नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ (एनबीडब्ल्यूएल) की मंजूरी के बिना ही शहर में दर्जनों बहुमंजिला कॉमर्शियल इमारतें बन गईं। कई सालों से इन इमारतों में कॉमर्शियल एक्टिविटी भी चल रही हैं। लेकिन आज तक पर्यावरण एवं वन विभाग की नजर इन पर नहीं पड़ी। इंडस्ट्रियल एरिया में चल रहे बड़े मॉल, होटल के साथ दूसरे सेक्टरों और पेरीफेरी एरिया में चल रहे होटल व कंपनियां इनमें शामिल हैं। आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार अभी तक चार सरकारी प्रोजेक्ट केलिए ही एनबीडब्ल्यूएल से मंजूरी ली गई है।
शहर में दो वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी हैं। जिसमें सुखना वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी और सेक्टर-21 की बर्ड सेंक्चुरी शामिल हैं। नियमों के अनुसार सेंक्चुरी के 10 किलोमीटर एरिया को इको सेंसटिव जोन माना जाता है। इस दायरे में किसी भी 20 हजार स्क्वेयर मीटर से अधिक की जगह में तभी निर्माण हो सकता है जब प्रशासन से इन्वायरमेंट क्लीयरेंस लेने के बाद एनबीडब्ल्यूएल से मंजूरी ली गई हो। बिना मंजूरी के इस दायरे में निर्माण हो ही नहीं सकता। ऐसे में देखा जाए तो पूरा चंडीगढ़ ही दोनों सेंक्चुरी के दायरे में आता है। प्रशासक प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी से भी इस मामले की शिकायत की गई है।
इन प्रोजेक्ट्स की ली गई मंजूरी
चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के सेक्टर-52, 53 और 56 में इंप्लाई हाउसिंग स्कीम के तहत बने 3930 वन रूम फ्लैट्स के लिए एनबीडब्ल्यूएल से मंजूरी ली गई है। पीजीआई के विस्तार, सीएचबी के मलोया में बने 8896 स्मॉल फ्लैट्स और सेक्टर-17 की मल्टी लेवल पार्किंग के लिए भी पर्यावरण मंजूरी के बाद एनबीडब्ल्यूएल से मंजूरी ली गई है। डिपार्टमेंट ऑफ फोरेस्ट एंड वाइल्ड लाइफ ने खुद आरटीआई में यह जानकारी दी है।