स्वराज संवाद अभियान के प्रमुख योगेंद्र यादव ने आरोप लगाया है कि नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के ठीक सामने रेसकोर्स जुआघर और सट्टेबाजी का अड्डा बन चुका है, लेकिन पीएम की नाक तले चल रही गैरकानूनी गतिविधियों पर केंद्र सरकार की नजर नहीं पड़ रही।
योगेंद्र यादव शुक्रवार को जय किसान आंदोलन के सिलसिले में चंडीगढ़ पहुंचे थे। प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने दिल्ली रेसकोर्स में चल रही गतिविधियों का जिक्र करते हुए कहा कि रेसकोर्स में जाने के लिए वैसे तो टिकट 60 रुपये का है, लेकिन अगर कोई व्यक्ति मोबाइल फोन के साथ प्रवेश करना चाहे तो एंट्री टिकट सीधे 4000 रुपये का हो जाता है।
उन्होंने कहा कि इससे साफ है कि रेसकोर्स में सट्टा खेला जा रहा है। उन्होंने कहा कि पीएम आवास के सामने बना यह रेसकोर्स अंग्रेजों ने किसानों की जमीन छीनकर बनाया था। उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री तुरंत इस रेसकोर्स को बंद करवाकर तय अवधि के बाद भी कब्जा जमाए बैठी कंपनी को हटाए और इस जमीन पर किसानों का स्मारक बनाया जाए, यह जबरन अधिग्रहीत की गई जमीन है।
किसानों से अधिगृहित की गई थी रेस्कोर्स की जमीन
यादव ने दावा किया कि ब्रिटिशकाल के दौरान अंग्रेज जब अपनी राजधानी कोलकाता से दिल्ली लाए थे, तब उन्होंने यहां बसे मालचा गांव की यह जमीन किसानों को खदेड़कर अधिग्रहीत की थी। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने तब कुछ किसानों को मामूली मुआवजा दे दिया, लेकिन ज्यादातर को जमीन से जबरन खदेड़ दिया गया।
यादव ने कहा कि भारत के कानून के अनुसार भी जनोद्देश्य से ली गई जमीन का इस्तेमाल किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यहां तो हालात यह है कि किसानों से ली गई जमीन पर प्रधानमंत्री निवास के सामने ही जुए और सट्टेबाजी के अड्डे के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
उन्होंने मांग की कि रेसकोर्स की जमीन का उपयोग उन किसानों के लिए स्मारक के रूप में किया जाए जो आजाद भारत में जबरन जमीन अधिग्रहण के चलते मर गए या उन लोगों की याद में, जो आजाद देश की सरकारों द्वारा कृषि और किसानों के साथ भेदभाव व उपेक्षा के चलते आत्महत्या करने को मजबूर हुए।
योगेंद्र यादव ने कहा कि रेसकोर्स की जमीन की लीज 1998 में ही खत्म हो गई थी, लेकिन केंद्र सरकार ने अब तक वह जमीन वापस नहीं ली है। आरोप लगाया कि इससे साफ हो जाता है कि सरकार और अफसरों की साठगांठ से ही वहां अवैध धंधे चल रहे हैं। उन्होंने बताया कि स्वराज अभियान ने इस संबंध में प्रधानमंत्री को नोटिस दिया है। अगर कुछ नहीं हुआ तो वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से रेसकोर्स की भूमि तक पहुंचेंगे।
84 दंगों के मामले में किसे हुई फांसी?
योगेंद्र यादव के सहयोगी प्रशांत भूषण की ओर से आंतकी याकूब मेनन की फांसी का विरोध किए जाने के बारे में पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवाल पर यादव ने कहा कि प्रशांत लंबे समय से टाडा जैसे कानून और फांसी की सजा के खिलाफ अदालतों में पैरवी करते रहे हैं। जहां तक मेरा निजी मत है, मैं भी फांसी की सजा के खिलाफ हूं।
सवाल उठाया कि याकूब की फांसी के विरोध पर ऐतराज तो हो रहे हैं, लेकिन क्या 1984 के दंगाइयों में से किसी को फांसी हुई? कश्मीर में हिंदुओं पर क्या कुछ बीती, उस पर कभी सुनवाई हुई है?
पंजाब के कई आप नेता हमारे संपर्क में
योगेंद्र यादव ने कहा है कि पंजाब में आम आदमी पार्टी के कई नेता और कर्मठ कार्यकर्ता उनके संपर्क में हैं। फोन पर उनसे बातचीत होती रहती है। योगेंद्र यादव शुक्रवार को चंडीगढ़ प्रेस क्लब में प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने दोहराया कि उन्हें आम आदमी पार्टी से निकाला गया था, उन्होंने खुद पार्टी नहीं छोड़ी थी।
उन्होंने इन खबरों का खंडन किया कि वे केजरीवाल द्वारा पार्टी में लौटने के आग्रह पर विचार कर रहे हैं। पंजाब में आप के बीच चल रहे घमासान के बारे में पूछे गए एक प्रश्न पर यादव ने कहा कि पंजाब में आप के कई कर्मठ कार्यकर्ता उनके संपर्क में हैं और उनसे अकसर फोन पर वार्तालाप होती रहती है।
यह पूछे जाने पर कि पटियाला और फतेहगढ़ साहिब के आप सांसदों के बारे में आम आदमी पार्टी का ही कहना है कि वे योगेंद्र यादव की बोली बोल रहे हैं, क्या यह सांसद भी उनके संपर्क में हैं। योगेंद्र यादव ने कहा, ‘‘अगर आम आदमी पार्टी मेरे बोलों को इतना अहम मानती है तो मैं उनका आभारी हूं। पंजाब में धर्मवीर गांधी का अपना कद ही आम आदमी पार्टी से भी ऊंचा है।’’