चंडीगढ़ की मौजूदा आबादी के मुताबिक शहर में पानी का संकट है। जिस तरह से शहर की आबादी बढ़ती गई, उसके मुताबिक नगर निगम पानी की आपूर्ति सुचारु करने में विफल रहा है। शहर का जब निर्माण हुआ था तो 10 लाख तक की आबादी के लिए शहर में पाइप लाइनें डाली गई थीं। ये पाइप लाइनें इतनी पुरानी हो चुकी हैं कि पानी का प्रेशर बढ़ते ही लीकेज शुरू हो जाता है। थोड़ी लीकेज पर जोड़ लगाने और कुछ दूरी तक पाइप बदलकर ही निगम काम चला रहा है। इससे शहर के बहुत से सेक्टरों और कालोनी में पानी की किल्लत बढ़ जाती है।
बीते सालों में चंडीगढ़ नगर निगम में शामिल गांवों में भी पानी की काफी किल्लत है। इनमें से कई गांव ऊंचाई पर है, वहां पर निगम पानी पहुंचाने में असमर्थ है। स्मार्ट सिटी ने सातों दिन 24 घंटे पानी आपूर्ति योजना और मनीमाजरा में भी सातों दिन 24 घंटे पेयजलापूर्ति पायलट प्रोजेक्ट को शुरू किया है।
अधिकारियों ने 2042 तक के लिए योजना बनाई है, जिसमें 16 लाख तक की आबादी को कवर किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि चंडीगढ़ योजनाबद्ध तरीके से बसाया गया शहर है। यहां के मास्टर प्लान में इससे ज्यादा आबादी की योजना ही नहीं है। निगम शहरवासियों को 35 किलोमीटर दूर से 109 एमजीडी पानी देने का दावा करता है। इस व्यवस्था पर उसे हर साल 245 करोड़ रुपये खर्च करने करने पड़ते हैं।
निगम के अनुसार, शहर में एक व्यक्ति औसतन प्रतिदिन 254 लीटर पानी उपयोग कर रहा है, जबकि मानक के अनुसार एक व्यक्ति को प्रतिदिन औसतन 150 लीटर पानी का ही उपयोग करना होता है। यहां पानी के उपयोग करने का प्रति व्यक्ति अनुपात काफी अलग है। दावा है 24 घंटे पानी सप्लाई के बाद अनुपात ठीक होगा।
दाखिले के लिए लंबी दौड़, एक सीट पर आठ बच्चे दावेदार
शहर में जनसंख्या बढ़ोतरी दर भले ही नियंत्रण में हो लेकिन जितनी भी अब है, उससे भी दाखिले की दौड़ में लंबी हो गई। स्कूलों में एक सीट पर आठ बच्चों की दावेदारी रहती है। यानी सात बच्चों को आज भी मनचाहा स्कूल नहीं मिल पा रहा। निजी स्कूलों में एंट्री कक्षा में ड्रा के माध्यम से दाखिले होते हैं, वहीं सरकारी स्कूलों में पहले आओ पहले पाओ के आधार पर। निजी स्कूलों में लगभग 2500 सीटें एंट्री कक्षा में हैं। इन पर दाखिले के लिए हर साल 20 हजार से अधिक आवेदन आते हैं। वहीं सरकारी स्कूलों में भी हर वर्ष एंट्री कक्षा में लगभग 12 हजार दाखिले होते हैं।