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वर्ल्ड ग्लूकोमा डेः ऐसे लक्षण दिखें तो ग्लूकोमा की जांच कराएं

Sun, 06 Mar 2016 04:00 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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ग्लूकोमा डे - फोटो : फाइल फोटो
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परिवार में यदि किसी को ग्लूकोमा है तो अन्य सदस्यों में इसके होने का खतरा ज्यादा रहता है। खासतौर पर यदि पीड़ित भाई या बहन है। ऐसे लोगों को 40 की उम्र पार करते ही साल में एक बार अपनी आंखों का चेकअप अच्छे नेत्र विशेषज्ञ से करवाना चाहिए। यदि परिवार में कोई भी सदस्य ग्लूकोमा से पीड़ित नहीं है, तब भी अपनी आंखों का चेकअप हर दो साल में एक बार जरूर करवाना चाहिए।
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पीजीआई में ग्लूकोमा का स्पेशलिस्ट क्लीनिक संचालित करने वाले प्रो. एसएस पांडव कहते हैं कि यदि एक बार ग्लूकोमा से आंखों का नुकसान हो गया तो उसकी भरपाई नहीं की जा सकती। सिर्फ ग्लूकोमा को रोका जा सकता है। इसलिए इसका सटीक उपाय समय पर जांच है।

प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने बताया कि पीजीआई छह से 12 मार्च तक ग्लूकोमा सपोर्ट ग्रुप की मदद से वर्ल्ड ग्लूकोमा वीक सेलिब्रेट कर रहा है। इसके तहत छह मार्च को रॉक गार्डन से लेकर सुखना लेक तक ग्लूकोमा वॉक, सात को सुखना लेक पर चंडीगढ़ आर्ट थिएटर ग्रुप की ओर से नुक्कड़ नाटक, नौ को सेक्टर-17 प्लाजा में नुक्कड़ नाटक और दस मार्च को ग्लूकोमा के मरीजों के साथ सीधा संवाद किया जाएगा। इसके अलावा पंजाब व हिमाचल में भी जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
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लोग चेक नहीं करवाते, इसलिए बढ़ रहा खतरा

ग्लूकोमा डे - फोटो : फाइल फोटो
प्रो. पांडव का कहना है कि कई मरीजों में एक समस्या मुख्य रूप से देखी गई है, जिसमें उनका नंबर बढ़ता है। मरीज किसी स्पेशलिस्ट डॉक्टर को दिखाने के बजाय चश्मे वाली दुकान पर चले जाते हैं। इन दुकानदारों के पास ग्लूकोमा को जांचने की ट्रेनिंग नहीं होती, जबकि विदेशों में भी इन लोगों को ट्रेनिंग दी जाती है।

दूसरी बात यह भी है कि ग्लूकोमा को जांचने के लिए कोई एक  टेस्ट नहीं है, इसलिए भी मुश्किलें आती हैं। ग्लूकोमा को जांचने के लिए कई तरह के टेस्ट किए जाते हैं। टेस्ट रिपोर्ट के आधार पर ही ग्लूकोमाकी पुष्टि की जाती है। ग्लूकोमा की पुष्टि के लिए आंख का प्रेशर, आंख का एंगल, फील्ड ऑफ विजन और ऑप्टिक नर्व की जांच होना बहुत जरूरी है।

पीजीआई में 35 हजार मरीज रजिस्टर्ड
पीजीआई में ग्लूकोमा के 35 हजार मरीज रजिस्टर्ड हैं। साल 2008 में मात्र दो हजार मरीज थे। प्रोफेसर पांडव का कहना है कि जागरूकता की वजह से मरीज बढ़ रहे हैं। लगातार संख्या बढ़ने से अब पीजीआई के सामने भी चुनौती बढ़ रही है। इसीलिए पंजाब, हरियाणा, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर के डॉक्टरों को ग्लूकोमा की ट्रेनिंग दी जा रही है, ताकि दूर-दराज से आने वाले मरीज वहीं दिखा सकें। इससे भीड़ भी कम होगी।
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ग्लूकोमा से बचने के उपाय

ग्लूकोमा डे - फोटो : फाइल फोटो
1. 40 की उम्र पार करने के बाद नियमित रूप से आंखों की जांच करवाएं।
2. घर में किसी को ग्लूकोमा है तो बच्चे को होने की ज्यादा संभावना होती है क्योंकि यह एक आनुवांशिक बीमारी है। ऐसे में बच्चे की आंखों की जांच करवा लीजिए।
3. खेलने के दौरान (टेनिस या क्रिकेट बॉल से) अगर आंखों में चोट लग जाए तो इसका इलाज कराएं।
4. आंखों में कभी किसी प्रकार की कोई सर्जरी हुई हो या घाव हो गया हो तो उसकी जांच समय-समय पर करवाते रहें। क्योंकि सर्जरी से ग्लूकोमा होने का खतरा बढ़ जाता है।
5. बार-बार चश्मे का नंबर बदल रहा है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
6. जब आप किसी वस्तु को देख रहे हों और उसके आसपास की चीजें धुंधली दिखाई दे रही है तो तुरंत जांच करवाएं।
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