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2019 ने ट्राइसिटी को दीं खट्टी-मीठी यादें, गैंगरेप दोषियों को उम्रकैद, राखी पर दो बहनों का कत्ल

Mon, 30 Dec 2019 04:21 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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फाइल फोटो
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साल 2019 कई खट्टी मीठी यादों के साथ विदा हो रहा है। ट्राइसिटी की कुछ घटनाएं और उपलब्धियां हमेशा के लिए यादगार बन गई। विकास की रेलगाड़ी दौड़ी, लेकिन स्पीड नहीं पकड़ पाई। अपराध की घटनाओं ने जरूर निराश किया, लेकिन खेल, इनोवेशन, स्वास्थ्य और सुशासन के क्षेत्र में खूब नाम कमाया। जिला अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट ने ट्राइसिटी के हित में अच्छे फैसले सुनाकर लोगों में न्याय के प्रति विश्वास को मजबूत किया। एक नजर डालते हैं साल 2019 की उन खबरों पर जिन्हें शायद भूलने में काफी वक्त लगे।
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रक्षाबंधन पर दो बहनों की हत्या
15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कड़ी सुरक्षा के बावजूद चंडीगढ़ में दो बहनों की हत्या कर दी गई थी। एक के पेट में चाकू से वार किया गया, जबकि दूसरी बहन की गर्दन काटकर उसे मौत के घाट उतार दिया गया। सीसीटीवी में एक युवक घर में जाता और बाहर निकलता दिखाई दिया। उसकी पहचान जीरकपुर निवासी चंडीगढ़ पुलिस के रिटायर्ड सब इंस्पेक्टर के आरोपी बेटे कुलदीप सिंह (30) के रूप में हुई, जिसे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास से दबोच लिया गया था।

प्रॉपर्टी डीलर सोनू शाह की दिनदहाड़े हत्या
28 सितंबर को चार हमलावरों ने बुड़ैल स्थित दफ्तर में सोनू शाह को गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। हत्या के बाद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई ने सोशल मीडिया पर सोनू की हत्या की जिम्मेदारी ली। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने बदमाशों को पनाह देने वाले होटल मैनेजर धमेंद्र को गिरफ्तार किया और फिर गैंगस्टर शुभम, लॉरेंस बिश्नोई और फिर शूटर मंजीत को प्रोडक्शन वारंट पर लाई। बता दें कि इस हत्या में शामिल राजू बिसौदी और काला राणा को गिरफ्तार करने में पुलिस असफल रही है। सोनू शाह की गैंगस्टरों में अच्छी पैठ थी। उसके पास बाउसंरों की फौज थी।
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सेक्टर 17 में सरेआम गोलियों से भूना था दो लोगों को

5 सिंतबर को सेक्टर-17 गोलियों की आवाज से गूंज उठा। पुरानी कोर्ट के सामने स्थित पार्किंग में दिनदहाड़े दो युवकों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी गई। इसमें डूमरखा कलां (हरियाणा ) निवासी तेजिंदर पाल सिंह (26) मौत हुई, जबकि संदीप गंभीर रूप से घायल हुआ। सेक्टर-17 थाना पुलिस ने हत्या, हत्या का प्रयास, आर्म्स एक्ट समेत अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज कर बाद में हत्यारों को गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया था कि आरोपियों और पीड़ित के बीच पुरानी रंजिश चली आ रही थी। पुरानी हत्याओं का बदला लेने के लिए दोनों युवकों पर गोलियां चलाई गई थी।

इनसो के पूर्व प्रधान की गोली मारकर हत्या
7 मार्च को पुरानी रंजिश में इनसो के पूर्व प्रधान विशाल चिल्लर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जबकि तीन दोस्त पंकज, मेघल जसवाल और आशीष घायल हुए। विशाल चिल्लर कुछ दिन पहले ही हरियाणा पुलिस में कांस्टेबल के पद पर चयनित हुआ था। इसी खुशी में वह सेक्टर-49 स्थित एक फ्लैट में अपने दोस्तों को पार्टी देने पहुंचा था। वहां पर पुरानी रंजिश के चलते सुदीप, राहुल मांडा, सुमित कुमार, रामदीप, सुशील कुमार, अमनदीप नेहरा उर्फ बच्ची और नवीन ने गोली मारकर विशाल पर गोलियां बरसाकर मौत के घाट उतार दिया था।

साल के आखिरी में दो छात्रों की गोलियां मारकर हत्या
साल के आखिरी दिनों में एक बार फिर चंडीगढ़ गोलियों की आवाज से दहल उठा। 18 दिसंबर को सेक्टर 15 डी में चार आरोपियों ने दो छात्रों विनीत और अजय की गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस जांच में पता चला कि आरोपियों पर कुल 11 गोलियां मारी गई। हालांकि पुलिस अब तक इस मामले को सुलझा नहीं पाई है। पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं, लेकिन अब तक कोई सुराग नहीं मिला है कि हत्या क्यों हुई थी।

ऑटो गैंगरेप के दोषियों को आजीवन कारावास

साल 2016 के बहुचर्चित ऑटो गैंगरेप मामले में यूपी निवासी आरोपी मोहम्मद इरफान व कमल हसन को दोषी मानते इसी साल 14 अगस्त को दोनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। कोर्ट ने इस मामले में कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस वारदात में दोषियों पर दया करना समाज के साथ धोखा होगा। यह घटना साल 2016 की थी। पीड़िता ने पिकाडली चौक से घर जाने के लिए आटो लिया था। आटो में पहले से ही एक व्यक्ति बैठा हुआ था। रास्ते में आटो रोककर दोनों आरोपियों ने रेप किया। इस दौरान आरोपियों ने पीड़िता का वीडियो भी बना लिया था। इरफान को साल 2017 के एक अन्य गैंगरेप केस में भी सजा काट रहा था। इस केस में पुलिस ने एक व्यक्ति वसीम को जेल में रखा हुआ था। बाद में 16 महीने बाद उसके खिलाफ कोई सुबूत नहीं मिलने पर उसे रिहा कर दिया गया था।

हरमेहताब को आखिरी सांस तक जेल में रहने का फैसला
हिमाचल के पूर्व सीएम वीरभद्र की पत्नी के भतीजे अकांक्ष हत्या मामले में 19 नवंबर को आरोपी हरमेहताब को दोषी करार दिया गया। उसके बाद 21 नवंबर को आखिरी सांस तक जेल में रहने का फैसला सुनाया गया। नौ फरवरी 2017 में अकांक्ष की सेक्टर-9 में बीएमडब्ल्यू गाड़ी से कुचलकर हत्या की गई थी। दरअसल अंकाक्ष के दोस्त दीपसिद्धू के घर पर एक पार्टी रखी गई। दीपसिद्धू दोनों को कॉमन दोस्त था। उसके बुलाने पर बलराज रंधावा (केस का अन्य आरोपी, जो अभी तक फरार, एक लाख का इनाम भी है घोषित), हरमेहताब और अकांक्ष सभी दोस्त पार्टी में पहुंचे थे। पार्टी में शेरा और बलराज में पुरानी किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया जिसके बाद बात इतनी बढ़ गई कि गाड़ी से कुचलकर अकांक्ष की हत्या हो गई।

बच्ची की गला रेतकर हत्या के दोषी को उम्रकैद
देवी को खुश करने के लिए चार साल की बच्ची की हत्या करने वाले दोषी कमलेश को जिला अदालत ने 13 सितंबर को आजीवन कारावास की सजा की सुनाई। 25 फरवरी 2018 को बच्ची अपनी झुग्गी के बाहर खेल रही थी। परिवार के सदस्य टीवी देख रहे थे। इस दौरान दोषी ने चाकू से बच्ची का गला रेत दिया। जब तक परिवार सदस्य आते, तब तक बच्ची की मौत हो गई थी। पुलिस की जांच में कमलेश आरोपी निकला। उसने पुलिस को दिए अपने बयान में बताया कि कमलेश ने कहा कि एक बाबा ने देवी को खुश करने केलिए उसे बच्ची की बली देने को कहा था।

13 साल का इंतजार हुआ खत्म, मिला मालिकाना हक

कॉलोनी नंबर-4 के हजारों लोगों को मलोया में बने 4960 फ्लैट्स में शिफ्ट किया गया। सभी दस्तावेजों को पूरे करने वाले 2300 परिवारों को प्रशासक वीपी सिंह बदनौर और सांसद किरण खेर ने चाबियां सौंपी। वर्ष 2006 में इन लोगों का बायोमेट्रिक सर्वे हुआ था। उसके कुछ सालों बाद लोगों से पैसे जमा करा लिए गए थे, लेकिन सालों तक लोगों को मकान अलॉट नहीं किए गए थे। वर्तमान में यहां करीब 2300 परिवार रह रहे हैं। इसके अलावा दो स्कूल भी बनाए गए हैं, जिनमें से एक खुल गया है जबकि दूसरे में अभी भी निर्माण कार्य चल रहा है।

चंडीगढ़ में बैन हुआ सिंगल यूज प्लास्टिक
यूटी प्रशासन ने 26 सितंबर को सिंगल यूज प्लास्टिक बैन कर दिया है। इसके बाद से शहर में प्लास्टिक, थर्माकोल, स्टायरोफोम से बनी वस्तुओं का कोई भी उपयोग नहीं कर सकता। ऐसा करने वालों पर भारी जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। चंडीगढ़ प्रशासन ने इन आदेशों का सख्ती से पालन करने के आदेश दिए हैं। पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम- 1986 की धारा 15 के तहत, जो कोई भी इन आदेशों का पालन करने में विफल रहता है, उसे अधिकतम पांच साल की सजा या 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। खास मामलों में दोनों एक साथ भी लगाए जा सकते हैं।

ट्रिब्यून फ्लाई का शिलान्यास, अंत तक लग गया स्टे
158 करोड़ रुपये की ट्रिब्यून फ्लाईओवर परियोजना की आधारशिला यूटी के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने 3 मार्च 2019 को रखी थी। लेकिन साल के खत्म होने से पहले ही पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने इस पर स्टे लगा दिया। ट्रिब्यून फ्लाईओवर का काम जनवरी में शुरू होना था। यह फ्लाईओवर रेलवे ओवरब्रिज (हल्लोमाजरा) से शुरू होकर गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल सेक्टर-32 तक जाना था। ट्रिब्यून चौक पर अंडरपास भी बनाया जाना था। लेकिन फ्लाई ओवर के काम के शुरू होने से पहले ही इस पर स्टे लग गया।

ट्रिब्यून फ्लाई ओवर बनाने के लिए प्रशासन को 472 पेड़ काटने थे। प्रशासन ने इसके लिए प्रक्रिया भी शुरूकर दी थी। इस बीच हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी गई और हाईकोर्ट ने स्टे लगाते हुए कहा कि 472 पेड़ों को नहीं काटा जा सकता। प्रशासन ऐसा कोई विकल्प ढूंढे, जिसमें पेड़ नहीं काटने पड़े।

शहर के सबसे पुराने गवर्नमेंट प्रेस पर लगा ताला

30 सितंबर को सेक्टर-18 स्थित गवर्नमेंट प्रिंटिंग प्रेस हमेशा के लिए बंद हो गया। केंद्र सरकार के आदेशों पर प्रशासन ने अचानक इस प्रेस को बंद करने का फैसला ले लिया। गवर्नमेंट प्रिंटिंग प्रेस में 265 रेगुलर कर्मी और 35 कांट्रेक्ट पर काम कर रहे थे। कुल स्टॉफ के 80 प्रतिशत कर्मचारी 55 साल से ज्यादा उम्र के थे। प्रशासन की तरफ से अभी तक सिर्फ आधे ही कर्मचारियों को शिफ्ट किया गया है। ज्यादातर कर्मचारियों को सीटीयू में कंडक्टर, ट्यूबेल ऑपरेटर, लिफ्ट ऑपरेटर आदि बनाया गया है। कर्मचारियों का आरोप है कि अगर प्रशासन को प्रेस बंद ही करना था तो इसकी तैयारी पहले से करनी चाहिए थी। अचानक बंद करने के फैसले से सरकार को करोड़ों का नुकसान हो रहा है। कई मशीनें हाल ही में खरीदी गई हैं, जो करोड़ों की हैं। प्रशासन अब यह सभी कागज और मशीनें कबाड़ के भाव में बेचने की तैयारी में है।

प्रशासन की सहमति के बाद सुखना वेटलैंड घोषित
प्रशासन ने पंजाब-हरियाणा की सहमति के बाद सुखना लेक को वेटलैंड घोषित कर दिया। सुखना के वेटलैंड घोषित होने से लेक के 50 मीटर एरिया में किसी उद्योग की स्थापना, विस्तार, कचरा निस्तारण के साथ प्रदूषण उत्पन्न करने वाली गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लग गई है। यूटी प्रशासन लंबे समय से सुखना लेक के कैचमेंट एरिया को वेटलैंड घोषित किए जाने पर काम कर रहा था। वन एवं पर्यावरण विभाग ने 5 जून को प्रशासक को बताया था कि सुखना को वेटलैंड घोषित करने में जो भी तकनीकी परेशानियां आ रही थीं, उन्हें दूर कर लिया गया है। इसके बाद प्रशासन ने पंजाब और हरियाणा के अफसरों की मीटिंग बुलाने के साथ सुखना को वेटलैंड एरिया घोषित किए जाने की बात कही थी।

किरण खेर पर शहरवासियों ने दूसरी बार जताया भरोसा
शहरवासियों ने दूसरी बार भी किरण खेर पर ही भरोसा जताया और उन्हें चुनकर दिल्ली भेजा। किरण खेर के लिए साल 2019 का चुनाव जीतना आसान नहीं रहा। पार्टी के अंदर और बाहर तमाम तरह के विवादों को झेलते हुए, उन्हें यह जीत नसीब हुई है। भाजपा का बूथ मैनेजमेंट, संघ की सक्रियता, महिलाओं का साथ और कॉलोनियों में हुई बंपर वोटिंग भाजपा के जीत के सबसे बड़े कारण बने। इसके अलावा अनुपम खेर ने भी शहर काफी समय गुजारा, कई जनसभाएं की। किरण खेर का पूरा चुनाव प्रचार मोदी मौजिक, पांच साल के काम के इर्द गिर्द घूमता रहा।

टाटा के हाउसिंग प्रोजेक्ट को सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने सुखना झील व वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के करीब टाटा हाउसिंग प्रोजेक्ट को मंजूरी देने से इनकार कर दिया। जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने 5 नवंबर को दिए अपने आदेश में कहा, यह प्रोजेक्ट नियमों के अनुरूप नहीं है। यह क्षेत्र सूखना झील के अंतर्गत है। राज्य प्रशासन ने जन विश्वास के सिद्धांत का उल्लंघन किया है। इसके साथ ही पीठ ने करीब 53 एकड़ क्षेत्र में विकसित किए जाने वाले इस प्रोजेक्ट को मिले तमाम प्रशासनिक क्लीयरेंस को खत्म कर दिया।

यह हाउसिंग प्रोजेक्ट 1800 करोड़ रुपए का बिल्डिंग प्रोजेक्ट था। इस प्रोजेक्ट को टाटा कैमलॉट द्वारा विकसित किया जाना था। इस प्रोजेक्ट के तहत 19 टावरों में करीब 2,100 फ्लैट बनने थे। ये टावर 12 से 35 मंजिला बनना था। टाटा कैमलॉट प्रोजेक्ट में पंजाब व हरियाणा के कई दिग्गज नेताओं का पैसा लगा था, जिसके चलते समय समय पर इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दिए जाने को लेकर राजनीतिक दबाव बनाया जाता रहा। कई पूर्व सांसद, एमएलए और आईएएस अधिकारियों को इस प्रोजेक्ट को पास करवाए जाने को लेकर फ्री में फ्लैट भी देने के वायदे किए गए थे।

दस साल से अटका अतिरिक्त पानी का मुद्दा खत्म
सेक्टर-39 वॉटर वर्क्स में कजौली वाटर वर्क्स से फेज एक से चार तक पानी सप्लाई होती है। यहां से शहर के सेक्टर-12, 26, 32, 37, 52 और मनीमाजरा के दो वॉटर वर्क्स को पानी सप्लाई होता है। वहां से संबंधित वॉटर वर्क्स से जुड़े एरिया के लगभग 1 लाख 56 हजार लोगों तक पानी पहुंचता है। शहर को 85 एमजीडी पानी सप्लाई कर रहा है। जबकि गर्मियों में इसका डिमांड 115 एमजीडी तक पहुंच जाती है। पिछले 10 साल से शहर को पांचवे और छटवें फेज से 29 एमजीडी अतिरिक्त पानी मिलने का सिर्फ आश्वास मिलता था। 28 सितंबर को शहर को अतिरिक्त पानी मिलने के साथ यह मुद्दा खत्म हो गया।
 

40 साल बाद कचरे के पहाड़ को खत्म करने का फैसला

डड्डूमाजरा स्थित डंपिंग ग्राउंड में पिछले 40 साल से कचरा फेंका जा रहा था। पूरे शहर का कचरा इकट्ठा होते-होते वहां पांच लाख मीट्रिक टन कचरा जमा हो गया। इस कचरे को हटाने के लिए नेता अपने घोषणा पत्र में पहाड़ को हटाने का दावा करते। हारने के बाद फिर इसे मुद्दा बनाते। यहां के लोगों ने लगातार प्रदर्शन किए। प्रशासक से लेकर कमिश्नर और मेयर से लेकर पार्षद तक कचरे का पहाड़ देखने पहुंचे और आश्वासन देकर चले आते। दूसरी ओर डड्डूमाजरा में बीमारियां पैर पसारने लगीं। आखिरकार 20 दिसंबर को कचरा प्रोसेस करने के लिए मशीनें लगा दी गईं।

सतारा की जमीं को मिला खुला आसमान
यह साल सेक्टर 17 के लिए हमेशा यादगार रहेगा। काफी कोशिशों के बावजूद छह दिसंबर को सेक्टर- 17 वेंडर मुक्त हो गया। वेंडरों की वजह से सेक्टर 17 की खूबसूरती छिन गई थी। छुट्टी वाले दिन सेक्टर- 17 में पैर रखने की जगह नहीं होती थी। वेंडर मुक्त करने के लिए कई बार प्रदर्शन हुए तो कई बार अभियान चलाए गए, लेकिन सफलता नहीं मिली। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की सख्ती के बाद नगर निगम ने चंडीगढ़ पुलिस के साथ मिलकर वेंडरों को हटाकर दूसरी जगह शिफ्ट किया। इससे प्लाजा पुराने स्वरूप में लौट आया।

वेंडरों को शिफ्ट करने वाला चंडीगढ़ बना पहला शहर
शहर में लगातार बढ़ते वेंडरों को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही थी। वर्ष 2014 में जब निगम ने सर्वे कराया था तो मात्र 7 हजार वेंडर शहर में थे। उसके बाद वर्ष 2016 में निगम ने निजी कंपनी से सर्वे कराया तो 21 हजार 622 लोगों का रजिस्ट्रेशन हो गया। अचानक तीन गुना बढ़े वेंडरों से चिंता और बढ़ गई। आखिरकार हाईकोर्ट के निर्देश पर 6 दिसंबर को वेंडरों को वेंडिंग जोन में शिफ्ट किया गया। वेंडर एक्ट-2014 के अनुसार वेंडरों को वेंडिंग जोन में शिफ्ट करने वाला चंडीगढ़ देश का पहला शहर बन गया है। वर्तमान में वेंडरों की रिलोकेशन की योजना किसी भी शहर में लागू नहीं की है, जबकि चंडीगढ़ में इस योजना को लागू कर दिया है। इस कारण चंडीगढ़ देश का पहला ऐसा शहर है, जहां वेंडरों को योजनाबद्ध तरीके से वेंडिंग जोन में शिफ्ट कर दिया गया है।

जीएसटी कलेक्शन में मिला नंबर वन का ताज

इस साल जीएसटी कलेक्शन में चंडीगढ़ को देश में नंबर वन का खिताब मिला। कलेक्शन में 10.98 की बढ़ोत्तरी दर्ज करने के साथ ही चंडीगढ़ ने जीएसटी 3बी रिटर्न में भी देश में बेहतर स्थिति बनाई है। पिछले साल 2018-19 के मुकाबले इस साल डिपार्टमेंट को 101.27 करोड़ रुपये का अधिक कलेक्शन मिला है। इस बार डिपार्टमेंट ने 946.58 प्रतिशत का रेवन्यू कलेक्शन किया है। नंबर वन का ताज बनाए रखने के लिए इस बार वित्तीय वर्ष 2019-20 में एक्साइज एंड टेक्सेशन डिपार्टमेंट ने 1500 करोड़ रुपये कलेक्शन का टारगेट रखा हुआ है। जिसके लिए डिपार्टमेंट को मार्च तक हर महीने 100 करोड़ रुपये से अधिक कलेक्शन की दरकार है।

कांग्रेसी नेता कपिल सिब्बल हुए थे डिफाल्टर
देश के नामचीन अधिवक्ता और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता कपिल सिब्बल के द्वारा जीएसटीआर 3बी का टैक्स नहीं फाइल करने पर काफी चर्चा रही। जीएसटी एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट के द्वारा जारी की गई 399 डिफाल्टरों की सूची में सिब्बल और उनके भाईयों का नाम भी शामिल किया था।  भारत सरकार के द्वारा टैक्स कलेक्शन का ग्राफ बढ़ाने को लेकर चंडीगढ़ को रेड फ्लैग रिपोर्ट जारी कर डिफाल्टरों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने जीएसटीआर 3 बी का टैक्स नहीं जमा करने वाले लोगों की सूची जारी की थी।

प्याज की कीमतों ने खूब रुलाया
ट्राइसिटी में प्याज की बढ़ती कीमतों ने लोगों की आंखों से इस साल खूब आंसू निकलवाएं। प्लाज के रेट 130-140 दर्ज किए गए। जो पिछले कई सालों में रिकॉर्ड रहा है। प्याज के रेट तेजी त्योहारी सीजन से शुरू हुई, जो अभी तक जारी है। हालांकि केंद्र सरकार सहित यूटी प्रशासन ने भी प्याज की कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन सभी के प्रयास कोई खास असर नहीं डाल पाए। पहली बार प्रशासन की ओर से सस्ते प्याज के लिए स्टाल लगाए गए। जहां पर बिना प्राफिट के प्याज दिए गए। साल के आखिरी दिनों तक प्याज के रेट 100 से ऊपर ही दर्ज किए गए।

पीजीआई को मिली 50.76 एकड़ जगह

यह साल पीजीआई के लिए एक बड़ी उपलब्धि लेकर आया। पीजीआई को अपने विस्तार के लिए सारंगपुर में 50.76 एकड़ जमीन मिल गई है। इस जमीन पर पीजीआई ट्रामा सेंटर, ओपीडी, कैंसर और लर्निंग रिसोर्स सेंटर बनाएगा। इस जमीन के लिए चंडीगढ़ प्रशासन ने पीजीआई से 20 करोड़ रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से रेट मांगे थे। इस हिसाब से जमीन का रेट करीब 1100 करोड़ रुपये बैठ रहा था। पीजीआई इतने रुपये देने में असमर्थ था। बाद में पीजीआई ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से गुहार लगाई। फिर सौदा 180 करोड़ रुपये पर तय हुआ।

हड़ताल से हलकान हुआ था पीजीआई
साल 2019 में पीजीआई के सीनियर व जूनियर रेजिडेंट दो बार हड़ताल पर रहे। पहली हड़ताल जून में हुई। उस दौरान पश्चिम बंगाल में जूनियर डाक्टरों पर हिंसक हमले के विरोध में डाक्टरों ने यह कदम उठाया था। 24 घंटे पीजीआई व मेडिकल कालेज के डाक्टर हड़ताल पर रहे थे। उसके बाद अगस्त में एनएमसी बिल के विरोध में डाक्टर दो दिन की हड़ताल पर चले गए थे। इस दौरान सैकड़ों सर्जरी टाली गई थी और हजारों मरीज बिना इलाज के वापस लौटे थे। हालांकि अस्पतालों में इमरजेंसी चालू रही थी।

जीएमसीएच की सीट 100 से बढ़कर हुई 150
सेक्टर 32 स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में एमबीबीएस की 100 सीटों को बढ़ाकर 150 इसी वर्ष किया गया है। लगभग तीन सालों से लंबित इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने से चंडीगढ़ को 2019 में एक बड़ा तोहफा मिला है। इससे पहले के वर्षों में टीम ने कॉलेज का मुआयना कर इंफ्रास्ट्रक्चर में कमी का हवाला देकर आपत्ति लगा दी थी। लेकिन इस बार मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने कॉलेज के लिए अतिरिक्त 50 सीटों पर मुहर लगाई।

सेक्टर- 48 का हॉस्पिटल हुआ शुरू
मार्च 2019 से उद्घाटन के बाद पड़े सेक्टर 48 के 100 बेड के नये हॉस्पिटल में इसी वर्ष ओपीडी की सुविधा शुरू हुई। जीएमसीएच के स्किन, रेडियोथिरैपी, मनोचिकित्सक और ईएनटी डिपार्टमेंट को यहां शिफ्ट किया गया। बाद में ईएनटी की ओपीडी वहां से फिर जीएमसीएच 32 में शिफ्ट कर दी गई है। हालांकि इस हास्पिटल को जिस मकसद से खोला गया था, वह पूरा होता नहीं दिख रहा है। इसे जनरल हास्पिटल बनाना था, जिससे सेक्टर 16 और 32 का बोझ कम हो सके। चंडीगढ़ प्रशासन का कहना है कि नई पोस्टों के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा गया है। नए डॉक्टर आते ही इसे जनरल हास्पिटल बना दिया जाएगा।

जीएमएसएच में शुरू हुआ आईसीयू
सेक्टर 16 स्थित गवर्नमेंट मल्टी स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल में 2019 में ही आईसीयू की सुविधा शुरू हुई। छह बेड वाले इस आईसीयू में ट्रेंड डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की टीम तैनात की गई है। यहां आईसीयू न होने से गंभीर मरीजों को पीजीआई रेफर करना पड़ता था। लेकिन अब चंद महीनों में ही इस आईसीयू की बदौलत सांप काटे जाने वाले मामले में छह मरीजों की जान बचाई जा चुकी है।

13 साल बाद पीयू की झोली में आई माका ट्रॉफी

पंजाब यूनिवर्सिटी को खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर 13 साल बाद मौलाना अबुल कलाम आजाद (माका) ट्रॉफी मिली है। हर खेल में पीयू ने बेहतर प्रदर्शन किया और ओवरऑल अंक बेहतर लेकर बाजी मारी। पीयू को यह ट्रॉफी साल 2018-19 में उसके बेहतर खेल प्रदर्शन के आधार पर मिली थी। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा साल 1956-57 से शुरू की गई इस ट्रॉफी को पंजाब यूनिवर्सिटी इससे पहले 14 बार हासिल कर चुकी है। पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ ने आखिरी बार साल 2005-06 में खिताब जीता था। पिछले एक दशक से पीयू चंडीगढ़ इस ट्रॉफी को हासिल करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही थी। इस बड़ी कामयाबी का जश्न पीयू ने शानदार ढंग से मनाया। ट्रॉफी के साथ गाड़ियों में खड़े होकर जुलूस निकाला गया। जगह-जगह पुष्पवर्षा ट्रॉफी पर की गई।

पंजाब यूनिवर्सिटी के ये मुद्दे भी बनें यादगार
पहली बार सीनेट में गैर हाजिर रहने वाले पांच सदस्यों को हटाकर पीयू ने इतिहास रचा। कार्रवाई चांसलर कार्यालय से हुई। डीएसडब्ल्यू को हटाने का मुद्दा कई दिनों तक छाया रहा। प्रकरण यही तक नहीं रुका, कई छात्र संगठनों ने प्रोटेस्ट किया और मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा। प्रो. इमैनुअल नाहर को फिर से डीएसडब्ल्यू का चार्ज दिया गया। डिपार्टमेंट मर्ज की प्रक्रिया शुरू हुई तो उर्दू भाषा को फॉरेन लैंग्वेज में शामिल करने का मुद्दा चर्चा-ए-आम हो गया।

पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह समेत कई नेताओं ने इसमें हस्तक्षेप किया और आखिर में पीयू को यह प्रस्ताव वापस लेना पड़ा। पीयू का सबसे पुराना इंडिया कॉफी हाउस बंद हो गया। इससे काफी लोगों की यादें जुड़ी रहीं। किराया अधिक होने के कारण संचालक ने छोड़ दिया। इसका दुख सभी को हुआ। पहली बार जारी हुई अटल रैंकिंग में विश्वविद्यालयों की सूची में पीयू को पहला स्थान मिला जो अपनेआप में बड़ी बात थी। क्यूएस रैंकिंग में भी बेहतरीन सुधार करते हुए विश्वविद्यालय चमक गया।

यूटी क्रिकेट एसोसिएशन को मिली बीसीसीआई की मान्यता

पिछले 30 सालों के संघर्ष के बाद यूटी क्रिकेट एसोसिएशन (यूटीसीए) को बीसीसीआई से मान्यता मिल गई। बीसीसीआई के फॉरमेट के चलते यूटीसीए ने हर वर्ग की क्रिकेट टीमें बनाई। इससे चंडीगढ़ के क्रिकेट प्रेमियों के लिए नई राहें खुल गई हैं। चंडीगढ़ की रणजी टीम ने अपने पहले मैच में कई सारे रिकार्ड भी जड़े। इस साल नवंबर दिसंबर में पहले चरण के मुकाबलों में सिटी की क्रिकेट टीमों ने बेहद शानदार प्रदर्शन किया और खिलाड़ियों ने कई रिकॉर्ड भी बना दिए हैं।

सिटी क्वीन अंजुम मोद्गिल ने दिलाया ओलंपिक कोटा
सिटी के शूटिंग क्वीन अंजुम मोदगिल ने इस साल बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए भारत को 2020 के लिए ओलंपिक कोटा दिलाया। भारत को ओलंपिक कोटा दिलाने वाली वह इस साल देश की दूसरी महिला शूटर बनी। इसके साथ ही इस साल नेशनल और इंटरनेशनल स्तर पर मेडल जीतकर देश का नाम रोशन कर रही हैं। साल के आखिरी दिनों में अंजुम मोदगिल ने भोपाल में चल रही नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप की महिला स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता है। अंजुम ने 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन स्वर्ण के साथ पंजाब के लिए टीम इवेंट में सोना जीता। इसी चैंपियनशिप में अंजुम ब्रोंज और सिल्वर मेडल जीत चुकी हैं। यह उनका इस साल का लगातार तीसरा खिताब है।

फुटबॉल के खिलाड़ियों ने रचा इतिहास
इस साल भारतीय फुटबॉल टीम ने बांग्लादेश को हराकर सैफ अंडर-18 चैंपियनशिप का खिताब जीतकर इतिहास रच डाला। भारत ने पहली बार इस खिताब को जीतने में कामयाबी पाई, इसमें सिटी के फुटबॉल खिलाड़ियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टीम में 8 खिलाड़ी चंडीगढ़ फुटबॉल अकादमी के ट्रेनी रहे हैं। इस सफलता के बाद चंडीगढ़ के फुटबाल खिलाड़ियों की नई राहें खुलीं हैं और उनमें जोश का संचार भी हुआ है।

पहली बार प्लास्टिक मुक्त हुआ टूर्नामेंट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  की ओर से सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त भारत की मुहिम को पीजीटीआई ने इसी साल चंडीगढ़ गोल्फ क्लब में खेले गए जीव मिल्खा सिंह इनविटेशनल गोल्फ टूर्नामेंट को प्लास्टिक मुक्त रखा गया। चंडीगढ़ गोल्फ क्लब के इतिहास में यह पहली बार हुआ। इसके तहत 17- 20 अक्तूबर तक खेले जाने वाले जीव मिल्खा सिंह इनविटेशनल गोल्फ टूर्नामेंट में एक भी पानी की प्लास्टिक की बोतल को बैन कर दिया गया। प्रोफे शनल गोल्फ टूर ऑफ इंडिया (पीजीटीआई) का यह महत्तवपूर्ण गोल्फ टूर्नामेंट में देश के बड़े गोल्फर्स शिरकत की।

टेबल टेनिस के दो दिग्गज कोचों को गंवाया

2019 में भारतीय टेबल टेनिस के दो दिग्गज कोचों का निधन हो गया, जो जीरकपुर के ढकोली में रहते थे। ये दोनों खिलाड़ी एनआईएस पटियाला में टेबल टेनिस के बत्तौर चीफ कोच अपनी सेवाएं दे चुके है। भिवानी मुखर्जी ने टेबल टेनिस में अहम मुकाम हासिल किए, जिसकी बदौलत उन्हें द्रोणाचार्य अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। वहीं, तपन बोस टेबल टेनिस के महान खिलाड़ी के अलावा एक कामयाब कोच थे, जिन्होंने अपने देश के अलावा दूसरे देश की टीमों को कोचिंग देकर उन्हें सफलता की बुलंदियों पर पहुंचाया।

छत्तबीड़ को मिला शेरों का जोड़ा
छत्तबीड़ चिड़ियाघर को इस साल शेर सफारी को देखने की चाह रखने वाले सैलानियों को शेरों के जोड़े के रूप में तोहफा मिला है, जिनका नाम गगन और सावन है। शेरों का ये जोड़ा इन्दौर से यहां लाया गया है, जिसको अभी आब्जर्वेशन में रखा गया है। जिनको नए साल में सैलानियों के लिए शेर सफारी में छोड़ा जाएगा, तांकि अपनी दहाड़ से सैलानियों का मनोरंजन कर सकें।

सात कोचों वाली विस्टाडोम ट्रेन चली
सात कोचों वाली विस्टाडोम (पारदर्शी कोच) ट्रेन को कालका-शिमला रेल मार्ग पर चलाया गया। इस पूरी ट्रेन के हर कोच में पंद्रह सीटें हैं। कोच में चेयर कार जैसी सीटें लगाई गई हैं, जो कालका से शिमला के बीच के सफर को आरामदायक बनाती हैं। इसके प्रत्येक कोच को तैयार करने में करीब दस लाख रुपये का खर्च आया है। पूरे पारदर्शी ट्रेन में गर्मी से राहत देने के लिए एसी के साथ हनी कॉम ब्लाइंड पर्दा लगाया गया है, ताकि ट्रेन कीशीशे युक्त छत गर्म होने पर हनी कॉम ब्लाइंड पर्दा ओपन कर दिया जाएगा। विस्टाडोम कोच की छत कांच की बनी है। इसकी खिड़कियां भी पारदर्शी हैं।

गांव की ओर नहीं देखा गया

नगर निगम में शामिल होने के बावजूद गांवों के विकास अधूरे रहे। साल के आखिरी में इन गांव के लिए विलेज डेवलपमेंट कमेटी का गठन हुआ। नगर निगम के मनोनीत पार्षदों को इस कमेटी का चेयरमैन बनाया गया है। गांव के लोगों को ग्राम पंचायतों के खत्म होने के बाद छोटी छोटी बातों के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। किसी भी दस्तावेज को सरपंच सत्यापित कर देते थे। लेकिन ग्राम पंचायत के खत्म होने के बाद लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए नगर निगम के चक्कर काट रहे हैं। साथ ही 12 ग्राम पंचायतों के सभी 13 गांवों की कॉमर्शियल, इंडस्ट्रियल और इंस्टीट्यूशनल जमीन और इमारतों पर प्रॉपर्टी टैक्स लगाने के आदेश दिए।

सीटीयू को मिलीं 80 एसी बसें
इस साल चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग (सीटीयू) को 80 एसी बसें मिली हैं, जो दूसरे राज्यों की लग्जरी बसों को जोरदार टक्कर दे रही हैं। अरामदायक उतनी हैं, जितनी वोल्वो और किराया भी बहुत कम है। चंडीगढ़ से दिल्ली की वोल्वो का किराया 625 रुपये है, तो सीटीयू की एसी बस का किराया मात्र 325 रुपये है। एसी बसों में अन्य लग्जरी बसों का किराया 50 प्रतिशत कम है। इससे सीटीयू को काफी लाभ भी हुआ है। सीटीयू की लांग रूट में दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के लिए बसें चलती हैं।

असीमानंद केस पर आया फैसला
2019 में समझौता ब्लास्ट केस में बड़ा फैसला आया है। पंचकूला की विशेष एनआईए कोर्ट ने सभी चार आरोपियों असीमानंद, लोकेश शर्मा, कमल चौहान और राजिंदर चौधरी को बरी कर दिया। इन आरोपियों पर समझौता ट्रेन में ब्लास्ट करने का आरोप था। साल 2007 में समझौता ट्रेन विस्फोट मामले में 68 लोगों की मौत हो गई थी। यह हादसा भारत-पाकिस्तान के बीच चलने वाली ट्रेन में हरियाणा में पानीपत के निकट 18 फरवरी, 2007 को उस समय हुआ था, जब ट्रेन अमृतसर स्थित अटारी की ओर जा रही थी। इसमें मरने वाले ज्यादातर पाकिस्तान के यात्री थे।

पंचकूला में शुरू हुआ साइकिल शेयरिंग प्रोजेक्ट

इस साल पंचकूला नगर निगम ने शहरी क्षेत्र में पब्लिक साइकिल शेयरिंग प्रोजेक्ट को लांच किया गया। जिसके तहत शहर में अलग-अलग स्थानों पर 200 साइकिल स्टैंड में खड़ी गईं। इसका अब तक 90 हजार से ज्यादा लोग फायदा उठा चुके हैं। अब लोग छोटी दूरी पर जाने के लिए साइकिल का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे पंचकूला की वायु गुणवत्ता में काफी सुधार आया है। नगर निगम की ओर से बताया गया है कि अब इस प्रोजेक्ट को कुछ और सेक्टरों में बढ़ाने की योजना है।

पंचकूला के विधायक ज्ञानचंद गुप्ता बने स्पीकर
पिछली सरकार में भाजपा विधायक दल के नेता पंचकूला के विधायक ज्ञानचंद गुप्ता को इस साल हरियाणा विधानसभा का स्पीकर चुना गया। ज्ञानचंद गुप्ता पंचकूला से लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए। ज्ञानचंद के नाम का प्रस्ताव मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने रखा था। ज्ञानचंद गुप्ता चंडीगढ़ में मेयर भी रह चुके हैं। पंचकूला से विधायक रहते उन्होंने शहर के विकास के लिए काफी काम किए हैं।

ड्रग आफिसर नेहा शौरी हत्याकांड की चर्चा पूरे देश में रही
29 मार्च को खरड़ स्थित ड्रग एंड फूड केमिकल लैब के अंदर बलविंदर नामक एक शख्स ने महिला ड्रग इंस्पेक्टर नेहा शौरी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। नेहा पर जिस वक्त हमला हुआ, उस दौरान वह अपनी तीन साल की भतीजी से बातें कर रही थीं। हमलावर ने बच्ची के सामने ही नेहा पर तीन गोलियां दागीं थी। हत्यारे में उसके बाद खुद को गोली मार ली थी। बाद में उसकी भी पीजीआई में मौत हो गई थी। बलविंदर एक केमिस्ट शॉप चलाता था। साल 2009 में उसकी केमिस्ट शॉप में रेड पड़ी। इस दौरान कई सारी अनियमितताएं मिलने पर उसका ड्रग लाइसेंस कैंसिल कर दिया गया था। इस खुन्नस में आकर उसने नेहा की हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड की पूरे देश में चरचा रही।
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डिस्को थेक के बाहर सीएम सिक्योरिटी के जवान की हत्या

तीन अगस्त को मोहाली के फेज-11 वाकिंग स्ट्रीट नाम के नाइट क्लब के बाहर मुख्यमंत्री के सुरक्षा अमले में तैनात कांस्टेबल सुखविंदर कुमार की गोलियां मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस पर गोलियां चलाने वाले चरनजीत सिंह उर्फ साहिल समेत तीन लोगों को हरियाणा से गिरफ्तार किया था। बताया जा रहा था कि डिस्को में दोनों की शराब के नशे में लड़ाई हुई थी। उसके बाद उसकी साहिल ने उस पर गोली चला दी थी।

लिफ्ट देने के बहाने महिलाओं से रेप वाला दबोचा
15 अप्रैल को हिमाचल प्रदेश की रहने वाली एक महिला से रेप का मामला सामने आया था। रेप करने वाला महिला को लिफ्ट देने वाले के बहाने ले गया था। इस दौरान जब पीड़िता सोहाना थाने गई तो एसएचओ ने सुनवाई नहीं की। महिला फिर एसएसपी से मिली, तो केस दर्ज और तत्कालीन एसएचओ को सस्पेंड करइ दिया गया। इसके बाद यह मामला राष्ट्रीय महिला आयोग तक पहुंच गया था। आयोग नेइ पंजाब के डीजीपी से सारे मामले की रिपोर्ट तलब की थी। इसके बाद पुलिस ने आरोपी लक्की को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में पता चला कि लक्की ने सात और युवतियों से रेप किया था।

महिला टीचर की हत्या से फैली सनसनी
खरड़ के नॉलेज बस स्कूल के बाहर पांच दिसंबर को महिला टीचर की नकाबपोश व्यक्ति ने हत्या कर दी। इसके बाद आरोपी कार में सवार होकर फरार हो गया। कई दिनों तक आरोपी पुलिस से बचता रहा। इसके बाद पुलिस ने महिला की सास को पूछताछ के लिए बुलाया था। इसके बाद पुलिस ने इस केस की अहम कड़ी जसविदंर नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। उससे पता चला कि महिला के पति ने ही टीचर को छह लाख की सुपारी देकर मरवाया था। इस मामले में पुलिस ने महिला टीचर के पति की पहली पत्नी के भाई और उसके दोस्त को गिरफ्तार किया था। जबकि महिला का पति अब तक फरार है।

सिंगरों पर पुलिस की गिरी गाज
यह साल पंजाबी सिंगरों के लिए आफत भरा रहा। रैपर हनी सिंह पर महिलाओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप था। पंजाब महिला आयोग की सिफारिश पर डीजीपी ने मोहाली के मटौर थाने को हनी सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। एक अन्य मामले में सिंगर एली मांगट और रंधावा ब्रदर्स को गिरफ्तार किया गया था। अब यह मामला अदालत में चल रहा है। इसके अलावा सिंगर करण औजला ने हाइवे रोड पर ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाई। इस वजह से पुलिस ने उनका और उनके समर्थकों का चालान तक काटा। साथ ही ट्रैफिक नियमों का पाठ पढ़ाया।
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