बीजापुर में छह माह की मंगली की मौत पर राजनीतिक बयानबाजी थम गई है, लेकिन मुतवेण्डी समेत गंगालूर-बीजापुर इलाके के दर्जनों गांव के ग्रामीणों में घटना को लेकर रोष बरकरार है। किसकी गोली ने छह माह की मासूम से उसकी सांसें छीन ली, मंगली के लिए न्याय की मांग कर रहे हर एक ग्रामीण के जहन में यह सवाल कौंध रहा हैं।
सोमवार को गोरना गांव को जोड़ती सड़क पर पूरे दिन पुलिस-सीआरपीएफ का सख्त पहरा था। खबर मिली थी कि मुतवेण्डी घटना से गुस्साएं ग्रामीण मूलवासी मंच के नेतृत्व में जिला मुख्यालय में रैली की तैयारी में हैं। ग्रामीणों के कहे अनुसार रैली के लिए उन्होंने बकायदा प्रशासन से अनुमति मांगी थी मगर उन्हें अनुमति नहीं मिली। छह सूत्रीय मांग को लेकर गोरना गांव में जुटे सैकड़ों ग्रामीण मंगली की मां मासे और पिता बामन को साथ लेकर कलेक्टर से मिलकर आवेदन देना चाहते थे। लेकिन प्रशासन की तरफ से इजाजत नहीं मिली। गोरना गांव को जोड़ती सड़क पर बड़ी संख्या में पुलिस और सीआरपीएफ के जवान , राजस्व विभाग के अफसर-कर्मियों के साथ पुलिस के आला अधिकारी डटे हुए थे।
जवानों की मुस्तैदी के अलावा सड़क के दोनों छोर पर बांस से बैरिकेडिंग की गई थी। ताकि ग्रामीण बीजापुर ना पहुंच सके। जिन छह सूत्रीय मांग को लेकर ग्रामीण बड़े प्रदर्शन पर उतारू थे। इनमें बड़ी मांग पांच दिन के भीतर घटना की जांच पूरी करने ,बगैर ग्राम सभा, ग्रामीणों की गैरमौजूदगी में मुतवेंडी में कैम्प का विरोध, घटना की जांच के लिए जनप्रतिनिधियों के अलावा ग्रामीणों की संयुक्त टीम गठित करने के अलावा मंगली की मां द्वारा गंगालूर थाने में लिखित शिकायत पर अविलंब एफआईआर दर्ज करने सहित कांवडगांव में स्थापित कैम्प को तत्काल हटाने की मांग शामिल है।
ग्रामीण उक्त मांगों को लेकर गोरना से रैली की शक्ल में निकले जरूर लेकिन बीजापुर नहीं पहुंच सके। बैरिकेडिंग स्थल पहुंचकर शांतिपूर्ण तरीके से तहसीलदार को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। इधर, बैरिकेडिंग और रैली पर मुख्यालय में प्रवेश पर पाबंदी का मौके पर मौजूद सामाजिक कार्यकर्ता बेला भाटिया ने पुरजोर विरोध किया। बेला ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर कुठाराघात बताया। बेला का कहना था कि चुनाव के वक्त इन्हीं ग्रामीणों को भीड़ की शक्ल में सभाओं में बुलाया जाता है, चुनाव निपटते न्याय के लिए यही ग्रामीण जब अपने ही कलेक्टर से मिलना चाहते हैं तब इन्हें बैरिकेडिंग कर रोक दिया जाता है।
मंगली की मौत किन परिस्थितियों में हुई, यह जांच का विषय है, लेकिन सरकार इससे बच रही है. ग्रामीणों को विश्वास में लिए बगैर सुरक्षा बलों के कैम्प खोले जा रहे हैं। लोकतांत्रिक देश में अभिव्यक्ति की आजादी लोगों से छीनी जा रही हैं। जो कुछ भी हो रहा है कही से न्याय संगत प्रतीत नहीं होता।
एक जनवरी 2024 की देर शाम बीजापुर पुलिस ने एक प्रेस नोट जारी कर जानकारी दी की गंगालूर थानाक्षेत्र के मुदवेंडी गांव में एरिया डॉमिनेशन के लिए सुरक्षाबल के जवान निकले हुए थे। इसी दौरान आईईडी विस्फोट के कारण दो जवान जख्मी हुए और फिर गांव में ही पुलिस नक्सली एनकाउंटर हुआ। इस एनकाउंटर में नक्सलियों के क्रॉस फायरिंग में एक दुधमुंही बच्ची की मौत हो गई जबकि उसकी मां इस घटना में जख्मी हो गई। साथ ही पुलिस ने ये भी दावा किया की इस घटना में चार से पांच नक्सली भी घायल हुए हैं। नक्सलियों ने पुलिस के इन दावों का खण्डन करते हुए प्रेस नोट जारी कर पुलिस पर गांव में घुसकर अंधाधुंध फायरिंग कर छह माह की मंगली सोढ़ी की हत्या और उसकी मां को जख्मी करने का आरोप लगाया। इस घटना में मृत बच्ची की मां मासे सोढ़ी के साथ ही ग्रामीणों का कहना है की घटना के वक्त गांव में नक्सल सदस्यों की मौजूदगी नहीं थी। पुलिस ने एकतरफा गोलीबारी की है। पुलिस के इसी गोलीबारी में दुधमुंही बच्ची की मौत हुई है।