पंजाब कला भवन चंडीगढ़ में भंगड़ा वर्कशॉप चल रही है। इसमें बच्चों से लेकर बूढ़ों तक सभी उत्साह से हिस्सा ले रहे हैं। कहते है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। बचपन से लेकर बुढ़ापे तक इंसान कुछ न कुछ नया सीखता रहता है। उस विशेष काम को सीखने की उसमें लगन व जुनून होना चाहिए। यहीं सब देखने को मिल रहा है वर्कशॉप में। इसमें 50 से उपर की उम्र वाले पुरूष झूमर और 18-22 साल के लड़के भंगडा सीख रहे हैं।
वर्कशॉप का आयोजन पंजाब आर्ट्स काउंसिल और इंटरनेशनल कल्चरल क्लब चंडीगढ़ ने किया है। प्रतिभागियों को झूमर और भंगड़ा सीखाने वाले ट्रेनर अजीत सिंह ने बताया कि यह वर्कशॉप 10 जुलाई तक चलेगी। इसमें 50 साल से उपर के 8 और 18 से 22 साल के 35 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। पंजाब कला भवन केओपन एयर थिएटर में शाम 6 बजे से 7:30 बजे तक यह वर्कशॉप चलती है।
10 जुलाई को इसी जगह पर यही प्रतिभागी लोक नाच झूमर का प्रदर्शन करेंगे। अजीत सिंह ने बताया कि वह 6 से 4 साल के बच्चों को पंजाबी लोक नाच से जोड़ने केलिए ऐसी ही एक और वर्कशॉप का आयोजन करने की योजना बना रहे हैं।
झूमर में दिलचस्पी बचपन से ही थी। स्कूल, कॉलेज में झूमर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते थे। लेकिन नौकरी केबाद इससे नाता छूट गया था। लेकिन इस वर्कशॉप केजरिए इससे जुड़ने का एक मौका मिला है।
- स्वरन सिंह(उम्र 54 साल),सरकारी कर्मचारी, सेक्टर 37
आज की युवा पीढ़ी पंजाब के लोक नाच झूमर को भूलती जा रही है। इसलिए युवा पीढ़ी को इस नाच से जोड़ने केलिए मैं झूमर सीख रहा हूं।
- स्वरन सिंह चन्नी(उम्र 52),मोहाली फेस-1
लोक नाच झूमर केवल यूथ फेस्टिवल तक सीमित रह चुका है। नौजवान वर्ग में भी भंगडे़ का ज्यादा क्रेज है। मैंने सोचा हमारी युवा पीढ़ी न सही, हम तो इस लोक नाच को संभालकर रख सकते है जिससे युवा पीढ़ी अनजान है।
- बलवीर सिंह(उम्र 50), सेक्टर 15