फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नक्सल इलाकों में 'नोटा' ने बिगाड़ा खेल

Mon, 09 Dec 2013 01:49 PM IST
हिमांशु मिश्र
विज्ञापन
विज्ञापन
केंद्र की सत्ता के सेमीफाइनल मुकाबले में ‘नोटा’ नए और बेहद मजबूत विकल्प के रूप में सामने आया। यह विकल्प पहली बार मतदाताओं के सामने आया था।
विज्ञापन


4 राज्यों में 16 लाख से अधिक मतदाताओं ने सुप्रीम कोर्ट की पहल पर पहली बार उपलब्ध कराए गए इस विकल्प पर हाथ आजमाया।

कांटे की लड़ाई वाले छत्तीसगढ़ में तो-तीन फीसदी मतदाताओं ने इस विकल्प को अपना कर सबको हैरान करके रख दिया। मध्यप्रदेश और राजस्थान में दो फीसदी मतदाताओं ने तो दिल्ली के लगभग एक फीसदी मतदाताओं ने इस विकल्प का इस्तेमाल कर अपनी नाराजगी जाहिर की।

वैध नहीं माने जाएंगे नोटा के तहत पड़े वोट

पहली ही बार दिए गए इस विकल्प का व्यापक पैमाने पर हुए इस्तेमाल ने जहां राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ाई है, वहीं यह भी साफ हुआ है कि किसी को न चुनने के अधिकार ने विधानसभा चुनाव में ताबड़तोड़ मतदान में अपनी अहम भूमिका निभाई।
विज्ञापन


खास बात यह है कि कई सीटों पर हार-जीत के अंतर से ज्यादा नोटा विकल्प आजमाने वालों की संख्या ज्यादा थी।

राजनीतिक दलों में पारदर्शिता लाने के लिए मुहिम चलाने वाली संस्था एडीआर नोटा के व्यापक इस्तेमाल से खुश है। संस्था को लगता है कि अगर दलों ने अपराधियों और भ्रष्ट लोगों को टिकट देना जारी रखा तो भविष्य में नोटा (उपरोक्त में से कोई नहीं) विकल्प का इस्तेमाल करने वालों की संख्या बढ़ती जाएगी।

हालांकि अभी नतीजों के सीटवार ब्यौरे नहीं आए हैं, मगर साफ है कि नोटा के उपयोग ने कई दलों के समीकरण बिगाड़ कर रख दिए हैं। खासतौर पर छत्तीसगढ़ जहां एक फीसदी से थोड़ा अधिक मत ही सरकार को गिराने और बचाने का खेल करता रहा है।

नोटा को प्रभावी बनाना होगा

वहां इस विकल्प पर तीन फीसदी लोगों के हाथ आजमाने की महत्ता समझी जाती है। इसके अलावा दिल्ली के दो दर्जन सीटों पर बेहद नजदीकी मुकाबला रहा है। यहां भी 50 हजार लोगों के इस विकल्प के साथ जाने से कई दलों के समीकरण ध्वस्त हुए हैं।
विज्ञापन


छत्तीसगढ़ के चित्रकोट में नोटा का बटन खूब दबा
चुनाव आयोग ने पहली बार मतदाताओं को सारे उम्मीदवारों को खारिज करने का विकल्प दिया। ईवीएम में जिसे नन ऑफ द एबव (नोटा) के रूप में दर्ज किया गया था। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित चित्रकोट सीट पर सर्वाधिक 10848 मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया, जो कि तमाम राजनीतिक दलों के लिए एक सबक की तरह है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें