इंसान की इंसानियत देखिए, एक के मुंह से छीन कर पानी दूसरे की प्यास बुझाई जाएगी। जी हां, ऐसा होगा चंडीगढ़ में। पानी की किल्लत के चलते यूटी प्रशासन ने ऐसा करने की सोची है।
प्रशासन उजाड़ी गई कालोनियों का पानी अब दूसरे सेक्टरों में सप्लाई करेगा। करीब तीस हजार आबादी वाली कालोनी नंबर-5 उजड़ने के बाद निगम के पास लाखों लीटर पानी बच गया था। इसे सेक्टर-44 में सप्लाई किया जा रहा है।
अब सेक्टर-45 में भी यहां से ही पानी की सप्लाई होगी। यहां सेक्टर-52 वाटर वर्क्स से पानी की सप्लाई होती थी। सेक्टर-45 में अभी तक ट्यूबवैल से सप्लाई होती थी।
अब यहां के लिए पाइपलाइन बिछाने का काम चल रहा है, जो इसी महीने पूरा हो जाएगा। इसी तरह कजहेड़ी के पास से हटाई गई कालोनियों का पानी भी सेक्टरों में वितरित किया जाएगा।
लो प्रेशर से निपटने के लिए बूस्टर
लो प्रेशर की समस्या से निपटने के लिए सेक्टर-34 में बूस्टर लगाया गया है। सेक्टर-56 में नगर निगम चौथा बूस्टर लगाने जा रहा है। सेक्टर-35 और 40 में भी बूस्टर के लिए जमीन एप्रूवल का प्रस्ताव प्रशासन को भेजा गया है।
आंकड़े
3915 लाख लीटर पानी की सप्लाई रोजाना
5220 लाख लीटर तक पहुंच चुकी है डिमांड
फर्स्ट फ्लोर पर पानी नहीं
शहर के कई सेक्टरों में लो प्रेशर की दिक्कत है। सेक्टर-48 की आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष हीतेश पुरी का कहना है कि उनके सेक्टर में तो फर्स्ट फ्लोर पर ही पानी नहीं चढ़ रहा है। सेक्टर-48 की सुपर को-ऑपेरेटिव सोसायटी के सतदेव सिंह राणा ने बताया कि उनके यहां सेकैंड फ्लोर पर पानी की समस्या है।
फाउंटेन में नहीं लग सकता टर्शरी वाटर
निगम अधिकारियों का कहना है कि टर्शरी वाटर का इस्तेमाल सिर्फ पार्कों में पानी देने के लिए ही किया जा सकता है। फाउंटेन के लिए टर्शरी वाटर के इस्तेमाल से समस्याएं पैदा होंगी।
पब्लिक हेल्थ विंग के एक्सईएन बीके धवन ने कहा कि फाउंटेन का पानी करीब 15 दिन बाद बदला जाता है। यदि टर्शरी वाटर यहां इस्तेमाल होगा तो उससे पार्क में दुर्गंध फैल जाएगी। इससे लोगों का पार्कों में घूमना व सैर करना मुश्किल हो जाएगा।
इंडस्ट्रियल एरिया में पानी की किल्लत
सिटी के उद्योग को अब पानी के टैंकर का ही सहारा है। सुबह फैक्ट्री खुलने से लेकर शाम को फैक्ट्री के बंद होने तक पानी यहां नहीं मिलता। हालात यह है कि उद्यमी अपना काम टैंकर के माध्यम से चला रहे हैं। चंडीगढ़ में दो हजार इंडस्ट्री हैं। इनमें नटबोल्ट, स्पोर्ट्स गुड्स, वायर, फर्नीचर और रबर बनाने की इंडस्ट्री शामिल हैं।
औसतन हर इंडस्ट्री में दस से बारह कर्मचारी काम कर रहे हैं। गर्मी शुरू होते ही यहां पानी की किल्लत हो गई है। इंडस्ट्री देव दर्शन धूप के प्रदीप जैन ने बताया कि जब सुबह फैक्ट्री में आते हैं तो पानी आना बंद हो जाता है।
चंडीगढ़ में प्रशासन से कई बार गुहार भी की जा चुकी है कि इंडस्ट्री के लिए खास तौर पर पानी की व्यवस्था की जाए। लेकिन, ऐसा किया नहीं गया।
चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल एरिया टैनेंट एसोसिएशन के सचिव बीएस सैनी ने कहा कि बड़ी इंडस्ट्री के लिए तो पानी के टैंकर मंगाकर काम चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को इसके लिए व्यवस्था करनी चाहिए।
ये कहना है अधिकारी का
इस महीने से उजड़ चुकी कालोनी नं. 5 से सेक्टर-45 में पानी सप्लाई किया जाएगा। सेक्टर 44 को यहां से पहले ही पानी मिल रहा है। सेक्टर-44 व 45 में लो प्रेशर की समस्या ज्यादा है। कुछ और सेक्टर भी चिह्नित किए गए हैं, जहां लो प्रेशर की समस्या है। उनके लिए भी एडिशनल इंतजाम किया जा रहे है।
-बीके धवन, एक्सईएन, पब्लिक हेल्थ, नगर निगम