फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

HCS पेपर लीक: पहली गिरफ्तारी के बाद बड़े खुलासों की उम्मीद, जानें पूरा मामला

Fri, 10 Nov 2017 09:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
Haryana Judiciary paper leak case
विज्ञापन
हरियाणा में जजों की नियुक्ति के लिए हुई एचसीएस ज्यूडिशियल परीक्षा का पेपर लीक करने के मामले में चंडीगढ़ पुलिस की स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने पहली गिरफ्तारी की है। पुलिस ने केस में सुनीता नामक महिला को दिल्ली के नजफगढ़ से बुधवार को गिरफ्तार किया। एसआईटी ने सुनीता को वीरवार जिला अदालत में पेश कर पूछताछ और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए उसका तीन दिन का पुलिस रिमांड हासिल किया है। पुलिस के अनुसार मामले में जल्द ही अन्य गिरफ्तारियां भी संभव है।
विज्ञापन


इस मामले में हाईकोर्ट की ओर से गठित जांच कमेटी के यह मानने के बाद कि डेढ़ करोड़ रुपये में एचसीएस ज्यूडिशियल पेपर लीक हुआ था तो हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ पुलिस से एफआईआर दर्ज कर इसकी रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए थे। जिन दो महिलाओं पर पेपर लीक का आरोप था वे दोनों अपनी-अपनी श्रेणियों में टॉपर पाई गईं थीं।

जांच कमेटी ने कहा था कि दोनों टॉपर कैंडिडेट के पास पहले से ही पेपर मौजूद था। इसकी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। इसके साथ ही रजिस्ट्रार रिक्रूटमेंट डॉ. बलविंदर शर्मा और सुनीता के बीच का कनेक्शन भी जांच कमेटी ने खोलते हुए बताया था कि दोनों के बीच पिछले एक साल में 760 बार फोन पर बात व एसएमएस हु़ए हैं। कमेटी ने सामान्य वर्ग की टॉपर सुनीता आरक्षित वर्ग की टॉपर सुशीला व रजिस्ट्रार रिक्रूटमेंट के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की थी।
विज्ञापन
Trending Videos

Haryana Judiciary paper leak case
हाईकोर्ट के आदेश के बाद चंडीगढ़ पुलिस ने मामले में 19 सितंबर को भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा 8, 9, 13 (1) डी, 13 (2) और आईपीसी 409, 420, 120बी के तहत सेक्टर-3 थाने में एफआईआर दर्ज की थी। इसकी जांच के लिए स्पेशल टीम (एसआईटी) बनाई गई थी। एसपी रवि कुमार के नेतृत्व में डीएसपी कृष्ण कुमार और इंस्पेक्टर पूनम दिलावरी इसकी जांच कर रहे हैं। जांच के दौरान बुधवार को एसआईटी ने सुनीता को नई दिल्ली के नजफगढ़ से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस उसे चंडीगढ़ लेकर आई और वीरवार को जिला अदालत में पेश किया। 

लैपटॉप, पैन ड्राइव, हार्ड डिस्क रिकवर करेगी पुलिस
एसआईटी की ओर से जांच अधिकारी ने जिला अदालत में दलील दी कि आरोपी के पास से पैन ड्राइव, हार्ड डिस्क, लैपटॉप समेत अन्य रिकवरी करनी हैं। अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पूछताछ करनी है। उसे दिल्ली और रोहतक लेकर जाना है, इसके लिए सुनीता का पांच दिन का रिमांड मांगा गया था। वहीं आरोपी सुनीता ने अदालत को बताया कि उसके पास ऐसा कुछ नहीं है। उसने बैक पेन की भी दलील दी। इसके लिए उसने ट्रैवल करने में असमर्थता जताई। अदालत ने पुलिस को सुनीता का मेडिकल कराने और उचित इलाज के आदेश दिए। साथ ही सुनीता को तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया। 

सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए शुरू की सुनवाई
इस मामले में आरोपी हाईकोर्ट के निलंबित रजिस्ट्रार (रिक्रूटमेंट) बलविंदर शर्मा ने निलंबन आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अर्जी पर मुख्य याचिका के साथ सुनवाई के आदेश देते हुए सुनवाई स्थगित कर दी थी। इस मामले में हाई कोर्ट की फुल बेंच सुनवाई कर रही थी, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला अपने पास सुनवाई के लिए मंगवा लिया था और मामले में आगे सुप्रीम कोर्ट में ही सुनवाई करने के आदेश दिए थे।
विज्ञापन

यह था मामला

Haryana Judiciary paper leak case
पंचकूला के पिंजौर की निवासी सुमन ने एडवोकेट मंजीत सिंह के जरिये याचिका दायर कर कहा था कि हरियाणा ने एचसीएस ज्यूडिशियल के 109 पदों के लिए आवेदन मांगे थे, जिसके लिए याची ने भी अप्लाई किया था। परीक्षा की तैयारी के लिए एक कोचिंग सेंटर भी ज्वाइन किया।

इस दौरान उसकी दोस्ती एक लड़की सुशीला से हो गई, जिसने गलती से याची को एक ऐसी ऑडियो क्लिप भेज दी जिसमें वह अन्य लड़की से डेढ़ करोड़ में नियुक्ति की बात कर रही थी। जब याची ने सुशीला से पूछा तो सुशीला ने वो ऑडियो क्लिप डिलीट कर दी। जब जोर देकर पूछा गया तो पेपर लीक होने की बात पता चली। याची ने कहा उसे विश्वास नहीं हुआ इस स्तर की परीक्षा का पेपर लीक हो सकता है।

सुशीला ने याचिकाकर्ता को 6 सवाल भी बताए जो परीक्षा में आने थे। जब 16 जुलाई को परीक्षा हुई तो याचिकाकर्ता को यह जानकर आश्चर्य हुआ कि जो सवाल उसे बताए थे वे परीक्षा में आए थे। याचिकाकर्ता ने अपने पति को इसकी जानकारी दी और उन्होंने उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस को और हाईकोर्ट को एडमिनिस्ट्रेटिव साइड पर दी। याचिकाकर्ता के अनुसार इस गंभीर मामले में एफआईआर दर्ज कर दोषियों पर कार्रवाई की जानी बेहद जरूरी है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें