उसके बाद उसकी दोनों किडनी डोनेट कर दी गई, जो दो मरीजों में ट्रांसप्लांट की गई। दीपक केमिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कर रहे थे। दीपक के पिता जगदीश कुमार यादव ने दुखी मन से बताया कि दीपक के जाने से पूरा परिवार उजड़ गया है। वह हमें बहुत खुशी व प्यार देता था। जाते वक्त भी वह दो लोगों को नया जीवन दे गया है।
वह हमारा रियल हीरो है। हमें उस पर गर्व है। दीपक के भाई संदीप कुमार यादव ने बताया कि अब भी सदमे में हैं और उन्हें विश्वास नहीं हो रहा है कि उनका भाई अब इस दुनिया में नहीं है। जब वह जिंदा था तो नियमित रक्तदान कर लोगों को नया जीवन देता था। मरने के बाद भी वह दो लोगों को नया जीवन दे गया है।
मुश्किल घड़ी में बड़ा दिल वाला फैसला
दीपक की फैमिली के लिए काफी मुश्किल वक्त था। ऐसे वक्त पर कोई बड़ा फैसला लेना आसान नहीं होता। लेकिन उन्होंने बड़ा दिल दिखाते हुए यह फैसला लिया और दो लोगों की नई जिंदगी मिल गई। -अशोक कुमार, कार्यवाहक नोडल अधिकारी, रोटो