छत्तीसगढ़ में कथित ओवरटाइम भुगतान घोटाले ने अब कानूनी कार्रवाई का बड़ा रूप ले लिया है। राज्य की जांच एजेंसी आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो और एंटी करप्शन ब्यूरो (EOW/ACB) ने इस मामले में आरोपी अनवर ढेबर को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को विशेष न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। जांच एजेंसियां अब उससे पूछताछ कर वित्तीय लेनदेन की परतें खोलने में जुटी हैं।
ब्यूरो के अनुसार आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7बी और 8 के साथ भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। इन धाराओं के तहत रिश्वत, प्रभाव का दुरुपयोग और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। इस पूरे मामले की शुरुआत 29 नवंबर 2023 को हुई, जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने तीन व्यक्तियों के पास से 28.80 लाख रुपये नकद जब्त किए। इस बरामदगी के बाद ईडी ने राज्य शासन को विस्तृत सूचना भेजी। प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर EOW/ACB ने एफआईआर दर्ज कर औपचारिक जांच शुरू की, जिसके बाद कथित वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा नेटवर्क सामने आया।
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (CSMCL) में वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच ओवरटाइम/अधिसमय भत्ते के नाम पर 100 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया। नियमानुसार यह राशि शराब दुकानों में कार्यरत कर्मचारियों को सीधे मिलनी थी, लेकिन भुगतान कथित रूप से मैनपावर और प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से किया गया। जांच एजेंसियों का दावा है कि एजेंसियों को दिए गए बिलों में दर्शाई गई ओवरटाइम राशि वास्तविक कर्मचारियों तक पूरी तरह नहीं पहुंची। आरोप है कि इस रकम का एक हिस्सा कथित रूप से कमीशन के रूप में निकाला गया और उसे विभिन्न स्तरों पर अवैध रूप से वितरित किया गया।
आबकारी राजस्व को नुकसान
मामले में यह भी सामने आया है कि इस प्रक्रिया के जरिए शासन के आबकारी राजस्व से बड़ी रकम निकाली गई। कर्मचारियों को देय भुगतान न कर उसे अनधिकृत लाभ के रूप में बांटने से राज्य को आर्थिक क्षति हुई। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि भुगतान स्वीकृति की प्रशासनिक प्रक्रिया में किन-किन स्तरों पर लापरवाही या मिलीभगत हुई।
आरोपी तक पहुंचता था कथित कमीशन
EOW/ACB के अनुसार अब तक की जांच में संकेत मिले हैं कि एजेंसियों के जरिए निकाली गई कमीशन राशि अंततः आरोपी अनवर ढेबर तक पहुंचाई जाती थी। हालांकि जांच अभी जारी है और एजेंसी बैंक खातों, भुगतान वाउचरों, ई-मेल संचार और अनुबंध दस्तावेजों की गहन पड़ताल कर रही है।
आगे क्या?
पुलिस रिमांड के दौरान आरोपी से पूछताछ में कई अहम वित्तीय कड़ियों और संभावित लाभार्थियों के नाम सामने आ सकते हैं। जांच एजेंसियां डिजिटल साक्ष्यों और मनी ट्रेल को खंगाल रही हैं। आने वाले दिनों में यह मामला और बड़े खुलासों की ओर बढ़ सकता है।