स्तन कैंसर में कीमो के दौरान योग वजन पर नियंत्रण के साथ मानसिक तनाव को कम करने में कारगर है। कैंसर जैसे रोग में योग से बीमारी की गंभीरता कम होती है और इलाज का प्रभाव भी तेजी से बढ़ता है। इसे विदेशियों ने भी शोध से साबित कर दिखाया है। पीजीआई की ओर से यूटी गेस्ट हाउस में आयोजित योग सम्मेलन में मंगलवार को यूएसए के इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ योग थेरेपिस्ट की उपाध्यक्ष डॉ. सुजैन ने इस पर किए गए शोध को प्रस्तुत किया।
डॉ. सुजैन ने बताया कि इस शोध में उन्होंने स्तन कैंसर से ग्रस्त 35 महिलाओं को शामिल किया। यह शोध वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के सहयोग से पूरा हुआ। उन महिलाओं में कैंसर की पुष्टि कुछ ही दिनों पहले हुई थी। ऐसे में कीमो के साथ उन पर योग के प्रभाव का आकलन शुरू किया गया।
यह ट्रायल 12 कीमोथेरेपी के दौरान कराया गया। इसमें तीन महीने का समय लगा। इसमें एक वर्ग में कीमो के साथ योग कराया गया और दूसरे वर्ग में सिर्फ कीमो ही दिया गया। डॉ. सुजैन ने बताया कि योग के दौरान विभिन्न आसन और मेडिटेशन कराए गए।
इससे योग वाले वर्ग में शामिल महिलाओं के शरीर और मन दोनों को आराम मिला। उनका वजन नहीं बढ़ा और वे अवसाद की स्थिति में नहीं गई, जबकि दूसरे वर्ग में शामिल महिलाओं में वजन भी तेजी से बढ़ा और वे तनाव के साथ अवसाद का शिकार हुईं। डॉ. सुजैन का कहना है कि स्तन कैंसर में वजन का बढ़ना खतरनाक होता है, इसलिए यह शोध इस मर्ज के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
वजन से कैंसर दोबारा होने का खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार शरीर का अतिरिक्त वजन कई कैंसरों, विशेषकर स्तन कैंसर के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक है। स्तन कैंसर के जो मरीज अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त हैं, उनमें कीमोथेरेपी से संबंधित साइडइफेक्ट, कैंसर की पुनरावृत्ति और स्तन कैंसर से संबंधित मृत्यु दर का खतरा बढ़ जाता है। मोटापा जीवित बचे लोगों के जीवन की गुणवत्ता के कारकों को भी प्रभावित कर सकता है, जिनमें यौन रोग, न्यूरोपैथी, कार्डियोटॉक्सिसिटी, क्रोनिक थकान और लिम्फोएडेमा शामिल हैं। अधिकांश कैंसर दिशा-निर्देश अनुशंसा करते हैं कि स्तन कैंसर से बचे लोग, जो अधिक वजन वाले या मोटापे से ग्रस्त हैं, अपना वजन कम करें और सामान्य बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) स्थिर बना रहे।
कीमो के बाद इन कारणों से बढ़ता है वजन
कीमोथेरेपी के बाद शरीर में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा हो जाता है, जिसे एडिमा कहा जाता है। थकान कीमोथेरेपी का एक आम दुष्प्रभाव है। इससे रोगी की शारीरिक गतिविधि में कमी आ सकती है, जिससे वजन बढ़ता है। इसके साथ ही कैंसर रोधी दवाएं तीव्र भोजन की लालसा पैदा कर सकती हैं और व्यक्ति के चयापचय को कम कर सकती हैं, ये दोनों वजन बढ़ने के जोखिम कारक हैं। वहीं, सूजन और मतली को कम करने के लिए दिए गए स्टेरॉयड से भी भूख बढ़ती है, जो वजन बढ़ा सकता है।