ट्राइसिटी की इन पांच महिलाओं की जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन इन्होंने न हार मानीं और न डरी। आज अपने पैरों पर खड़ी हैं, साथ ही अन्य गरीब और पीड़ित महिलाओं को स्वावलंबी बनाने में मदद कर रही हैं।
पति से अलग होकर बनीं स्वावलंबी
चंडीगढ़ की सहर कारोछोरलू तीन साल तक पति के घर में बंधक जैसी जिंदगी बिताने को मजबूर रहीं। इसके बाद उन्होंने पति का घर छोड़ दिया और अलग रहने लगीं। कारोछोरलू आज थैरेपिस्ट और लाइफ कोच हैं। वह मजबूर औरतों की मदद कर रही हैं। एसिड अटैक पीड़ितों, गरीब लड़कियों की शादी, सुविधाओं से वंचित बच्चों की मदद करने को वह हमेशा तैयार रहती हैं।
एड्स के प्रति कर रहीं जागरूक
एचआईवी पीड़ित पूजा ठाकुर एड्स के प्रति महिलाओं को जागरूक कर रही हैं। 23 की उम्र में पति की मौत हो गई। उनके तीन बच्चे हैं, उन्हें भी एड्स है। इसकी जानकारी होने के बाद परिवार ने उनका साथ छोड़ दिया। इसके बाद पूजा बच्चों को लेकर सिरमौर से चंडीगढ़ आ गईं। इस समय पूजा एचआईवी पीड़ित महिलाओं के साथ मिलकर काम कर रही हैं। उन महिलाओं के साथ स्वरोजगार के तहत काम कर जीवन यापन कर रही हैं।
गरीब महिलाओं की मदद को हमेशा तैयार
शहर की रजनी तलवार राइट-वे चाइल्ड की अध्यक्ष हैं। वह अपना ब्यूटी पार्लर चलाती हैं और गरीब लड़कियों को प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वावलंबी बनाने में सहयोग करती हैं। साथ ही यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को मदद करती हैं। रजनी अब तक करीब 11 गरीब परिवारों की लड़कियों की शादी करवा चुकी हैं।
दहेज उत्पीड़न, एसिड अटैक महिलाओं को मदद
पंचकूला की रेणु माथुर एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने एक हेल्पलाइन शुरू की हैं। वह सुबह 10 से शाम पांच बजे तक वह कॉल सुनती हैं और जरूरतमंदों की मदद करती है। रेणु कहती हैं कि 25 साल पहले देखा कि महिलाओं पर बहुत जुर्म हो रहे थे। उनकी हालत देखकर बर्दाश्त नहीं हुआ, तबसे हर पीड़ित महिला की मदद के लिए आगे रहती हैं। रेणु माथुर दहेज उत्पीड़न, एसिड अटैक, यौन शोषण पीड़ित महिलाओं को हरसंभव मदद मुहैया करवाती हैं।
जज्बे से हासिल किया मुकाम
मोहाली की राजिंदर रोजी की शादी 20 की उम्र में हो गई थी। वह 11वीं पास हैं, लेकिन पढ़ने-लिखने का उनका जज्बा कम नहीं हुआ। उन्होंने हिंदी, अंग्रेजी, उर्द्, पंजाबी और संस्कृत सीखी। रोजी 500 से अधिक कविताएं लिखने के अलावा कई किताबों का अलग-अलग भाषाओं में अनुवाद भी कर चुकी है। उन्हें साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए पुरस्कृत किया गया। राजिंदर रोजी इंडियन रेड क्रॉस सोसायटी की लाइफ मेंबर हैं। रोजी टीबी से पीड़ित लोगों की मुफ्त मदद करती हैं।