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हंगामेदार रहा हरियाणा विधानसभा का शीतकालीन सत्र, इन मुद्दों पर विपक्ष ने की सरकार की घेराबंदी

Sat, 29 Dec 2018 09:16 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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हरियाणा विधानसभा
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हरियाणा विधानसभा में भारी हंगामे के चलते गन्ना किसानों के बकाए की अदायगी के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा नहीं हो पाई। इनेलो और कांग्रेस की ओर से ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाया गया था। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव को लेकर कांग्रेस विधायकों की स्पीकर से भी बहस हुई। इनेलो विधायक बलवान सिंह दौलतपुरिया और कलानौर से कांग्रेस विधायक शकुंतला खटक वेल तक जा पहुंचे। 

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इस पर स्पीकर ने बताया कि गन्ना किसानों के बकाए की अदायगी को लेकर लाया गया ध्यानाकर्षण प्रस्ताव स्वीकार हो चुका है। इस पर चर्चा शुरू करें। नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला ने चर्चा शुरू करते ही एसवाईएल का राग छेड़ दिया। इस पर स्पीकर ने कहा कि गन्ना किसानों के मसले पर बात करें। चौटाला ने इसे लेकर स्पीकर से बहस शुरू कर दी और कहा कि वह किसान की बात कर रहे हैं, अगर कोई तकलीफ है तो बताएं। जिसे देखते हुए सीएम ने स्पीकर से कहा कि अभय सदन का समय खराब कर रहे हैं। 

समय के हिसाब से कार्यवाही चलाएं। कोई भी खड़ा होकर सदन का समय बर्बाद करता रहे, यह नहीं चलेगा। अभय पलटवार करते हुए बोले कि सदन का समय सत्ता पक्ष बर्बाद करता है या हम स्पीकर बताएं। इस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टीका-टिप्पणी शुरू हो गई। दोनों पक्षों के बीच विवाद इतना बढ़ा कि इनेलो विधायकों ने नारेबाजी शुरू कर दी। विवाद थमता न देख स्पीकर ने 12 बजकर 32 मिनट पर बजट के अनुपूरक अनुमान पेश कराने शुरू कर दिए, इसके साथ ही तीन संशोधन विधेयक भी पास कराए। 

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बिजली घोटाले के आरोप पर बहस, सरकार ने कहा- जांच करवाएंगे

हरियाणा विधानसभा
 हरियाणा विधानसभा में बिजली की खरीद-फरोख्त में गड़बड़ी का आरोप लगने के बाद तीखी बहस हुई। मामला जब बिजली महकमे का आया तो खुद सीएम मनोहर लाल ने मोर्चा संभाला और विभाग व विभाग के एक आला अफसर का बचाव किया। कांग्रेस के विधायक करण दलाल ने सदन में मामला उठाते हुए कहा कि प्रदेश में बिजली की खरीद-फरोख्त में बड़ा घोटाला हुआ है। 

सरप्लस होने के बावजूद प्रदेश में महंगी बिजली खरीदी गई और बाद में उसी बिजली को सस्ते में आगे बेचा गया। उन्होंने कहा कि सरकार सदन को बताए कि किन कंपनियों से कितनी बिजली कितने दाम में खरीदी और आगे उसे क्यों बेचा गया। उन्होंने बिजली के खंभों की खरीद में भी गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए कहा कि बिजली महकमे की कमान गैर जिम्मेवार अफसरों के हाथ में है। 

दलाल ने कहा कि उन्होंने बिजली के कई मामलों में अनियमितताओं की चार्जशीट तैयार कर गवर्नर को सौंपी है। सरकार बताए उस पर क्या कर रही है। इस मुद्दे का जवाब देते हुए सीएम ने कहा कि बिजली महकमे में किस अफसर की नियुक्ति करनी है ये सरकार का काम है। उन्होंने चार्जशीट में जो अनियमितताएं हैं, उसमें से 75 फीसद कांग्रेस कार्यकाल की है। सीएम ने कहा कि सरकार सभी आरोपों की जांच करवाएगी।

उधर, विधायकों ने सदन में रोडवेज की किलोमीटर स्कीम पर प्राइवेट बसों को हायर करने का भी मुद्दा उठाते हुए इस योजना से सरकार को नुकसान होने का अंदेशा जताया। इस पर परिवहन मंत्री कृष्णलाल पंवार ने कहा कि सीएम ने पिछले दिनों परिवहन विभाग के अफसरों की बैठक ली थी और ये सुनिश्चित किया है कि इस योजना में कोई गड़बड़ी नहीं होगी।

bhupinder singh hooda - फोटो : फाइल फोटो
 इस पर पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सदन में परिवहन मंत्री से पूछा कि ये योजना राजस्थान और पंजाब में भी है, कृपया वहां के रेट भी सदन में रख दिए जाएं, तो मालूम चल जाएगा कि हरियाणा के रेट ज्यादा है, उन राज्यों के। इस सवाल को परिवहन मंत्री कृष्णपाल पंवार टाल गए।

खेतों में जलभराव पर भी सरकार को सुनाई खरी-खरी
 विधानसभा सत्र में खेतों में जलभराव को लेकर भी सरकार को विधायकों की खरी-खरी सुननी पड़ी। इस पर लगाए गए एक ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर कांग्रेस और इनेलो विधायकों ने सरकार की जमकर घेराबंदी की। इनेलो विधायक परमिंद्र सिंह ढुल ने तो सदन में जींद के विभिन्न गांवों में अभी तक खेतों में खड़े पानी की तस्वीरें भी जारी की। उन्होंने कहा कि गिरदावरी के नाम पर अफसर सरकार की आंखों धूल झोंक रहे हैं, जबकि खेतों में हकीकत कुछ और है। विधायकों ने प्रदेश में खेतों में सेम की समस्या को भी उठाया।

मुख्यमंत्री ने सदन को अवगत करवाया कि प्रदेश में जहां-जहां दिसम्बर में ओलावृष्टि हुई थी, उसे भी गिरदावरी में शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि यमुनानगर व भादसों चीनी मिलों के बकाया का भुगतान करने के लिए राज्य कृषि मूल्य-(माइनस) चीनी का रिकवरी प्राइस का एक फार्मूला तैयार किया गया है, जिसके तहत चीनी के भाव के अनुसार 16 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मिलों को दिए जाने थे, परंतु यह अब सीधे किसानों के खाते में जाएगा।  उन्होंने बताया कि कल ही आगामी गन्ना पेराई सीजन के लिए गन्ने के मूल्य में 10 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की घोषणा की गई। 
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सत्रावधि पर हंगामा, विधेयकों की कॉपी न मिलने पर नाराजगी

हरियाणा का शीतकालीन सत्र शुरू होते ही हंगामे की भेंट चढ़ गया। विपक्ष ने सत्रावधि केवल एक दिन होने की बात पर सत्ता पक्ष को अपने निशाने पर ले लिया। इनेलो और कांग्रेस के साथ-साथ निर्दलीय विधायक ने भी इस मुद्दे पर सरकार पर हमला बोला। विधायकों ने सदन में पारित होने वाले विधेयकों की प्रति भी समय पर न मिलने पर सरकार के समक्ष अपनी नाराजगी जाहिर की। 

अंत में सीएम हरियाणा मनोहर लाल ने इस पर अपना जवाब सदन में रखा। नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला ने स्पीकर को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार आपके निर्देश का पालन नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि ‘आपने 8 अगस्त 2017’ को चीफ सेक्रेटरी को पत्र लिखकर निर्देश दिए थे कि कम से कम 15 दिन पहले पारित होने वाले विधेयक की प्रतियां विधायकों के पास पहुंचाई जाए, ताकि वे उसका अवलोकन कर सदन में उस पर होने वाली चर्चा में भाग ले सकें।’ लेकिन इस पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

इस बार भी उन्हे बिल समय पर नहीं मिले, वे इस पर क्या चर्चा करेंगे! उन्होंने कहा कि जब सरकार को आपके निर्देशों की ही चिंता नहीं है, तो हमारी कौन सुनेगा। इस पर विधानसभा स्पीकर ने कहा कि ये सुनिश्चित किया जाए कि संबंधित विधेयक समय पर विधायकों के पास पहुंचे।

एक दिन के सत्र पर भी कांग्रेसी और इनेलो विधायकों ने सरकार से पूछा कि सत्र को एक दिन बुलाने का क्या मतलब है, सदन में प्रश्नकाल भी नहीं रखा गया। वे अपने इलाकों की समस्याओं के बारे में कैसे प्रश्न पूछेंगे। किरण चौधरी और परमिंद्र ढुल ने कहा कि उन्होंने अपने प्रश्न सदन में दिए थे, उन्हे भी ड्राप कर दिया गाय। जबकि उनके ध्यानाकर्षण प्रस्ताव भी स्वीकार नहीं किए गए। विधायक जयप्रकाश जेपी ने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि शीतकालीन सत्र केवल एक दिन का रखा गया है। 
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