जिले में धान खरीदी व्यवस्था एक गंभीर संकट का सामना कर रही है। उपार्जन केंद्रों से धान का समय पर उठाव न होने के कारण, जिला सहकारी समिति कर्मचारी संघ ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो नौ जनवरी 2026 से जिले में धान खरीदी बंद करनी पड़ सकती है।
संघ द्वारा प्रस्तुत पत्र के अनुसार, जिले के 30 उपार्जन केंद्रों में पांच जनवरी 2026 तक 48,842 मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है। हालांकि, इसमें से केवल 1,084 मीट्रिक टन धान का ही उठाव हो पाया है, जो कुल खरीदी का मात्र 2.22 प्रतिशत है। यह स्थिति दर्शाती है कि उपार्जन केंद्रों पर धान का एक विशाल भंडार जमा हो गया है।
अधिकांश उपार्जन केंद्रों में धान का भंडारण निर्धारित सीमा से अधिक हो चुका है। संघ का कहना है कि न तो पर्याप्त जगह उपलब्ध है और न ही धान के स्टैक बनाने या अतिरिक्त भंडारण की कोई व्यवस्था की गई है। इस वजह से, केंद्रों पर आगे धान खरीदना संभव नहीं रह गया है। पहले से संग्रहित धान का तत्काल उठाव सुनिश्चित किया जाना अत्यंत आवश्यक है, अन्यथा खरीदी कार्य पूरी तरह से प्रभावित होगा।
कर्मचारी संघ ने दी चेतावनी
जिला सहकारी समिति कर्मचारी संघ ने जिला विपणन अधिकारी को निर्देशित कर संग्रहित धान का तत्काल उठाव कराने की मांग की है, ताकि उपार्जन केंद्रों पर धान खरीदी कार्य सुचारू रूप से जारी रह सके। संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो उन्हें मजबूरी में धान खरीदी रोकने का कठिन निर्णय लेना पड़ेगा।
यह स्थिति किसानों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि धान की बिक्री उनकी आय का मुख्य स्रोत है। समय पर धान का उठाव न होने से न केवल उपार्जन केंद्रों पर अव्यवस्था फैलेगी, बल्कि किसानों को भी अपनी उपज बेचने में कठिनाई का सामना करना पड़ेगा। प्रशासन से अपेक्षा है कि वह इस गंभीर समस्या का त्वरित और प्रभावी समाधान निकाले।