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युवा शायरों ने जीता श्रोताओं का दिल

Mon, 30 Dec 2013 01:07 AM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
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युवा लेखक कला मंच चंडीगढ़ की ओर से कलाग्राम में आयोजित राष्ट्रीय मुशायरे के दौरान चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा के शायरों ने अपनी शायरी से श्रोताओं का दिल जीत लिया। इस मौके पर शायर बीडी कालिया हमदम मुख्य अतिथि रहे। नार्थ जोन कल्चरल सेंटर पटियाला के सहयोग से आयोजित इस मुशायरे में अपनी शायरी पेश की।
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इसमें कशिश होशियारपुरी ने युवा शायरों की जमकर तारीफ की। उन्होने अपने शेर... शायरी हर दौर में सराही गई है, हर दौर में जिंदा रहेगी और इसका मुस्तकबिल रोशन रहेगा शायरी को समर्पित किया। इसके बाद उन्होंने शेर सुनाया तुमको तो सिर्फ अपने घराने की फिक्र है...शायर हूं मुझको सारे जमाने की फिक्र है। वफा खुलूस मोहब्बत बयान में रखना...सभी की तुमपे नजर है ध्यान में रखना। डा. मोहम्मद रफी ने इस मुशायरे में शेर अर्ज किया अजब एक शान थी अपने घरों की... डरा करते थे छोटे जब बड़ों से... फिर उन्होंने शेर अर्ज किया क्या अजब तौर से लुटा है दिल, दिल को कि गया कुछ भी नहीं बचा कुछ भी नहीं। डा. मोहम्मद रफी ने तीस साल के दौरान कुल 22 किताबें लिखी हैं। उन्होंने कहा कि उर्दू शायरी उनके दिल के बेहद करीब है। मोहाली के रहने वाले मुसव्विर फिरोजपुरी ने शेर अर्ज किया फौज दुश्मन की दूर है यारा...कोई ठुमरी ख्याल हो जाए... फिर उन्होंने शेर अर्ज किया छोटे हैं सराबों के, दरियाओं से लगते हैं, सहरा के मुसाफिर हैं इतना तो समझते हैं...।

उन्होंने शेर अर्ज किया हम प्यास की राहत की सरहद से गुजर आए, दरिया हो कि सहराहो अब एक से लगते हैं...। इस मौके पर फिरोजपुर से आए अनिल आदम ने आम आदमी को टच करती हुई एक नज्म पेश की...मैं आम आदमी हूं... धर्माधिकारी से लेकर राजनेता तक सब मेरा भला चाहते हैं, लेकिन जाने मैं किस मिट्टी का बना हूं कि मेरा भला नहीं होता। इस राष्ट्रीय मुशायरे के दौरान डा. मोहम्मद रफी, प्रोफेसर फुल चंद मानव, कशिश होशियारपुरी, नवीन नीर, अनिल आदम, साहिल माधोपुरी, आलिम वाजिद, तरुणा तारा, बलबीर बहरी तन्हा मौजूद रहे।
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