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वेब के आगमन और इलेक्ट्रॉनिक सूचनाओं के प्रसार से मुद्रित पुस्तकों के भविष्य पर सवाल खड़े

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चंडीगढ़। वेब के आगमन और इलेक्ट्रॉनिक सूचनाओं के प्रसार के चलते मुद्रित पुस्तकों के वर्तमान और भविष्य के मूल्य पर सवाल खड़े हो गए हैं। कानून पुस्तकालयाध्यक्ष वर्तमान में इस तरह के सवालों का सामना कर रहे हैं। कोरोना महामारी की स्थिति ने हमें निरंतर सीखने और अनुसंधान के लिए ई-संसाधनों का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर किया है। यह बात वीसी प्रोफेसर राजकुमार ने शनिवार को यूआईएलएस विभाग की ओर से कानून के छात्रों के लिए ‘ई-रिसोर्स फॉर लीगल रिसर्च’ विषय पर आयोजित वेबिनार में कही।
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इस अवसर पर उन्होंने नेशनल इंडियन रैंकिंग फ्रेमवर्क रैंकिंग- 2020 में टॉप- 15 में आने पर लॉ फैकल्टी को बधाई दी साथ ही ई-संसाधनों के माध्यम से अनुसंधान की अवधारणा को आगे बढ़ाने के लिए वेबिनार के आयोजनकर्ताओं की सराहना की। पीयू के डिप्टी लाइब्रेरियन डॉ. नीरज कुमार सिंह सत्र के मुख्य वक्ता रहे। उन्होंने कहा कि हर पेशे में सूचना का बहुत महत्व है। कानूनी जानकारी महत्वपूर्ण है क्योंकि कानून मुख्य रूप से इसके प्रवाह पर निर्भर करता है। कानून और कानूनी अनुसंधान में विभिन्न प्रकार के संसाधन जैसे केस लॉ, अधिनियम, अध्यादेश, नियम / विनियम, अधिसूचना, परिपत्र, संसदीय बहस, टिप्पणी, भाषण, वीडियो-ऑडियो, अनुसंधान लेख, कानूनी समाचार, पुस्तक समीक्षा, कानूनी फॉर्म, संसदीय बिल, संधियां, व्यापार नोटिस और प्रेस विज्ञप्ति आदि है। लेकिन यह जानना महत्वपूर्ण है कि कानून के छात्रों और कानूनी समुदाय को किस प्रकार के कानूनी संसाधनों की आवश्यकता है।
डॉ. नीरज ने कहा कि ओपन एक्सेस लीगल इंफॉर्मेशन सिस्टम वर्ल्ड वाइड वेब के जरिए कंटेंट एक्सेस करने का मौका देता है। इंटरनेट पर ओपन एक्सेस संसाधन मुफ्त में उपलब्ध हैं। डॉ. नीरज ने बताया कि कानूनी शोधकर्ता वे वेब से काफी प्रासंगिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, इसके लिए ज्यादा ओपन-एक्सेस स्रोतों का इस्तेमाल करें। छात्रों को येे जानकारी दी
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इस दौरान छात्रों को मुफ्त ऑनलाइन किताबें, मुफ्त ऑनलाइन पत्रिकाओं, ई-शोध और शोध प्रबंधों और पुस्तकों के क्षेत्र में अन्य उपयोगी जानकारी प्रदान की गई।
यूआईएलएस के निदेशक प्रो. राजिंदर कौर ने कहा कि कानून और कानूनी शोध लोकतंत्र के सबसे मजबूत स्तंभ हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म और ई-संसाधनों के उपयोग के माध्यम से कानूनी अनुसंधान पर काम किया जा सकता है। इस कार्यक्त्रस्म का समन्वयन यूआईएलएस के विद्यार्थियों शौर्य मेहरा, ओमेश गर्ग, दिव्या सिंगला और केतन गर्ग ने किया था।
यूबीएस चेयरपर्सन दीपक कपूर ने रैंकिंग में बढ़ोतरी पर स्टाफ को दी बधाई
पीयू के यूनिवर्सिटी बिजनेस स्कूल के चेयरपर्सन प्रो दीपक कपूर ने स्टाफ को निरफ रैंकिंग में देश के बिजनेस कॉलेजों में टॉप 50 में आने के लिए बधाई दी। उन्होंने बताया कि इस बार यूबीएस ने 2019 के मुकाबले रैंक में 6 अंकों की बढ़ोतरी की है। 2019 यूबीएस की रैंक 48वीं थी। वहीं 2020 में यह रैंक बढ़कर 42 पर पहुंची।
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