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Chandigarh : 40 से कम उम्र की महिलाओं में स्तन कैंसर का खतरा ज्यादा, पीजीआई चंडीगढ़ के शोध में खुलासा

Wed, 31 Jan 2024 06:19 AM IST
दुष्यंत शर्मा वीणा तिवारी, चंडीगढ़

सार

संक्रमित महिलाओं पर इलाज की पद्धतियां भी कारगर साबित नहीं हो रहीं। इसका खुलासा पीजीआई चंडीगढ़ के सर्जरी विभाग में हुए शोध से हुआ है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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उत्तर भारत की 40 साल से कम उम्र की महिलाओं में स्तन कैंसर का खतरा ज्यादा है। वहीं, संक्रमित महिलाओं पर इलाज की पद्धतियां भी कारगर साबित नहीं हो रहीं। इसका खुलासा पीजीआई चंडीगढ़ के सर्जरी विभाग में हुए शोध से हुआ है। शोध में पाया गया कि चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की 40 साल से कम उम्र की महिलाएं इसकी चपेट में ज्यादा आ रही हैं, जबकि विदेश में यह कैंसर 50 साल के बाद सामान्य है।

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लक्षण

  • स्तन में या बांह के नीचे गांठ या मोटा होना
  • स्तन के आकार या आकृति में परिवर्तन
  • स्तन की त्वचा के रंग या बनावट में बदलाव

कारण

  • अधिक उम्र, अधिक वजन, परिवार का इतिहास, आहार, शराब और तंबाकू का सेवन।


विदेशों में हुए शोध का संदर्भ लेते हुए उत्तर भारत से आने वाले केस की स्थिति का आकलन किया गया है। इसमें स्तन कैंसर से ग्रस्त 120 महिलाओं को शामिल किया गया। उनमें से ज्यादातर की उम्र 40 साल से कम थी, जबकि फैमिली हिस्ट्री या इसके कारण माने जाने वाले तथ्य उनमें न के बराबर थे।

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- डॉ. विपेंद्र, सर्जरी विभाग

बन जाती हैं एक या अधिक गांठें  
स्तन कैंसर आमतौर पर महिलाओं को प्रभावित करता है, लेकिन वर्तमान में यह पुरुषों को भी प्रभावित कर सकता है। ज्यादातर इन मामलों में एक या फिर एक से अधिक गांठ का निर्माण होता है। इन गांठों को स्तनों के अंदर आसानी से महसूस किया जा सकता है। यह गांठ स्तन के ऊपरी या निचले भाग में होती हैं।

इलाज का भी कम हो रहा असर
शोध करने वाले डॉ. विपेंद्र ने बताया कि स्तन कैंसर में सर्जरी और कीमो के माध्यम से इलाज किया जाता है, लेकिन इस क्षेत्र के कैंसर में सर्जरी के केस में दोबारा संक्रमण का खतरा ज्यादा पाया गया। वहीं, कीमो कराने वालीं महिलाओं पर दवाओं का असर भी कम पाया गया। इसके कारणों की जांच के लिए कैंसर ट्यूमर की जांच की गई, जिसमें पाया गया कि इलाज की धीमी रफ्तार के लिए उनके कैंसर ट्यूमर में पाए जाने वाले हार्मोन रिसेप्टर जिम्मेदार हैं, जो उनके इलाज को ज्यादा जटिल बना रहा है।

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