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24 साल के युवक के सीने में धड़केगा महिला का दिल, छह परिवारों का अंधेरा दूर 

Thu, 27 Oct 2016 10:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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हार्ट ट्रांसप्लांट
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कई सालों से छह परिवारों में छाया अंधेरा दीपावली के ठीक पहले पीजीआई और एक महिला ने दूर कर दिया। पंजाब की रहने वाली 35 वर्षीय महिला एक एक्सीडेंट में घायल हो गई थी। 25 अक्तूबर को उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया।
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महिला के परिजनों की सहमति और पीजीआई रोटो टीम के सहयोग से उसकी दो किडनी, एक पेनक्रियाज, दो कोर्निया, लिवर और हार्ट दान किया। ऐसा पहली बार है जब एक डोनर से छह लोगों को नया जीवन मिला है।

 महिला से निकाला गया हार्ट रोपड़ के थलीकलां निवासी 24 वर्षीय गगनप्रीत को ट्रांसप्लांट किया गया है। डिकम्पेनस्टेड कार्डियोमायोपैथी से पीड़ित होने के कारण उसका हार्ट सिर्फ 15 प्रतिशत काम कर रहा था। 
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पिछले दो साल से उसका परिवार घुट-घुटकर जीवन बिता रहा था। युवक की मां कुलजिंदर ने बताया कि उनके बेटे को इतनी खांसी आती थी कि वह सो  भी नहीं पाता था। 

युवक की तीसरी बार खुली किस्मत

मानव अंग - फोटो : Reuters
दवाई में अब तक लाखों रुपये खर्च हो चुके हैं। बुधवार रात जब डाक्टरों ने बताया कि आपरेशन सफल हो गया है तो परिवार के सभी सदस्यों के आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।

युवक की तीसरी बार खुली किस्मत
गगनप्रीत को दो बार पहले भी पीजीआई बुलाया गया था, लेकिन किस्मत साथ नहीं दे रही थी। करीब छह महीने पहले जब उसे बुलाया गया तो डोनर का हार्ट फेल हो गया। 

दूसरी बार जब उसे बुलाया गया तो डोनर के हार्ट में इंफेक्शन निकल आया। इसके चलते गगनप्रीत को उसे मायूस होकर वापस जाना पड़ा। मंगलवार शाम पीजीआई के डाक्टर अजय बहल ने गगनप्रीत के पिता को फोन किया और कहा कि एक डोनर आया है। 

उसके बाद वे तुरंत पीजीआई पहुंच गए। बुधवार शाम पांच बजे आपरेशन शुरू किया, जो रात साढ़े दस बजे तक चलता रहा। इसी तरह से बाकी अंग भी सुरक्षित ट्रांसप्लांट किए गए हैं।
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पीजीआई का तीसरा हार्ट ट्रांसप्लांट

चंडीगढ़ का पीजीआई अस्पताल - फोटो : PTI
पीजीआई का तीसरा हार्ट ट्रांसप्लांट
पीजीआई का यह तीसरा हार्ट ट्रांसप्लांट है। पहला हार्ट ट्रांसप्लांट पीजीआई में साल 2013 में किया गया था। हालांकि छह महीने के बाद रिसीपिएंट की मौत हो गई थी। उसके बाद साल 2015 में कुरुक्षेत्र के एक बच्चे का हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया। वह पूरी तरह से ठीक है। पीजीआई कार्डियोलाजी के डाक्टर उसका पूरा ध्यान रख रहे हैं। महिला का लीवर भी एक महिला को ही लगाया गया है। 

ट्रांसप्लांट में पीजीआई टीम का अहम रोल
इस पूरे ट्रांसप्लांट में पीजीआई की रोटो, कार्डियोलाजिस्ट और एनेस्थीसिया के डाक्टरों व टेक्नोलाजिस्ट का अहम रोल रहा है। पंजाब की महिला के परिजनों को पीजीआई के ट्रांसप्लांट को-आर्डिनेटर ने आर्गन डोनेशन के लिए तैयार किया, जो इस मौके पर सबसे कठिन काम होता है। 

उसके बाद पीजीआई ने सभी टीमों को को-आर्डिनेट कर अंगों को सुरक्षित निकालने और ट्रांसप्लांट की रूपरेखा तैयार की। सभी टीमों ने परफेक्ट टाइमिंग के साथ काम किया और आर्गन ट्रांसप्लांट को अंजाम दिया।

'एक परिवार के लिए ऐसे मौके पर इतना बड़ा फैसला लेना कठिन होता है, लेकिन डोनर की फेमिली ने समाज के सामने मिसाल पेश की है। पीजीआई की टीम ने एक बेहतरीन ट्रांसप्लांट को अंजाम दिया है।'- डा. विपिन कौशल, नोडल अफसर रोटो, पीजीआई
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