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CG News: DMF फंड में कथित गड़बड़ी पर बड़ा एक्शन, पूर्व IAS अनिल टुटेजा ACB की गिरफ्त में

Tue, 24 Feb 2026 10:52 AM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर

सार

राज्य की एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने विस्तृत जांच के बाद पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को गिरफ्तार कर लिया है। अनिल टुटेजा पहले से ही कथित शराब घोटाले के एक अन्य मामले में न्यायिक अभिरक्षा में हैं।
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पूर्व IAS अनिल टुटेजा ACB की गिरफ्त में - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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छत्तीसगढ़ में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) निधि से जुड़े बहुचर्चित मामले ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। राज्य की एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने विस्तृत जांच के बाद पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को गिरफ्तार कर लिया है। अनिल टुटेजा पहले से ही कथित शराब घोटाले के एक अन्य मामले में न्यायिक अभिरक्षा में हैं। इस बार उन्हें प्रोडक्शन वारंट के जरिए जेल से गिरफ्तार किया गया और न्यायालय में पेश करने के बाद 26 फरवरी 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।
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एंटी करप्शन ब्यूरो के अधिकारियों के अनुसार विवेचना के दौरान बड़ी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य, इलेक्ट्रॉनिक संचार रिकॉर्ड, फर्मों से संबंधित दस्तावेज और कई व्यक्तियों के बयान एकत्र किए गए। जांच एजेंसी का दावा है कि प्रारंभिक साक्ष्यों से यह संकेत मिलता है कि DMF निधि के अंतर्गत स्वीकृत विभिन्न कार्यों में कथित रूप से परिचित ठेकेदारों और संबद्ध फर्मों को लाभ पहुंचाया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ फर्मों को कार्य आवंटन में कथित तौर पर रिश्तेदारों और निकट संबंधियों की भूमिका रही। आरोप है कि इन कार्यों के बदले कमीशन लिया गया और शासकीय निधि के उपयोग की प्रक्रिया में पारदर्शिता के नियमों की अनदेखी की गई।

DMF निधि क्या है और क्यों अहम है?
डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) एक वैधानिक ट्रस्ट व्यवस्था है, जिसे खनिज प्रभावित जिलों में स्थानीय विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और आधारभूत ढांचे के लिए बनाया गया है। खनन कंपनियों से वसूले गए अंशदान को इस निधि में जमा किया जाता है, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्य किए जा सकें। ऐसे में इस फंड के उपयोग में अनियमितता का मामला सामने आना गंभीर माना जा रहा है।
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ACB के अनुसार उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया शासकीय धन के दुरुपयोग, आपराधिक षड्यंत्र और भ्रष्ट आचरण से जुड़े संज्ञेय अपराध बनते हैं। जांच एजेंसी अब वित्तीय लेनदेन की श्रृंखला (मनी ट्रेल) की गहराई से जांच कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कथित कमीशन की राशि किन-किन स्तरों तक पहुंची।
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