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Womens Day: 'अपराजिता' बोलीं- न विशेष सम्मान न ही आरक्षण, चाहिए तो बस मान और सम्मान

Sun, 08 Mar 2020 11:11 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला नेटवर्क, पंचकूला
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संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लेने आईं महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
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आज भी भारतीय समाज पुरुष प्रधान है। बेशक समानता की बात की जाती है, लेकिन महिलाओं को न विशेष सम्मान न ही आरक्षण चाहिए। उन्हें तो मान और सम्मान की दरकार है। तभी महिला दिवस का सही वजूद सामने आएगा। भले ही आरक्षण न दीजिए लेकिन सम्मान हर जगह मिलना चाहिए। महिलाएं, युवतियां आज हर क्षेत्र में अग्रणी हैं। भले ही दुर्गम चोटियों पर फतह हो, सेना हो, खेल हो, विज्ञान हो, स्वास्थ्य हो या फिर अन्य क्षेत्र। महिलाओं ने स्वयं को हर जगह साबित किया है। इसके बाद भी आज पुरुष प्रधान समाज में महिलाएं एक समान स्थिति में नहीं हैं।
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यह कहना है उन सभी महिलाओं का, जिन्होंने महिला दिवस से पूर्व नारी सशक्तिकरण पर अमर उजाला द्वारा आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार साझा किए। अपराजिता के मंच पर महिलाओं ने अपने जीवन की विपरीत परिस्थितियों और संघर्ष के बारे में बताया। उन्होंने उन विचारों को साझा किया कि वे अपने शहर और देश में किस प्रकार के बदलाव चाहती हैं। गृहिणी से लेकर स्वास्थ्य, शिक्षा, समाज सेवा, सरकारी नौकरी और बिजनेस कर रही महिलाओं ने एक आवाज में सर्वप्रथम इज्जत और सुरक्षा की मांग उठाई। पढ़िए और क्या कहा...  

एक समान स्थिति में नहीं हैं महिलाएं
पूर्व समय के मुकाबले महिलाओं की स्थिति में सुधार तो आया है, लेकिन समाज में अभी भी महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले एक समान स्थान हासिल नहीं हैं। हर परिवार की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को शुरूआती जीवन काल से ही महिलाओं, युवतियों की इज्जत करना सिखाएं। उनमें महिला और पुरुष के बीच किसी भेदभाव की सोच को ही न पनपने दिया जाए। तभी देश का भविष्य सुखद हो सकेगा।
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पहले महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले सशक्त नहीं समझा जाता था। लेकिन अब इस नजरिए में बदलाव आया है। महिलाओं में आत्मबल मल्टी टास्किंग और अन्य खूबियां होती हैं। मैं बैंकिंग क्षेत्र में सेवाएं दे चुकी हूं और आर्टिस्ट भी हूं। बच्चों को अच्छी परवरिश और संस्कार दें, ताकि वे महिला और युवतियों का आदर करें।  
 - गुरमीत कौर खन्ना उर्फ मीता खन्ना

महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले एक समान अवसर मिलने चाहिए। उनकी प्रतिभा को दबाया न जाए। ऐसा होने पर ही महिला दिवस का सही अर्थ सामने आएगा।
- निधी गर्ग

युवतियों को शिक्षित करने के पीछे उनकी शादी अच्छे घर में हो, इस सोच की जगह उन्हें आत्म निर्भर बनाने की सोच प्रबल होनी चाहिए। सरकारी और निजी नौकरियों के अवसर लगातार कम होते जा रहे हैं। इस कारण युवतियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शिक्षित करें।  
- मान्या कुमारिया, डेंटिस्ट

महिलाओं-युवतियों को किसी प्रकार के विशेष लाभ नहीं बल्कि इज्जत चाहिए। सरकार आश्वस्त करे कि महिलाएं व युवतियां हर जगह चौबीस घंटे सुरक्षित हैं। महिलाओं को ऐसी स्थिति में लाया जाए कि वह विभिन्न परिस्थितियों में एक निर्णायक की भूमिका में रह सकें।  
- वैशाली कांसल

अकसर बिजनेसमैन परिवार नौकरियों के पक्षधर नहीं होते। मेरी शादी उस परिवार में हुई जहां अधिकांश पारिवारिक सदस्य नौकरियां करते थे। मेरे लिए कई चुनौतियां थीं। उनसे सीख लेकर मैंने बच्चों की परवरिश अच्छे से की। अब मेरी बेटी रुड़की स्थित आईआईटी में है। बेटा एमबीए कर चुका है। बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने की सीख मैंने अपने जीवन के अनुभव से ली।  
- पूजा अग्रवाल

तू है आसमां तू है जमीं आदि, कहने को तो आजाद हैं हम, कहां है आजादी। लड़कियों के लिए अभी भी कई मुश्किलें हैं। महिलाओं को उनकी प्रतिभा प्रदर्शित करने के अधिक अवसर नहीं मिल पाते। सुरक्षा का अभाव भी है। राजनीति हो या फिर कोई अन्य क्षेत्र, महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले एक समान अवसर मिलने पर ही महिला दिवस की मजबूती पता लग सकेगी।  
- रंजीता मेहता, हरियाणा प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता

समाज अभी पुरुष प्रधान है, महिलाओं को पूरे अवसर नहीं मिल पाते। पुरुषों में अभी भी अहम है। समाज में संतुलन बनाए रखने के लिए महिला और पुरुष का एक समान स्थिति में होना आवश्यक है।  
- अलका सिक्का

समाज में महिलाओं का स्थान शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। महिला के सहयोग के बिना हर कार्य अधूरा है। महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले एक समान स्थान मिलना चाहिए। मेरे बेटा और बहू, दोनों वर्किंग हैं इससे मुझे खुशी है।  
- लवलीन

मुझे ऐसा लगता है कि हम अभी भी दादी और नानी के समय की स्थिति में हैं। महिला ही महिला की दुश्मन बनी हुई है। हर परिवार की जिम्मेदारी है कि बच्चों को ऐसे संस्कार दें कि वे हर उम्र वर्ग का आदर सम्मान करना सीखें।   
- ज्योति बजाज

मैं पंचकूला की पहली महिला बॉक्सर हूं। लड़कियां पढ़ी लिखी तो काफी हैं लेकिन अधिकांश जगहों पर संस्कारों की कमी नजर आती है। लड़की ससुराल में बुजुर्गों को समझे और उनका सम्मान करे। बुजुर्गों की बराबरी करने का प्रयास न करे। इस सोच के साथ उनमें आत्मबल आएगा।  
- पूनम, पंचकूला की पहली महिला बॉक्सर

मैं अपना जीवन शिक्षा के क्षेत्र में समाज को समर्पित करना चाहती हूं। महिलाओं को एक समान स्थान मिलने की जरूरत अभी भी है। महिला विपरीत परिस्थितियों में भी संयम से काम करते हुए सफलता हासिल करती है।  
- सुमन, शिक्षिका

टीचिंग मेरा जुनून है। मेरा मुख्य मकसद हर जीवन को सकारात्मक सोच देना है। जनरेशन एक समान हो, मैंने इस पर बल दिया है। करीब 18 वर्ष की आयु में मेरा विवाह हो गया और 47 वर्ष में मैं नानी भी बन गई थी। महिला दिवस पर विशेष सम्मान के बजाय पूरा वर्ष महिलाओं को इज्जत मिले, तो ही इस दिवस का सही अर्थ सामने आएगा।   
- प्रोमिला गोयल
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भारत में महिलाओं की स्थिति अच्छी नहीं है। पुरुषों में अहम अधिक रहता है। इस कारण युवतियां व महिलाएं आगे नहीं बढ़ पाती। इन्हीं कारणों के चलते मैंने बेटी को कनाडा भेजा है। बेटी मुझे फोन कर बताती है कि कनाडा का सिस्टम भारतीय सिस्टम से कितना अधिक बेहतर है।  
- अंजू गुप्ता

महिलाएं सुबह पांच बजे से रात को सोने तक मुख्य भूमिका में रहती है। सबसे पहले महिला को ही महिला का सम्मान करना होगा। मेरे दो बेटे और बहू हैं और सभी वर्किंग है। मेरी बहू को पढ़ने का शौक था तो उसने शादी के बाद एलएलएम तक पढ़ाई की। मुझे इसकी खुशी है।
- सुधा भारद्वाज, हरियाणा महिला प्रदेश अध्यक्ष

जीवन साथी के साथ से महिला के लिए जीवन की चुनौतियों से पार पाना आसान हो जाता है। मेरी शादी को 27 वर्ष हो चुके हैं। मेरे पति ने मुझे हर जगह स्पोर्ट किया है। शादी के बाद पांच वर्ष तक मैं पढ़ाई करती रही। अब बिजनेस में पति के साथ हूं। महिला उसे मिली इज्जत को कभी नहीं भूलती। मेरी बेटी रोलर हॉकी की नेशनल प्लेयर है और मैं उसकी उपलब्धि से बहुत खुश हूं।  
- दर्शना मान
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