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अब तक 7 हजार पौधे रोप चुके हैं ये जनाब, मिलिए

Thu, 05 Jun 2014 03:22 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना
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सुधार गांव में 15 साल पहले कुछ लोग एक पेड़ काटने आए, लेकिन गांव के निवासी शीतल प्रकाश अपने साथियों के साथ इसके विरोध में खड़े हो गए और आखिरकार उन्होंने पेड़ को बचा लिया। इसके बाद पर्यावरण की देखभाल के प्रति उनका प्रेम एक जुनून बन गया।
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आज तक वे अपनी जेब से खर्च करके इलाके में करीब सात हजार पेड़ लगा चुके हैं। इनमें से पांच हजार पेड़ तपती गर्मी में लोगों को ठंडी छाया दे रहे हैं। 44 साल के शीतल अविवाहित हैं और पेड़ों को बच्चों की तरह पालते हैं। उनकी आमदनी का एक बड़ा हिस्सा इसी पर खर्च हो जाता है।

पर्यावरण की दिशा में उनके इस अनूठे योगदान को पंजाब सरकार ने भी सराहा और वर्ष 2013 में स्वतंत्रता दिवस समारोह में सीएम प्रकाश सिंह बादल ने उन्हें सम्मानित किया था।
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शीतल नीम, पीपल, बरगद और दूसरे परंपरागत फलदार पेड़ उगाने को तवज्जो देते हैं। उनका मकसद इलाके में पर्यावरण संतुलन बनाना है, ताकि लोगों को सेहतमंद वातावरण दिया जा सके। उनका लक्ष्य है कि हर परिवार में कम से कम एक व्यक्ति पर्यावरण प्रेमी हो।

इसके लिए उन्होंने लोगों को जागरूक करने के लिए भी बाकायदा मुहिम शुरू की है। अब वे कुछ गांवों को गोद लेकर उन्हें पर्यावरण फ्रेंडली बनाना चाहते हैं। इस मुद्दे पर गांव एतिआणा, राजोआणा और हलवारा के सरपंचों के साथ उनकी बातचीत चल रही है। इन गांवों में फल और पारंपरिक पौधे लगाकर वे एक वन की शक्ल देने का प्रयास करेंगे। शीतल पहले पानी का इंतजाम करते हैं, इसके बाद पौधे लगाते हैं।

रोजाना औसतन तीन सौ रुपये खर्च
शीतल प्रकाश मोबाइल फोन रिपेयर का काम करते हैं। घर में उनकी मां हैं। आमदनी का अधिकतर हिस्सा पौधों और दवाओं पर खर्च करते हैं। वह रोजाना औसतन करीब 300 रुपये पौधों और दवाओं पर खर्च करते हैं। वे मानते हैं कि पौधे लगाना, उन्हें बड़ा करना और बीमारियों से उनका बचाव अनिवार्य है। उन्हें अफसोस है कि इस नेक काम में सरकार की ओर से आर्थिक सहयोग नहीं मिल रहा है।

पक्षियों के लिए घोंसले भी बांट रहे शीतल
शीतल का मानना है कि पर्यावरण असंतुलन के कारण पक्षी भी लुप्त हो रहे हैं। उन्हें फिर से आबाद करने के लिए उन्होंने मुहिम चलाई है। शीतल अब तक 300 घोंसले बांट चुके हैं। इससे इलाके में पक्षियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। नर्सरी में लगे सभी घोंसलों में पक्षी चहचहा रहे हैं। अगले 15 दिन में 2000 घोंसले और बांटने का लक्ष्य है। वे पक्षियों के पानी पीने के लिए मिट्टी के बर्तन भी बांट रहे हैं।
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