अभी इस पर काबू नहीं पाया गया तो हालत गंभीर हो सकते हैं। ऐसे में हम सभी लोगों को प्रशासन का सहयोग करना होगा। लोगों को घरों के बाहर कोविड-19 के पोस्टर लग जाने से कतई नहीं डर जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की है कि सभी सरकार के आदेशों का पालन करें और घरों से निकलने से परहेज करें। उन्होंने कहा कि जिन्हें अस्थमा या सांस से जुड़ी दिक्कत है, उन्हें यह वायरस जल्दी चपेट में लेता है। ऐसे लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है।
खुद जाकर करवाया था टेस्ट
युवक ने बताया कि वह 12 मार्च को पत्नी के साथ इंग्लैंड से लौटे थे। 16 मार्च को उनको हल्का बुखार हुआ और वह वैसे ही फेज-6 सिविल अस्पताल चले गए। लेकिन वहां पर टेस्ट में कोई कोरोना जैसी बात नहीं बताई गई थी तो वह वापस घर चले आए। इसके बाद होम्योपैथी के डॉक्टर से दवा ली। उनके कोर्स के हिसाब से वह दवाई लेते रहे।
इसके बाद भी दो दिन बुखार नहीं उतरा तो डॉक्टर साहब से बात की। हालांकि उनका यात्रा इतिहास भी था। ऐसे में उन्होंने अपने बच्चों और परिवार की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए खुद का कोरोना टेस्ट करवाने का फैसला लिया।
वह चंडीगढ़ के जीएमएसएच-16 गए और वहां अपना कोरोना टेस्ट करवाया तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई और वहीं दाखिल हो गए। जीएमएसएच-16 के डॉक्टरों ने उनका विशेष ध्यान रखा और उनके इलाज से वह स्वस्थ होकर अपने घर लौटे हैं।
युवक ने बताया कि कोरोना से जंग में चंडीगढ़ के अस्पताल में तैनात डॉक्टरों ने पूरा सहयोग किया। हालांकि उनकी रिपोर्ट 14 दिन पहले उसी रात को पॉजिटिव आ गई थी। उनका परिवार ज्यादा पैनिक न हो जाए। ऐसे में डॉक्टरों ने मुझे सुबह रिपोर्ट बताई। इसके बाद आगे इलाज चला।
मेरी पत्नी भी कोरोना पॉजिटिव आई, हालांकि उनके परिवार के बाकी सदस्यों को यह संक्रमण नहीं था। उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ के अस्पताल में तैनात सारा स्टाफ प्रोफेशनल है। इसके अलावा दवाई से लेकर खाना तक सब बढ़िया था। जिससे मुझे काफी अच्छा लगा।
फोन से लगा रहा दिल, वार्ड में ही करता था सैर
युवक ने बताया कि अस्पताल में उन्हें समय गुजरने का पता ही नहीं चला। क्योंकि मोबाइल फोन के कारण दिल लगा रहा और अपने परिजनों से बातचीत करता रहा तो ज्यादा बोरियत नहीं हुई और दिल लगा रहा और मेरा इलाज भी चलता रहा। इसके साथ ही मैं वार्ड में अकेला ही था और वहीं सैर करता रहता था। कोरोना को लेकर फोन पर ही उन्हें देश-दुनिया की हर खबर मिल रही थी और अपने दोस्तों-रिश्तेदारों और जानकारों से भी संपर्क में थे। सभी ने उनका हौंसला बढ़ाया और उनमें जोश भरा रहा।
पिज्जा बर्गर नहीं, रिकवरी के लिए सबसे अच्छा घर का खाना
युवक ने कहा कि लोगों को चाहिए कि वह अपनी खुराक पर भी पूरा ध्यान दें और गर्म साधारण भोजन ही करें। जहां तक हो सके तो वेस्टर्न फूड खासकर पिज्जा, बर्गर और अन्य जंक फूड से परहेज करें। घर के हेल्दी खाने में काफी ताकत है, इसी से जल्दी रिकवरी होती है।
सरकारी अस्पतालों को दान करें राशन
युवक ने बताया कि हमें सरकारी अस्पतालों में भी खाने-पीने का राशन दान करना चाहिए, ताकि सरकारी अस्पतालों में किसी भी तरह की कोई कमी न रहे और लोगों को बढ़िया सेहत सुविधाएं मिल पाएं।