केवल कुलतार सिंह संधवां और प्रो. बलजिन्दर कौर को ही सदन में जाने की इजाजत दी गई। काफी बहस के बाद अमन अरोड़ा, जय सिंह रोड़ी और मास्टर बलदेव सिंह को भी इजाजत मिल गई लेकिन चीमा, माणूंके और हेयर की तरफ से अपने कोरोना टेस्ट निगेटिव और बिजनेस एडवाइजरी समिति (बीएसी) का ताजा निमंत्रण पत्र दिखाए जाने के बावजूद उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया।
इसके बाद हरपाल सिंह चीमा के नेतृत्व में बीबी माणूंके और मीत हेयर पीपीई किट पहने हुए उतनी देर पंजाब भवन के समक्ष धरने पर बैठे रहे, जितनी देर सत्र खत्म कर बाकी साथी विधायक उनके साथ धरने पर नहीं आ बैठे।
सदन में अमन अरोड़ा ने उठाया मामला
सदन में बिलों पर बहस के दौरान आप विधायक अमन अरोड़ा ने उनके बाकी साथियों को प्रवेश नहीं दिए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि विधानसभा की ओर से कोविड संबंधी दिशानिर्देशों में ऐसा कहीं नहीं कहा गया कि निगेटिव रिपोर्ट वाले सदस्यों को उनके गनमैन या पड़ोसी के पॉजिटिव पाए जाने के कारण सदन में नहीं आने दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के कोरोना निगेटिव रिपोर्ट वाले विधायकों को भी सदन में जाने से रोका गया।
यूथ अकाली दल ने शुक्रवार को अध्यक्ष सरदार परमबंस सिंह रोमाणा के नेतृत्व में पंजाब विधानसभा के बाहर जोरदार रोष प्रदर्शन करते हुए मांग की कि अनुसूचित जाति स्कॉलरशिप के 69 करोड़ रुपये का कथित घोटाला करने के लिए कैबिनेट मंत्री साधु सिंह धर्मसोत पर केस दर्ज कर तत्काल गिरफ्तार किया जाए।
रोमाणा ने कहा कि जिस मंत्री पर अनुसूचित जाति तथा पिछड़े वर्ग की भलाई की जिम्मेदारी है, वह उसी वर्ग को नुकसान पहुंचाने लगा है। पिछले तीन सालों के दौरान एससी स्कॉलरशिप के लिए केंद्र सरकार से 811 करोड़ रुपये आए हैं पर सरकार ने यह छात्रों के लाभ के लिए कॉलेजों को वितरित नहीं किए, जिसके कारण एक लाख से ज्यादा एससी छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त करने से वंचित हो गए हैं।
रोमाणा ने कहा कि विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने की जांच में मंत्री को स्वयं इस गबन का जिम्मेदार करार दिया है। धर्मसोत को केंद्र सरकार से एससी छात्रों के लिए स्कॉलरशिप के लिए मिले 39 करोड़ रुपये अयोग्य प्राइवेट संस्थानों को देने का दोषी पाया गया है। रोमाणा ने कहा कि यूथ अकाली दल कभी भी नौजवान वर्ग का नुकसान नहीं होने देगा।
उन्होंने कहा कि इस पैसे के गबन के लिए मंत्री ने अपने आप ही फाइलों पर हस्ताक्षर किए तथा फाइल से प्रमुख सचिव द्वारा लगाए एतराज भी हटा दिए। यूथ अकाली दल अध्यक्ष ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री ने धर्मसोत के खिलाफ कार्रवाई न की तो फिर यूथ अकाली दल मुख्यमंत्री का घेराव करेगा।
शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने शुक्रवार को पंजाब विधानसभा के एक दिवसीय सत्र में हिस्सा नहीं लिया। सत्र समाप्ति के बाद शिअद विधायक दल ने राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर से आग्रह किया कि वह कांग्रेस सरकार को राज्य के ज्वलंत मुददों पर चर्चा के लिए अगले महीने विधानसभा का सत्र फिर से बुलाने का निर्देश दें।
पार्टी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने कोरोना का इस्तेमाल लोगों के गुस्से का सामना करने के बजाय भागने के लिए किया है। राज्यपाल को लिखे पत्र में शरनजीत सिंह ढ़िल्लों के साथ-साथ अन्य शिअद विधायकों ने कहा कि यह हस्तक्षेप जरूरी है क्योंकि राज्य में संसदीय प्रक्रिया पूरी तरह से टूट गई है और कांग्रेस सरकार को लोकतंत्र का मजाक बनाने से रोकने के लिए सुधारात्मक कदम उठाए जाने की जरूरत है।
विधायकों ने राज्यपाल के ध्यान में लाया कि चंडीगढ़ पुलिस से विपक्षी विधायकों के आवास घेरने को कहा गया ताकि वे अपने घरों से बाहर न निकल सकें। उन्होंने कहा कि राज्य के इतिहास में पहले कभी निर्वाचित प्रतिनिधियों को इस तरीके से नहीं रोका गया। उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया कि वे विधायकों की इस जबरन घर में गिरफ्तारी की जांच के आदेश दें।
विधायकों ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने जानबूझकर विधायकों को एक घंटे के सत्र में भाग लेने के लिए अयोग्य करार दिया था। यदि कोविड-19 पॉजिटिव विधायकों के साथ संपर्क करने के लिए एकमात्र मापदंड है जैसा कि स्पीकर द्वारा कहा गया है तो स्पीकर के लिए भी यही नियम लागू होता है, जो कांग्रेस के विधायक व उनके सहयोगियों के संपर्क में थे, जिनकी कोविड पॉजिटिव रिपोर्ट आई है, वे भी सत्र में भाग लेने के लिए अयोग्य करार होने चाहिए।
पत्र में कहा गया है कि शिअद विधायक दल ने कल विधानसभा अध्यक्ष से संपर्क किया और उन्हें सूचित किया कि उनके सदस्यों ने पूरी तरह से एहतियात बरतने के बाद दल की मीटिंग बुलाई थी। मीटिंग में शामिल हुए अन्य सभी विधायकों में विधायक गुरप्रताप सिंह वडाला कोविड पॉजिटिव की रिपोर्ट मिली।