बालोद में पिछड़ा वर्ग महासभा द्वारा आज कलेक्ट्रेट परिसर तक मसाले यात्रा निकाल कर अपनी तीन सूची मांगों को सरकार के समक्ष रखा गया यहां पर आगामी होने वाली जनगणना में ओबीसी वर्ग के लिए अलग कलम करने की मांग की गई और जो 27 प्रतिशत आरक्षण का मामला छत्तीसगढ़ में लंबे समय से लंबित है उसे भी लागू करने की मांग यहां पर की गई है साथ ही ओबीसी वर्ग से आने वाले कवर्धा के प्रशांत साहू मौत मामले में कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने और ओबीसी वर्ग के सुरक्षा के लिए कानून बनाए जाने की मांग यहां पर पिछड़ा वर्ग महासभा द्वारा की गई है यहां पर केंद्र शासन के नाम संयुक्त कलेक्टर पूजा बंसल को ज्ञापन सोपा गया।
बालोद जिलाध्यक्ष भगवती सोनकर ने बताया कि विगत ३० वर्षों से लंबित ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत छत्तीसगढ़ राज्य में शीघ्र लागु किया जावे। संविधान लागू होने के 43 साल बाद 1993 माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णयानुसार ओबीसी 27 प्रतिशत आरक्षण केन्द्र सरकार केन्द्रीय सेवाओं में दिया गया, साथ ही राज्यों की स्थिति के आधार पर ओबीसी के लिए आरक्षण सुनिश्चित करने का अधिकार राज्य सरकार को दिया गया, किन्तु ओबीसी समुदाय को अविभाजित मध्यप्रदेश में मात्र 14 प्रतिशत आरक्षण शिक्षा एवं रोजगार में दिया गया, जोकि छत्तीसगढ़ में आज पर्यंत लागू है। बहुसंख्यक ओबीसी समुदाय को आबादी के अनुरूप हिस्सेदारी (आरक्षण) प्रदान नहीं करने के कारण प्रदेश में ओबीसी समुदाय के समुचित विकास एवं उत्थान में अपरिमित नुकसान हो रही है। पिछली छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 02 दिसम्बर 2022 को पारित आरक्षण संशोधन विधेयक में महामहिम राज्यपाल के हस्ताक्षर नहीं हो पाने के कारण 27 प्रतिशत आरक्षण लागू नहीं पाया है। अतः महामहिम राज्यपाल का हस्ताक्षर उक्त बिल में जल्द से जल्द होना चाइए।