर्स को साधने के लिए कार्यकर्ताओ ने पूरी कोशिश की सरकार की योजनाओं को लेकर एक-एक मतदाताओं के पास गए हैं। कांग्रेस को हराना आसान नहीं था। लेकिन भाजपा की रणनीति कारगर साबित हुई और चुनाव में जीत हासिल हुई।
महतारी वंदन योजना का असर
देखा गया हैं कि शहरी वोटर्स को आमतौर पर बीजेपी का वोटर माना जाता है। महतारी वंदन योजना का लाभ अधिकतर ग्रामीण महिलाओं कि तरफ होता है पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं वोट ज्यादा हैं। वही महिला मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर वोटिंग के लिए निकलीं। अधिकतर महिलाओं ने बीजेपी के पक्ष में वोटिंग की महिलाओं की एकतरफा वोटिंग से बीजेपी को फायदा हुआ हैं।