चंडीगढ़। डीसी ऑफिस में डाटा एंट्री पद पर फर्जी नियुक्ति पत्र मामले में चंडीगढ़ पुलिस के साइबर सेल ने जांच शुरू कर दी है। जांच में परत दर परत खुलने लगी हैं। पता चला है कि युवक को जो नियुक्ति पत्र भेजा गया था वह आरोपी ने ई मेल से भेजा था। साइबर सेल एक्सपर्ट अब ई मेल की कई तकनीकी पहलुओं पर जांच कर रहे हैं।
सोमवार को सेक्टर-45 बुड़ैल निवासी मुख्तियार डीसी ऑफिस में डाटा एंट्री पद का नियुक्ति पत्र लेकर पहुंचा था। वहां उसे पता चला कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है। एडीसी सचिन राणा ने पीड़ित से मुलाकात कर सारे मामले की जानकारी ली और पुलिस को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच कराने को कहा। एडीसी द्वारा पुलिस को भेजे पत्र में लिखा है कि मुख्तियार से किसी गिरोह ने नौकरी के नाम पर एक लाख रुपये हड़प लिए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए चंडीगढ़ पुलिस के साइबर सेल ने सोमवार को ही जांच शुरू कर दी। जांच में पता चला कि युवक को जो नियुक्ति पत्र भेजा गया है वह आरोपियों द्वारा ई मेल से भेजा गया है। साइबर सेल के एक्सपर्टों ने ई मेल को लेकर कई पहलुओं पर जांच शुरू कर दी है।
सरकारी विज्ञापन का लिया सहारा
धोखाधड़ी के मामले में गिरोह के सदस्यों ने हाल ही में यूटी प्रशासन द्वारा जारी किए गए विज्ञापन का सहारा लिया। पता चला है कि हाल ही में प्रशासन ने विभिन्न विभागों में डाटा एंट्री और क्लर्क के पदों पर नियुक्ति को लेकर विज्ञापन प्रकाशित किया था। इस विज्ञापन का सहारा लेकर गिरोह के सदस्यों ने युवक को जालसाजी का शिकार बनाया।
पहले भी हो चुके हैं मामले
डीसी ऑफिस में फर्जी नियुक्ति पत्र का मामला कोई नया नहीं है। इससे पहले भी स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग के साथ ही पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में भी नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये हड़पने के मामले सामने आ चुके हैं। 2017 के नवंबर में पीजीआई में नौकरी दिलाने के नाम पर हरियाणा के पानीपत निवासी युवक को शिकार बनाया गया था। 2019 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की धोखाधड़ी हुई थी, जिसमें जांच अभी चल रही है।
कोट
मामला संज्ञान में है। पुलिस विभिन्न पहलुओं पर जांच कर रही है। जल्द ही मामले से जुड़े सकारात्मक परिणाम सामने होंगे।
- चरनजीत सिंह विर्क, पीआरओ, चंडीगढ़ पुलिस।