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बालोद हत्याकांड: ससुर को करंट लगाकर मारने वाली बहू और उसके प्रेमी को उम्रकैद; ग्रामीणों के शक से खुला था राज

Mon, 26 Oct 2026 10:38 PM IST
बालोद ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालोद

सार

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में ससुर मनोहर निर्मलकर की करंट लगाकर हत्या करने के मामले में अदालत ने बहू गीताबाई निर्मलकर और उसके प्रेमी लेखराम निषाद को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। पुलिस ने कॉल डिटेल, फॉरेंसिक साक्ष्य और बरामद सामान के आधार पर दोनों के खिलाफ मामला साबित किया।
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बहू और उसके प्रेमी को उम्रकैद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बालोद जिले के डौंडीलोहारा क्षेत्र में ससुर की सोते समय बिजली का करंट लगाकर हत्या करने के सनसनीखेज मामले में अदालत ने सख्त फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय (एडीजे कोर्ट) ने वैज्ञानिक और फॉरेंसिक साक्ष्यों को आधार मानते हुए मृतक की बहू और उसके संगीत शिक्षक प्रेमी को दोषी करार देकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

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अभियोजन के अनुसार, ग्राम खड़ेनाडी निवासी मनोहर निर्मलकर की 16 जुलाई 2025 की रात संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। अगली सुबह परिजन शव को अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट ले जाने की तैयारी कर रहे थे। इसी बीच ग्रामीणों ने मनोहर के चेहरे, माथे और गले पर जलने व चोट के गहरे निशान देखे। ग्रामीणों को अनहोनी की आशंका हुई, तो उन्होंने तुरंत डौंडीलोहारा पुलिस को सूचना दे दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने दाह संस्कार रुकवाकर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा, जहां शॉर्ट पीएम रिपोर्ट में मौत की असली वजह ‘इलेक्ट्रिक शॉक’ पाई गई।

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साइकिल से गिरने की गढ़ी थी झूठी कहानी
पुलिस विवेचना में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। मृतक की बहू गीताबाई निर्मलकर (30) का गांव में हारमोनियम सिखाने वाले संगीत शिक्षक लेखराम निषाद (25) के साथ प्रेम-प्रसंग चल रहा था। दोनों ने मिलकर मनोहर की सोते समय बिजली के तारों से करंट लगाकर हत्या कर दी थी।
वारदात पर पर्दा डालने के लिए आरोपियों ने ग्रामीणों को बताया कि मनोहर साइकिल से गिरकर घायल हो गए थे। करंट के कारण त्वचा जलने के निशानों को छिपाने के लिए चेहरे और घावों पर हल्दी, तेल और गुलाल पोत दिया गया था, ताकि किसी को शक न हो।
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तकनीकी साक्ष्यों से कसा शिकंजा
डौंडीलोहारा पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1), 61(2) और 238 के तहत जुर्म दर्ज किया। तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक मुकेश सिंह और साइबर सेल की टीम ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और मैदानी साक्ष्यों को जोड़ते हुए आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल बिजली का तार, रबर के दस्ताने, खून लगा गमछा और मोबाइल फोन बरामद किए। मुकदमे के दौरान राज्य शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक घनश्याम सिंह साहू ने पैरवी की। न्यायालय ने पुलिस के पुख्ता वैज्ञानिक साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को सही पाते हुए गीताबाई निर्मलकर (निवासी खड़ेनाडी) और लेखराम निषाद (निवासी बड़गांव) को दोषी ठहराते हुए ताउम्र कैद की सजा सुनाई।

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