दो परिवानों ने मजबूरी में छोड़ा गांव
जानकारी अनुसार, नक्सलियों ने दो परिवार को अपना घर गांव खेती छोड़़कर जाने पर मजबूर कर दिया है। दोनों परिवार के 11 लोग घर सामान समेट कर एक वाहन में सुरक्षित स्थान दंतेवाड़ा जिले के गांव की तलाश की है। किसान परिजनों के सामने सबसे बड़ी समस्या खेती बाड़ी छोड़ने की है। लेकिन जान बचाना भी जरूरी है। नक्सली फरमान नहीं मानते हैं तो जान से हाथ धोना भी पड़ सकता है। इस मजबूरी से इन परिवारों ने फैसला लिया है।
परिवार के एक सदस्य को उठा ले गए नक्सली
जानकारी में यह बात सामने आई है कि नक्सलियों ने परिवार के एक युवा सदस्य को रस्सी से बांधकर जंगल की तरफ ले जाकर गांव छोड़ने और खेती-बाड़ी नहीं करने की हिदायत दी। फरमान के बाद परिवार के लोग बारिश के दिनों में किन हालातों में रहेंगे। यह भविष्य के गर्त में है। मिली जानकारी अनुसार, सोमवार रात में 30-35 हथियार बंद नक्सलियों ने युवक के बड़े भाई को बधक बनाकर जंगल ले गये। जंगल में मीटिंग कर गांव छोड़ने को कहा गया। उसके बाद खेती-बाड़ी नहीं करने की हिदायत दी। अल्टिमेटम के बाद परिवार सामान के साथ जान बचाने के लिए गांव छोड़ आया। सूत्रों ने बताया दो परिवार के करीब 11 सदस्य गांव छोड़ कर पड़ोसी जिले में बसने के लिए निकल गये। परिजनों ने दो पिक़़अप में सामान लादकर गांव से चले गए।
पत्नी को नहीं मालूम पति सीआरपीएफ में
अब ये ग्रामीण दंतेवाड़ा में अपना अस्थाई बसेरा बसायेंगे। पत्नी को नहीं मालूम की पति सीआरपीएफ ने भर्ती हुआ है। जो तीन युवक सीआरपीएफ में भर्ती हुए उसमें से एक युवक की पत्नी ने कहा कि पति सीआरपीएफ में कब भर्ती हुए। मुझे भी नहीं मालूम। लेकिन बढ़ी बात यह है की माओवादियों को इसकी जानकारी थी। एएसपी चंद्रकांत गवर्ना ने इस संबंध में कहा कि सूचना मिली है। परिजन गांव छोड़े हैं। लेकिन वे कोई कार्रवाई नहीं चाहते हैं।