मोहाली। गांव मसौल में मिले जीवाश्म को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंभीरता से लिया है। पीएमओ आफिस की तरफ से इस संबंध में एक पत्र भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को लिखा गया है। साथ ही इलाके में जमीन एक्वॉयर करने के लिए कहा गया है, ताकि इस एरिया से अन्य जीवाश्म को निकालकर स्टडी की जा सके। साथ ही यह पता लगाय जा सके कि क्या यह दुनिया के सबसे प्राचीन जीवाश्मों में शुमार हैं। जिक्रयोग है कि दुनिया के सबसे प्राचीन जीवाश्म इथोपिया की रिफ्ट घाटी में मिले थे, जो कि 2.58 मिलियन वर्ष पुराने थे।
पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जब फ्रांस के राष्ट्रपति चंडीगढ़ के दौरे पर आए थे। उस दौरान गवर्नमेंट म्यूजियम में कुछ जीवाश्म को प्रदर्शित किया गया। इन जीवाश्म को फ्रांस व भारत के पुरातत्वविदों की टीम ने खुदाई कर निकाला था। इस दौरान प्रधानमंत्री ने इन्हें करीब से निहारा था। इसके बाद प्रधानमंत्री आफिस से विभाग को भेजे गए गए पत्र में कहा गया है कि जीवाश्म के मामले को गंभीरता से लिया जाए।
जल्द से जल्द इस एरिया में जमीन एक्वॉयर कर प्रक्रिया को शुरू किया जाए, ताकि जीवाश्म और उसके रहस्य को दुनिया के सामने लाया सके। इस संबंध में पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट वीएस रावत ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में मोहाली के डीसी को पत्र लिखा है। साथ ही उन्हें इन जमीन का रिकॉर्ड मुहैया करवाने के लिए कहा है। अभी तक इस संबंध में मोहाली जिला प्रशासन की तरफ से उन्हें कोई जवाब नहीं मिला है।
उन्होंने कहा कि इससे पहले प्राइवेट जमीन पर इस संबंध में कार्रवाई की गई की थी। वहीं, इस संबंध में जिला वन अधिकारी तेजिंदर सिंह सैनी ने कहा कि पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने उनसे संपर्क किया है। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन से अगर उन्हें इस संबंध में अनुमति मिल जाती है, तो वह इसकी परमिशन दे देंगे।