चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी जोन-ए के चार दिवसीय 62वें यूथ एंड हेरिटेज फेस्टिवल की शुरुआत शनिवार को पीजीजीसी-46 कॉलेज में की गई। दो साल बाद आयोजित हुए फेस्टिवल की शुरुआत गीत तमसो मा ज्योतिर्गमय.. पंजाब विश्वविद्यालय तेरी शानो शौकत सदा रहे... के साथ की गई।
इस दौरान मुख्य अतिथि पीयू यूथ वेलफेयर के निदेशक डॉ. निर्मल जौड़ा ने बताया कि पिछले महीनों में बहुत संघर्ष के बाद फेस्टिवल करवाने की अनुमति मिली है। इसमें दो हजार के करीब यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के प्रतिभागी विद्यार्थी और 200 शिक्षक हिस्सा ले रहे हैं। पाबंदियों के कारण इस बार हमें कॉलेज के विद्यार्थियों की छुुट्टी करनी पड़ी है, क्योंकि कोरोना महामारी के निर्देशों को देखते हुए दर्शकों को नहीं बुला सकते थे।
कोरोना के कारण विद्यार्थी हुए निराश
कोरोना महामारी के कारण सैंकड़ों विद्यार्थियों को इस बार निराश होना पड़ा, क्योंकि वे कॉलेज में आयोजित फेस्टिवल का हिस्सा नहीं बन पाए, जोकि हर विद्यार्थी का कॉलेज में आने के बाद सपना होता है। सुबह से लेकर शाम तक पंजाब यूनिवर्सिटी और शहर के कॉलेजों के विद्यार्थी पीजीजीसी-46 पहुंचते रहे लेकिन उन्हें पाबंदियों के कारण मुख्य द्वार से ही लौटना पड़ा। इस बार प्रतिभागी विद्यार्थियों और शिक्षकों को आयोजक कॉलेज ने स्पेशल पास जारी किए थे, जिसे दिखाने के बाद ही उन्हें कॉलेज में आने की अनुमति मिली। इस बार यूथ फेस्टिवल का विषय प्रकृति के प्रति प्रेम था। पहले दिन ग्रुप शबद, क्लासिकल वोकल, लाइट वोकल, ग्रुप गायन, ग्रुप डांस, फोक सांग, क्लासिकल डांस, कविता लेखन, निबंध लेखन, कहानी लेखन, हैंड राइटिंग, हेरिटेज क्विज, हेरिटेज आर्ट एंड क्राफ्ट प्रतियोगिताएं, गुड्डियां पटोले मेकिंग, परांदा मेकिंग, टोकरी, नाला मेकिंग, मिट्टी के खिलौने बनाना, पीढ़ी बनाना, रस्सा वटना, ईनू बनाना का आयोजन किया गया। प्रतियोगिताओं का परिणाम शनिवार को ही घोषित कर दिया गया।
हीर-रांझा की गाथा के साथ पंजाब के इतिहास को गीतों में किया पेश
शहर के कॉलेजों और पीयू से आए विद्यार्थियों ने लोक पहरावे और साज के संगीत के साथ हीर-रांझा की गाथाओं के साथ पंजाब के इतिहास को गीतों के जरिए बयां किया। इसके साथ ही नृत्य में विद्यार्थियों ने हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के लोकनृत्य को पेश किया। विद्यार्थियों के सामने हर लोक प्रतियोगिता में वहां की संस्कृति की झलक को पेश करना आवश्यक था, जिससे लोक-संस्कृति के प्रति जागरूक किया जा सके।