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102 साल की वृद्धा ने पूरा कर दिखाया मोदी का सपना

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प्रधानमंत्री मोदी ने सत्ता में आने के बाद जो सपना देखा था उसे जहां बड़ी-बड़ी कारपोरेट कंपनियां पूरा नहीं कर पाई उसे एक 102 साल की वृद्धा ने पूरा कर दिखाया। छत्तीसगढ़ की रहने वाली 102 वर्षीय वृद्धा ने प्रधानमंत्री के स्वच्छता अभियान को गति देते हुए क्षेत्र में मिसाल कायम की है।
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टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार छत्तीसगढ़ के दूर दराज क्षेत्र की रहने वाली कुवरबाई यादव ने शौचालय निर्माण के लिए अपनी बकरियों को 22 हजार में बेच डाला।

उनके इस कार्य के बाद गांव में लोगों ने अपने घरों में शौचालय निर्माण की मुहिम छेड़ दी। धमतरी जिले के कोटाबारी गांव की रहने वाली वृद्धा कुवरबाई ने लोगों को खुले में शौच से रोकने के लिए घर घर जाकर उन्हें जागरूक करने की मुहिम चला रखी है।
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बकरियों को बेचकर गांव में बनवाया शौचालय

कुवरबाई कहती हैं कि जंगलों से भरे गांवों की जिंदगी काफी संघर्षपूर्ण होती है। वो बताती हैं कि मैं एक बार एक चौपाल में गई थी जहां मुझे खुले में शौच से होने वाली विभिन्न बीमारियों के बारे में पता चला।

वो बताती हैं कि तब मैने इस संबंध में कुछ करने का फैसला किया। मैंने अपनी बकरियों को बेच दिया और हर किसी को शौचालय निर्माण की अपनी योजना के बारे में बताया।

उनकी इस मुहिम के बाद लगभग 450 लोगों की आबादी वाले गांव में एक उत्साह फैल गया और लोगों में अपने घरों में शौचालय निर्माण की होड़ लग गई। धमतरी जिला प्रशासन ने भी वृद्धा की इस मुहिम में उनका साथ दिया और घरों में शौचालय निर्माण कराने वालों को नरेगा योजना के तहत सब्सिडी उपलब्‍ध करानी शुरू कर दी।
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पहला खुले में शौच मुक्त गांव घोषित

102 साल की इस वृद्धा की इस मुहिम का ऐसा असर हुआ कि कोटाबारी गांव को खुले में शौच विहीन गांव घोषित कर दिया गया है।

स्वच्छता के इस अभियान का ग्रामीणों पर काफी अच्छा असर हुआ कि कमर प्रजाति के नजदीकी गांव में भी घरों में शौचालय निर्माण की मुहिम शुरू हो गई।

उनके समुदाय के नेता लवकुश ध्रुव और बघेलराम कहते हैं कि ग्रामीणों ने कभी खुले में शौच से होने वाले नुकसान के बारे में सोचा नहीं ‌था इसलिए उन्हें इसकी जानकारी भी नहीं थी। वो कहते हैं कि यह इस सारे अभियान को दिशा देने के लिए एक अच्छा प्रयास था।
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