गांव शताबगढ़ से गुजरती घग्घर नदी में पिछले लंबे समय से अवैध खनन हो रहा है। इस बारे में घग्घर के साथ लगते गांव बाकरपुर निवासी कई बार अधिकारियों व पुलिस को शिकायत कर चुके हैं। लेकिन वह कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि धड़ल्ले से माइनिंग के कारण घग्घर के बहाव का रुख बदल रहा है।
जिस कारण कई गांवों को बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। किसानों ने कहा कि अवैध खनन के कारण यहां के गांव भांखरपुर, इस्सापुर व बाकरपुर की जमीन घग्घर में बह जाने का खतरा पैदा हो गया है। किसानों ने माइनिंग रोकने में नाकाम रहे विभाग, पुलिस व प्रशासन पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि जितने भी पुलिस और प्रशासन के अधिकारी हैं, उनके खिलाफ जांच कर उन्हें सस्पेंड किया जाए।
अन्यथा वह आंदोलन शुरू करेंगे। किसानों ने मौके पर चल रहा खनन कार्य दिखाने के लिए डीएसपी डेराबस्सी व एसएचओ जीरकपुर को फोन भी किया। लेकिन काफी देर इंतजार करने पर भी वह नहीं पहुंचे। इस दौरान किसानों ने वहां से माइनिंग माफिया के लोगों को ललकारा और उन्हें वहां से भगाया। गुस्साए किसानों को देख आरोपी वहां से तुरंत मशीनें व टिप्पर लेकर फरार हो गए।
डेराबस्सी के गांव इस्सापुर के किसान दीदार सिंह, नसीब सिंह, जुझार सिंह, हरबंस सिंह, रणजीत सिंह, हरी सिंह, रघुबीर सिंह, गुरचरन सिंह सहित अन्य किसानों ने कहा कि घग्घर के साथ गांव भांखरपुर, बाकरपुर व इस्सापुर की जमीनें पड़ती हैं।
लेकिन कुछ जमींदार अपनी जमीन को सताबगढ़ में मिलाने के लिए माइनिंग माफिया के साथ दिन रात अवैध माइनिंग कर घग्घर का बहाव बदल दिया है। माइनिंग रोकने के लिए पुलिस व प्रशासन को सूचित भी किया लेकिन किसी ने कोई कार्रवाई नहीं की।
हालत यह हैं कि घगघर के साथ लगते गांव भांखरपुर, इस्सापुर व बाकरपुर की जमीनें घग्घर में बहने का खतरा बन गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि माइनिंग माफिया को सरकारी शह मिली है।
इस बारे में संपर्क करने पर एसडीएम शिव कुुमार ने कहा कि मामला उनके ध्यान में नहीं है।
उन्होंने कहा कि पुलिस व माइनिंग विभाग को कार्रवाई की हिदायत दी जाएगी। थाना प्रभारी जीरकपुर दीपइंद्र सिंह ने कहा कि ग्रामीण पुलिस को सूचित करने से पहले खुद मौके पर पहुंच जाते हैं जिस कारण खनन माफिया मौके से फरार हो जाते हैं। पुलिस ने ग्रामीणों को पहले पुलिस को सूचित करने को कहा है।