चंडीगढ़। बस की टक्कर से पलसौरा डिस्पेंसरी में काम करने वाली 28 वर्षीय युवती की मौत के मामले में मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (एमएसीटी) ने हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (एचआरटीसी) और बस ड्राइवर को आदेश दिए हैं कि पीड़ित परिवार को 73.99 लाख रुपये का भुगतान मुआवजे के तौर पर करें।
साथ ही इस पर 7.5 फीसदी की दर से ब्याज का भुगतान भी करने को कहा है। ट्रिब्यूनल ने मुआवजा राशि में से 70 प्रतिशत मृतका के पति बलटाना निवासी अमित शर्मा और शेष मलोया निवासी मां कमला देवी को देने के आदेश दिए हैं। हादसा पिछले साल जुलाई में सेक्टर-43 बस स्टैंड के बाहर हुआ था।
जुलाई 2015 में एमएसीटी के तहत यह मुआवजा क्लेम वाद दायर किया गया था। इसमें एचआरटीसी की बस के ड्राइवर जग्गा सिंह को व एचआरटीसी को ऊना स्थित डिपो मैनेजर के जरिये और शिमला स्थित एचआरटीसी के मैनेजिंग डायरेक्टर को पार्टी बनाया गया था।
हादसे के मुताबिक 3 जुलाई 2015 को निधि पलसौरा डिस्पेंसरी से सेक्टर-43 स्थित आईएसबीटी की ओर बाइक से जा रही थी। बाइक श्रीराम नामक शख्स चला रहा था। दोपहर करीब पौने दो बजे आईएसबीटी के पास स्लिप रोड की ओर मुड़ते ही एक तेज रफ्तार हिमाचल रोडवेज की बस ने उनकी बाइक को पीछे से टक्कर मार दी। इससे श्रीराम और निधि दोनों सड़क पर गिर गए।
वहीं बस का पिछला टायर निधि के ऊपर से गुजर गया। बस को जग्गा सिंह चला रहा था। जख्मी नीधि को फौरन पीजीआई ले जाया गया, वहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। निधि पलसौरा की गवर्नमेंट डिस्पेंसरी में बतौर क्लर्क काम करती थी। वहीं आरोपी चालक के खिलाफ सेक्टर-36 थाने में संबंधित धाराओं के तहत आपराधिक केस दर्ज किया गया था।
केस की सुनवाई के दौरान एचआरटीसी ने कहा कि बस का ड्राइवर आईएसबीटी में प्रवेश कर रहा था। बाइक चालक बस को ओवरटेक करने के दौरान संतुलन खो बैठा और उसक ी बाइक सड़क पर गिर गई। इससे युवती के सिर पर चोट लगने से उसकी मौत हो गई। इसमें ड्राइवर का कोई दोष नहीं है। मुआवजा हासिल करने के लिए बस के ड्राइवर पर झूठे आरोप लगाए गए हैं। लेकिन ट्रिब्यूनल ने एचआरटीसी की इस दलील को नकार दिया।