चंडीगढ़ के सेक्टर-52 स्थित कजहेड़ी में मंगलवार आधी रात बुखार से तप रही आठ साल की बच्ची और उसकी मां को पुलिस ने बिना कारण आधे घंटे तक रोके रखा। महिला का आरोप है कि वह पुलिसकर्मियों के आगे गिड़गिड़ाती रही कि बेटी की हालत खराब है, उसे अस्पताल ले जाने दें लेकिन मदद के बजाय पुलिसकर्मियों ने बदतमीजी की। महिला का कहना है कि पुलिसकर्मियों ने शराब पी रखी थी।
पुलिसकर्मी मदद करने के बजाय पूछताछ करते रहे और बिना गाड़ी से उतरे कहते रहे कि बेटी को दिखाओ। महिला ने कहा कि उतरकर गाड़ी में देख लें लेकिन पुलिसकर्मी न तो गाड़ी से उतरे और न ही उन्हें जाने दिया। जब महिला ने वीडियो बनानी शुरू कर दी तो एएसआई ने कहा कि इन्हें गाड़ी में डालो और थाने ले चलो। महिला ने वीडियो बनाते हुए विरोध किया तो उन्हें जाने दिया गया। महिला अपनी बेटी को लेकर रात डेढ़ बजे अस्पताल पहुंचीं। इलाज के बाद तबीयत कुछ ठीक होने पर सुबह 5 बजे बेटी को होटल वापस आ गईं। कार्ड पर डॉक्टरों ने साफ लिखा है कि आरवी को 102 बुखार है और खांसी -जुकाम के साथ उसकी नाक से खून बह रहा है। घटना के दौरान महिला ने 100 नंबर पर कॉल भी की। कहा कि यदि उनकी बेटी को कुछ हो जाता तो उसका जिम्मेदार कौन होता। महिला ने पुलिसकर्मियों पर शराब पीने का भी आरोप लगाया है। वीडियो में बेटी गाड़ी में लेटी हुई दिख रही है। सेक्टर-61 चौकी प्रभारी को भी पुलिसकर्मियों ने इस मामले में बारे में बताया। जब चौकी प्रभारी नवीन कुमार से पूछा गया तो उन्होंने कहा मामला उनके संज्ञान में नहीं है। नवीन के संज्ञान में मामला आने के बाद उन्होंने तुरंत एएसआई और सिपाही को तलब कर लिया।
एक घंटे से बोल रही हूं। मुझे जाने दो, मेरी बच्ची की हालत देखो क्या हो रखी है। देखो बेटी को 103 डिग्री बुखार है। आओ उतरकर देखो। आप कैसे बकवास कर रहे हो। बदतमीजी से कैसे बात कर रहे हो। मैं आप-आप करके बात कर रही हूं। आप तू-तू करके बात कैसे कर रहे हो। आपको तमीज है, बात करने की। कब से बोल रही हूं, मुझे जाने दो मेरी बच्चे की तबीयत खराब है। वीडियो बनाते हुए महिला ने कहा कि देखो एएसआई और कांस्टेबल मुझे जाने नहीं दे रहे। ये दोनों मेरी बच्ची की हालत देखने के बावजूद भी नहीं हिलने दे रहे। मेरी बच्ची बुखार में तप रही है।
हम लोग रात को कजहेड़ी में गश्त कर रहे थे। गाड़ी में एक व्यक्ति और महिला बैठी थी। गाड़ी के बाहर तीन चार लोग खड़े थे। हमने वेरिफाई करने के लिए उन्हें रोका था। हमने गाड़ी में बच्ची को नहीं देखा था। - एएसआई, राकेश कुमार