तीन कानूनों के तहत देशभर में चंडीगढ़ इकलौता ऐसा शहर है, जिसमें सीसीटीएनएस की ट्रेनिंग और एफएसएल के इंटीग्रेशन तक काफी तेजी से काम किया गया है। सिर्फ चंडीगढ़ में ही नए कानूनों के तहत कार्रवाई करने के लिए करीब 22 आईटी विशेषज्ञ और 125 डाटा एनालिस्ट रखे गए हैं। साथ ही थानों सहित अन्य कार्यालयों के लिए करीब 107 नए कंप्यूटर लगाए गए हैं।
सभी थानों में ई-गवाही के लिए वीडियो कांफ्रेंसिंग रूम बनाए हैं, जिसमें गवाही के लिए स्पीकर और दो वेब कैमरा लगाए गए हैं। थाने में एएसआई या इससे ऊंचे स्तर वाले जांच अधिकारियों को 170 टेबलेट, 25 मोबाइल फोन दिए गए है।
चंडीगढ़ पुलिस में 144 नए आईटी एक्सपर्ट कांस्टेबल भर्ती किए गए है, जिन्हें केवल जॉइनिंग मिलनी बाकि है। नए कानूनों के शत प्रतिशत क्रियान्वयन में देश में पहला एडमिनिस्ट्रेटिव यूनिट केवल चंडीगढ़ में है। इसके साथ ही नए आपराधिक कानूनों के तहत काम करने वाले इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) भी केवल यूटी पुलिस के पास है।
नए कानूनों के तहत की जाने वाली कार्रवाई करने के लिए जांच अधिकारियों को भी आईटी विशेषज्ञों की ओर से स्पेशल ट्रेनिंग दी गई। जांच अधिकारियों को घटनास्थल पर नए कानूनों की एप में ई-साक्ष्य के तहत डिजिटल साक्ष्यों को एप के माध्यम से संकलित कर उन्हें क्लाउड पर स्टोरेज करने से लेकर अन्य कार्रवाई के बारे में भी बताया गया। क्योंकि नए कानून के तहत भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) में किसी भी अपराध से संबंधित एवीडेंस को डिजिटल रूप में क्लाउड पर संकलित एवं सुरक्षित करने का प्रावधान है।
सबसे पहले सेनकॉप्स साइबर सिक्योरिटी यूटी पुलिस के पास
यूटी पुलिस के पास अपराध से जुड़े मामलों को सुलझाने के लिए देश की सबसे पहली सेनकॉप्स साइबर सिक्योरिटी सेल है। यह सेनकॉप्स चंडीगढ़ के अलावा पड़ोसी राज्यों पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश की पुलिस को जटिल साइबर अपराध से जुड़े मामलों को सुलझाने और साइबर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में सक्षम है। इसकी मदद से यूटी पुलिस को किसी भी मामले को सुलझाने में मदद मिलती है।