आज भी लोग हाथों के बने स्वेटर को ही पहनना ज्यादा पसंद करते हैं। क्योंकि यह स्वेटर गर्मी के साथ प्यार का भी एहसास कराते हैं। दादी नानी अपने बच्चों के लिए आज भी स्वेटर बनाने को पहल देती हैं।
आजकल मुलायम ऊन का ट्रेंड चला हुआ है, उससे बुने कपडे़ तो लोग अपने बच्चों को पहनाना ज्यादा अच्छा समझते हैं क्योंकि उनका शरीर पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता। वह इतने मुलायम होते हैं कि बच्चे उनमें खुद को आरामदायक समझते हैं।
ऐसे ही बहुत प्रकार के ऊन आपको चंडीगढ़ की सबसे पुरानी ऊन मार्केट में देखने को मिलेंगे जो कि सेक्टर-38 सी में वूलन मार्केट के नाम से प्रसिद्ध हैं। यह इतनी पुरानी मार्केट है कि दादी नानी भी अपने पोता पोती के लिए वहीं से ऊन लेने आते हैं।
वहां हाथों के बुने हुए स्वेटर भी मिलते हैं जो बच्चों एवं बड़ों दोनों के लिए ही हैं। आजकल मुलायम ऊनों में स्टॉलस का भी ट्रेंड चला हुआ है। जो जींस और सूटों के ऊपर पहनने के लिए काम में आते हैं।
वहां ऊन के स्वेटर और स्टॉलस के अलावा मौजें, दस्ताने, रंग बिरंगी टोपियां, जिनका आज कल ड्रेस के साथ स्वेटर और टोपियां रंग मिला कर पहनने का रिवाज है। वहां काफी रंगों में और काफी वैरायटी में ऊन मिलती है।
ये ऊन है उपलब्ध
फैदर ऊन : यह ऊन बच्चों के स्वेटर बनाने के लिए होती है क्योंकि यह बहुत ही मुलायम होती है। इसकी कीमत 350 रुपये किलो है।
नार्मल ऊन : यह ऊन पुरुष, स्त्रियों दोनों वर्गों के स्वेटर बनाने के लिए होती हैं। इसकी कीमत 250 रुपये किलो है।
रेमंड ऊन : यह मंहगी ऊन है। क्योंकि यह क्वालिटी वाली ऊन होती है। इसकी कीमत 400 रुपये किलो है।
क्रि स्टल ऊन : यह चमकदार ऊन है जो 350 रुपये किलो में खरीदी जा सकती है।
बेबी सॉफट : यह ऊन बच्चों के स्वेटर बनाने के लिए होती है क्योंकि यह बहुत ही मुलायम होती है। यह डिब्बे में मिलती है। एक डिब्बे में 6 पीस होते हैं। इसकी कीमत 350 रुपये किलो है। इनमें 3 रंगों वाली इकट्ठी ऊन भी आती है जो रंग बिंरगी ड्रेस बनाने के लिए काम में आते है।