छत्तीसगढ़ में कांकेर के भानुप्रतापपुर विधानसभा उपचुनाव में हार-जीत से ज्यादा मार्जिन का मायने होगा। लीड से 2023 के विधानसभा चुनाव का संकेत मिल जाएगा। कहा जाता है कि, जिस पार्टी ने बस्तर जीता, प्रदेश में उसकी ही सरकार बनती है। कांग्रेस और भाजपा इस उपचुनाव को सेमीफाइनल मानकर रण में हैं, तो सर्व आदिवासी समाज राज्य में आदिवासियों की ताकत का अहसास करना चाहता है। चुनाव में वे भी ताल ठोंक रहा है, पर मुकाबला कांग्रेस और भाजपा में ही होने के आसार हैं।
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सर्व आदिवासी समाज से प्रमोटी आईपीएस उम्मीदवार
सर्व आदिवासी समाज भानुप्रतापपुर विधानसभा उपचुनाव में हल्ला-गुल्ला खूब कर रहा है, लेकिन यहां उसका परचम फहर पाएगा, ऐसा माहौल नजर नहीं आ रहा है। सर्व आदिवासी समाज ने प्रमोटी आईपीएस अफसर अकबर राम कोर्राम को अपना उम्मीदवार बनाया है। अफसरी करने के बाद चुनावी अखाड़े में कूदे अकबर राम कोर्राम की ताकत समाज ही है। जनता सर्व आदिवासी समाज को कितना महत्व देती है और राज्य में आदिवासी आरक्षण 32 फीसदी से घटाकर 20 फीसदी करने के छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले से कितनी नाराज से वोट प्रतिशत से झलकेगा।
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आरक्षण पर सरकार बीच का रास्ता निकालने की कोशिश में
भानुप्रतापुर अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट है। वैसे भूपेश सरकार ने आदिवासियों को साधने के लिए आरक्षण मुद्दे पर एक और दो दिसंबर को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है। भानुप्रतापपुर में पांच दिसंबर को वोटिंग है। साफ है कि सरकार आदिवासियों के लिए बीच का रास्ता निकालेगी, लेकिन भानुप्रतापुर उपचुनाव के नतीजे के कई मायने होंगे। इस चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के साथ सर्व आदिवासी समाज की भी प्रतिष्ठा दांव पर है। आरक्षण के मुद्दे पर सर्व आदिवासी समाज एकजुट दिखा। चुनाव में वह कितनी ताकत दिखाता है, उसके लिए आठ दिसंबर तक इंतजार करना होगा।