150 कृषक करते हैं सप्लाई
दुग्ध उत्पादक कृषकों ने बताया कि लगभग डेढ़ सौ कृषक ऐसे हैं, जो की सरकारी संघ में दूध देते हैं। वर्तमान में मौसम के हिसाब से दूध के उत्पादन में कमी आ गई है। हमें बिल्कुल भी फायदा नहीं हो रहा है। ऐसा लग रहा है कि जैसे हम कर्ज लेकर यहां पर दूध की सप्लाई कर रहे हैं। यदि प्रबंधन द्वारा दूध की दरों में वृद्धि नहीं की गई तो वह दूध दे पानी में असमर्थ हैं। आपको बता दें कि बालोद जिले में दूध गंगा के नाम से यह एक सरकारी संस्था है और इस संस्था में मिल्क प्रोसेसिंग कर विभिन्न मिठाइयां और दूध से बने हुए उत्पादन और दूध की पैकेजिंग कर विक्रय की जाती है।
समीति को हुआ हानि
दूधगंगा सहकारी समिति के प्राधिकृत अधिकारी गणेश जोशी ने बताया कि जब 40 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से दूध खरीदा जा रहा था तो समिति को प्रति लीटर सामान्य रूप से 5 रुपए का नुकसान होता था। उस समय 304 महीने समिति पूरी तरह घाटे में गया और जब 40 रुपए लीटर था तो दूध की मात्रा काफी ज्यादा थी। दूध की आवक बढ़ने से हम दूध को खफा नहीं पा रहे थे। दूसरी जगहों पर हमें 35 रुपये लीटर में ही बेचना पड़ जाता था। इसलिए हमने घाटे से उबारने के लिए 40 रुपए से कम करके 35 रुपए प्रति लीटर में दूध खरीदी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि किसान दूध की कीमतें बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। परंतु हम यह कर पाने में सक्षम नहीं हैं। उच्च अधिकारियों से चर्चा के बाद ही कोई ठोस निर्णय लिया जा सकता है।