अधिकतर महिलाएं आमतौर पर एनीमिया की शिकार होती हैं, लेकिन यदि प्रेग्नेंसी के दौरान वे इससे ग्रसित हैं तो बात चिंताजनक है। पीजीआई के स्कूल आफ पब्लिक हेल्थ व सेन फ्रांसिस्को की यूनिवर्सिटी आफ कैलीफोर्निया के एक अध्ययन में पाया गया कि प्रेग्नेंसी के दौरान भी आधी से ज्यादा महिलाएं एनीमिया की शिकार होती हैं।
120 महिलाओं की जांच में पता चला है कि करीब 65 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से जूझ रहीं थीं। हाल ही में यह स्टडी फूड एंड न्यूट्रीशियन बुलेटिन में प्रकाशित हुई है। स्टडी में सभी वर्ग की महिलाओं को शामिल किया गया था, इनमें उच्च, मध्यम और निम्न वर्ग की महिलाएं शामिल थीं।
सिर्फ आठ प्रतिशत महिलाएं खा रही थीं हरी सब्जियां
स्टडी में शामिल महिलाओं से न्यूट्रीशियन के नालेज के बारे में जानकारी हासिल की गई। इस दौरान बातचीत में पता चला कि सिर्फ 35 प्रतिशत महिलाओं को आयरन फोलिक एसिड की गोलियां प्राप्त हुईं। पब्लिक हेल्थ प्रोग्राम के तहत हर सरकारी अस्पताल में प्रेग्नेंट महिलाओं को मुफ्त में फोलिक एसिड की गोलियां दी जाती हैं, लेकिन सिर्फ एक चौथाई महिलाओं को ही आयरन की गोलियां मिलीं। 53 प्रतिशत महिलाओं को पता है कि हरी सब्जियों के खाने से एनिमिया का खतरा टलता है, लेकिन इनमें से सिर्फ आठ प्रतिशत महिलाएं ही हरी सब्जियां खा रही थीं।
आयरन की गोलियां के बारे में पता है, लेकिन एनिमिया के बारे में नहीं
स्टडी में यह भी देखने को मिला कि स्लम एरिया की महिलाओं को आयरन की गोलियां के बारे में तो जानकारी है, लेकिन वे एनिमिया से अंजान हैं। उन्हें यह भी पता है कि सरकार की ओर से उन्हें आयरन की गोलियां मुफ्त में दी जा रही हैं। उनका यह भी कहना था कि कई बार उन्हें अस्पतालों में गोलियां नहीं मिलती हैं तो उन्हें बाहर से खरीदना पड़ता है। इस बारे में भी स्टडी में उल्लेख किया गया है। स्टडी में बताया गया है कि एनीमिया का मुख्य कारण आयरन की कमी, दवाओं की घटिया सप्लाई और प्रेग्नेंट महिलाओं व हेल्थ केयर प्रोवाइडर के बीच कम्युनिकेशन की कमी है।
प्रेग्ननेंसी में एनीमिया की कमी घातक
एक्सपर्ट बताते हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान एनीमिया की कमी जन्म लेने बच्चे के लिए काफी घातक साबित हो सकता है। इससे मां की मौत हो सकती है, प्रीमेच्योर बच्चा पैदा हो सकता है, जन्म के वक्त बच्चे का वजन काफी कम हो, मृत बच्चा भी जन्म ले सकता है और बच्चे के दिमाग पर भी असर पड़ सकता है।