कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को दिवाली मनाई जाती है। इस बार अमावास्या शनिवार दोपहर 2:18 मिनट से प्रारंभ होकर रविवार सुबह 10:37 मिनट तक रहेगी। दिवाली का पूजन सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में करने का विधान है। इसलिए दिवाली शनिवार को मनाई जाएगी। यह बात सेक्टर-30 के श्री महाकली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र ने कही।
वहीं निशीथ काल रात 8:06 बजे से रात 10: 48 बजे तक है। इस काल में शुभ की चौघड़िया रात 8:48 बजे से लेकर रात 10:30 बजे तक रहेगी। इसके बाद अमृत की चौघड़िया 10:30 बजे से रात 12:12 मिनट तक रहेगी। इसलिए जो लोग किसी कारण से प्रदोष काल में पूजा न कर सके हों, वे निशीथ काल में पूजा कर सकते हैं।
रात 8:48 बजे के बाद पूर्ण रात्रि पूजन के लिए श्रेष्ठ है। रात 8:48 बजे के बाद श्री गणेश-लक्ष्मी की पूजा समाप्त करने के बाद कनक धारा सूत्र, श्री सूक्त, गणेश सूक्त का पाठ करना चाहिए।