चंडीगढ़ प्रशासन ने सार्वजनिक स्थलों और वाहनों आदि में महिलाओं के यौन उत्पीड़न के मामलों को रोकने के मुद्दे पर हाथ खड़े कर दिए हैं। प्रशासन ने इस संबंध में हाईकोर्ट की ओर से जारी निर्देशों पर अमल करने में असमर्थता जताई है। एडवोकेट एचसी अरोड़ा बनाम सुमेध सिंह सैनी अवमानना मामले के तहत जारी सुनवाई में प्रशासन ने समुचित जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा है। हाईकोर्ट ने प्रशासन का आग्रह स्वीकार करते हुए मामले की सुनवाई 29 अगस्त तक स्थगित कर दी।
अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान, यूटी प्रशासन के वकील ने कहा कि यह व्यवहारिक नहीं है कि प्रत्येक सार्वजनिक परिवहन वाहनों में भारी संख्या में महिला पुलिस कांस्टेबलों की तैनाती की जा सके। इसके साथ ही उन्होंने ‘कोर्ट ऑन इट्स ओवन मोशन बनाम स्टेट आफ पंजाब एंड अदर्स’ के तहत 2 अप्रैल, 2003 को जारी निर्देशों की समीक्षा के लिए पीआईएल बेंच के समक्ष समुचित जवाब दाखिल करने के लिए समय देने की आग्रह किया। अवमानना याचिका में एडवोकेट अरोड़ा ने आरोप लगाया था कि एपक्स कोर्ट की ओर से 30 नवंबर, 2012 को महिलाओं के खिलाफ अपराध की घटनाओं से निपटने और घटनाओं की रोकथाम के लिए जो आदेश जारी किए थे, प्रतिवादियों ने उन्हें अमल में नहीं लाया।
याचिका में कहा गया कि अपैक्स कोर्ट ने अपने फैसले में यह निर्देश दिए थे कि सभी राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश बस अड्डों, बस स्टापेज, रेलवे स्टेशनों, मेट्रो स्टेशनों, सिनेमा हाल, शापिंग माल्स, पार्कों, समुंद्र किनारों, सार्वजनिक परिवहन वाहनों, धार्मिक स्थानों आदि पर सादे कपड़ों में महिला पुलिस अधिकारियों को तैनात करें ताकि महिलाओं से छेड़छाड़ की घटनाओं पर नजर रखी जा सके। इसके बाद, हाईकोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने भी उक्त निर्देशों पर सहमति जताते हुए माना कि पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में भी इन निर्देशों का अक्षरश: पालन होना चाहिए।