विभिन्न सेक्टरों में लगने वाली अपनी मंडियों को बंद करने के विरोध में अब महिलाएं भी आ गई हैं। महिलाओं की दलील है कि अपनी मंडी कांसेप्ट सबसे बढ़िया है। क्योंकि एक तो मंडियां लोगों के घरों के पास लगती हैं।
दूसरा इससे लोगों के समय और पैसे दोनों की बचत होती है। जबकि सेक्टर-65ए स्थित एसी फल एवं सब्जी मंडी में लोगों को यह चीज नहीं मिलेगी।
फेज-5 निवासी अनु शर्मा का कहना है कि मंडियां बंद होने से महिलाओं एवं बुजुर्गों को परेशानी आएगी। क्योंकि नई मंडी शहर के बिल्कुल बाहर स्थित है। वहां जाने के लिए शहर से कोई सीधी बस नहीं है। बल्कि ऑटो और रिक्शा ही मंडी जाने का साधन है। रिक्शा एवं ऑटो वालों के मनमाने रेट हैं।
इसी तरफ फेज-5 निवासी सरबजीत कौर का कहना है कि अगर चंडीगढ़ में अपनी मंडियां चल सकती हैं। तो शहर में इन्हें क्यों बंद किया जा रहा है।
मंडी बोर्ड को नई सब्जी मंडी के साथ अपनी मंडियां भी लगातार चलती रहने देनी चाहिए। तकि लोगों को सामान खरीदने में किसी भी प्रकार की दिक्कत न आए।
फेज-2 निवासी किरण शर्मा ने कहा कि मंडियों को एक मंडी में शिफ्ट नहीं करना चाहिए। इससे शहर के लोग मुश्किल में आ जाएंगे। एक तो नई मंडी में पार्किंग और जाम की समस्या आएगी। दूसरी और आपराधिक वारदातों में भी इजाफा होगा। ऐसे में लोग मजबूरी में रेहड़ी-फड़ी वालों से ही सब्जी खरीदेंगे।
फेज-2 निवासी रणजीत कौर ने कहा कि एसी मंडी शहर में बनना गौरव की बात है। लेकिन ऐसे में किसानी मंडियां बंद कर देना ठीक नहीं है।
किसान मंडियों में लोग अपनी सुविधा के अनुसार शॉपिंग करते थे। लोग मोलभाव करते हैं। जबकि एसी मंडी में ऐसा नहीं होगा। दूसरा अभी तक वहां पर पूरा सामान भी नहीं मिलता है।