पंद्रह लाख रुपये की रिश्वत से जुड़े जस्टिस निर्मल यादव केस में आईटीबीपी के जवान के मुकरने के बाद शनिवार को एक और गवाह अपने बयानों से मुकर गया। जिला अदालत में संजय बावेजा और जयप्रकाश राणा की गवाही थी। सुनवाई के दौरान गवाह जयप्रकाश राणा ने अदालत को बताया कि पुलिस के दबाव में आकर उसने बयान दिया था। जयप्रकाश राणा उस समय आरोपी संजीव बंसल के पास बतौर क्लर्क काम करता था।
मामला 13 अगस्त 2008 का है। आरोप के मुताबिक, पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के वकील संजीव बंसल ने अपने मुंशी प्रकाश राम को पंद्रह लाख रुपये देकर उन्हें जस्टिस निर्मल यादव के घर पहुंचाने के लिए कहा था। मुंशी प्रकाश राम गलती से रुपये लेकर जस्टिस निर्मलजीत कौर के घर पहुंच गया था। जस्टिस निर्मलजीत कौर के नौकर ने मामले की शिकायत पुलिस को दे दी।
सेक्टर-11 थाना पुलिस ने मामला दर्ज करके प्रकाश राम, संजीव बंसल और राजीव गुप्ता को गिरफ्तार किया था। मामले में जस्टिस निर्मल यादव का नाम सामने आने पर जांच सीबीआई के पास गई थी। सीबीआई ने मामले की जांच करके जस्टिस निर्मल यादव पर केस चलाने की अनुमति कानून मंत्री से मांगी, लेकिन अनुमति नहीं मिली।
इसके बाद चार मार्च 2011 को सीबीआई ने राष्ट्रपति से जस्टिस निर्मल यादव पर केस चलाने की अनुमति ली और 25 पेज की चार्जशीट सीबीआई अदालत में दायर कर दी थी। सीबीआई ने मामले की जांच करके हरियाणा के पूर्व एडिशनल एडवोकेट जनरल संजीव बंसल, दिल्ली के बिजनेसमैन रविंदर सिंह, शहर के व्यापारी राजीव गुप्ता और निर्मल सिंह को आरोपी बनाया। इनमें आरोपी संजीव बंसल की मौत हो चुकी है।