हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के 435 नए, पुराने सेक्टर में विकास कार्य पूरी तरह से रुक गए हैं। प्राधिकरण के जोन प्रशासकों और इंजीनियरिंग विंग के एसई, अधिशासी अभियंता की बजट मंजूरी शक्तियां वापस लेने से यह हुआ है। प्राधिकरण ने सेक्टरों में विकास कार्य के लिए सीधे टेंडर लगाने या एस्टीमेट बनाने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। इसके लिए मुख्यालय की अनुमति लेना अनिवार्य है। इसके बाद से जोन कार्यालयों के अधिकारी फाइलों की स्वीकृति के लिए प्राधिकरण मुख्यालय पंचकूला के चक्कर लगा रहे हैं।
अब जोन प्रशासकों के पास सड़कों के गड्ढे भरने की पावर भी नहीं रही है। इस पर ऑल सेक्टर रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने कड़ा एतराज जताते हुए सीएम से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप वत्स ने बताया कि एचएसवीपी मुख्यालय लगातार ऐसे आदेश जारी कर रहा है, जिससे सेक्टरवासियों की परेशानी घटने की बजाय बढ़ रही है। ताजा निर्णय के बाद सेक्टरों के सभी प्रकार के विकास कार्य पूरी तरह से रुक गए हैं। सड़कों के गड्ढे भरने के लिए भी मुख्यालय की अनुमति लेनी पड़ रही है।
इससे सेक्टरों का विकास बाधित हो गया है। सेक्टरवासियों में निर्णय के खिलाफ नाराजगी है। वत्स ने कहा कि एचएसवीपी मुख्यालय यह निर्णय वापस ले। एन्हांसमेंट की दूसरी गणना की प्रकिया को जल्द पूरा करवाने पर प्राधिकरण मुख्यालय को फोकस करना चाहिए, क्योंकि हजारों परिवार पिछले दो वर्ष से परेशान हैं। उन्होंने बताया कि सेक्टरों में सभी प्रकार के विकास कार्य इंजीनियर विंग के अधिशासी अभियंता व एसई करवाते हैं। अधिशासी अभियंता की बजट मंजूरी की पावर 2 लाख रुपये और एसई की 50 लाख रुपये तक थी।
जोन प्रशासकों की मंजूरी के बाद फाइल को मुख्यालय भेजा जाता था। नए आदेशों में जोन अधिकारियों से ये शक्तियां वापस ले ली गई हैं। अब हर छोटे से छोटे व बड़े टेंडर, एस्टीमेट बनाने से पहले मुख्यालय की अनुमति लेनी होगी। किस कार्य के लिए किस एजेंसी को हायर करना है, इसका निर्णय भी मुख्यालय करेगा।