शहर के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थी जीरो पीरियड में अपने इको क्लब को संवारते हैं। बच्चों की इसी लगन को देखकर हर साल पर्यावरण विभाग की ओर से उनके गार्डन को अवार्ड दिए जाते हैं। शहर के सरकारी स्कूलों में 130 इको क्लब हैं, जिसमें कोई माली नहीं बल्कि स्कूली बच्चे और टीचर्स खुद इसकी देखरेख करते हैं।
पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य पर पांच जून को इन इको क्लब में से बेस्ट क्लब को सम्मानित भी किया जा रहा है। सुखना लेक पर होने वाले इस कार्यक्रम में शहर के बेस्ट इको क्लब का अवार्ड इस साल सेंट स्टीफंस स्कूल सेक्टर-45 के क्लब को मिल रहा है।
वहीं 2012 का अवार्ड विवेक हाई स्कूल सेक्टर-38 को मिलेगा। सिटी के इको क्लब का निर्माण 2010 से पर्यावरण विभाग ने किया, जिसका मकसद शहर को और हराभरा करना और बच्चों को पर्यावरण संरक्षण जैसे मकसद से जोड़ना भी था।
इको क्लब बने नर्सरी
शहर के इको क्लब न केवल स्कूल की शोभा बढ़ा रहे हैं, बल्कि ये क्लब सिटी में नर्सरी की कमी को भी दूर कर रहे है। गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर-46 के इको क्लब ने 6500 पौधे दिए गए, जो लोगों को बिलकुल फ्री दिए है।
क्लब इंचार्ज शिक्षिका बलजिंदर कौर ने बताया कि उनके क्लब में करीब 100 से अधिक हर्बल पौधे है, जिसे खुद बच्चे और वे संवारती हैं। सेक्टर-16 स्थित सरकारी मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल की इंचार्ज शिक्षिका नीरजा जैन ने बताया कि 2923 पौधे बांटे।
सौ क्विंटल सूख पत्तों की खाद बनी
इन क्लब में से सेक्टर-46 स्थित सरकारी स्कूल में सूखे पत्तों की खाद बनाई जाती है। यहां इस साल सौ क्विंटल से भी अधिक खाद बनाई गई, जो मुफ्त में नर्सरी में दी जाती है। स्कूल इंचार्ज बलजिंदर कौर ने बताया कि बच्चे जुलाई महीने में आसपास लोगों को खाद भी वितरित करेंगे।
शहर के सभी इको क्लब के कोआर्डिनेटर कम ओवरआल इंचार्ज ओम प्रकाश ने बताया कि सिटी के सभी सरकारी स्कूलों में इको क्लब बहुत ही सुंदर ढंग से संवारे जा रहे है जिसमें बच्चे खासतौर पर रुचि ले रहे हैं। स्कूल में सातवीं से 12वीं कक्षा के छात्र इन क्लब के सदस्य बनाए जाते हैं।