मोदी लहर में बह चुकी कांग्रेस के लिए चंडीगढ़ में पूनम शर्मा पतवार बनकर सामने आई हैं। भाजपा के मुकाबले में पार्षदों की संख्या कम होने के बावजूद मेयर के रूप में पूनम शर्मा की जीत से शहर में कांग्रेस को फिर से आक्सीजन मिल गई है।
उधर, भाजपा की गुटबाजी और बढ़ गई है जिसने शहर में पीएम मोदी की लहर की हवा निकाल दी। यह इस साल का देशभर में पहला चुनाव था, जिसने भाजपा को हार और कांग्रेस को खुशी दी है।
लोकसभा चुनाव में भी भाजपा की गुटबाजी के कारण ही किरण खेर को चंडीगढ़ से उम्मीदवार बनाया गया था। मंगलवार को मेयर की कुर्सी पर कांग्रेस के कब्जा होने से पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल और कांग्रेस अध्यक्ष बीबी बहल का कद हाईकमान में बढ़ गया है।
वहीं, भाजपा की हार से स्थानीय नेता सांसद किरण खेर, संजय टंडन, हरमोहन धवन, सत्यपाल जैन की गुटबाजी उजागर हो गई है। भाजपा के पास 14 सदस्यों की संख्या होने के बावजूद मेयर की कुर्सी गंवाने पर हरियाणा और भाजपा में भी जमकर किरकिरी हो गई है।
मोदी लहर का नहीं मिला फायदा
मोदी लहर से प्रभावित होकर तीन पार्षद कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे लेकिन उसका भी फायदा भाजपा नहीं भुना पाई। पूर्व मेयर राज बाला मलिक, सतप्रकाश अग्रवाल और कश्मीर देवी राणा कांग्रेस में शामिल हुए थे।
उम्मीदवार तय करने से शुरू हो गई खींचतान
जिस समय भाजपा ने मेयर का उम्मीदवार हीरा नेगी को तय किया, उसी समय से भाजपा में खींचतान शुरू हो गई थी। भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन पार्षद आशा जसवाल को मेयर पद का उम्मीदवार बनाना चाहते थे। हीरा नेगी को उम्मीदवार बनाने में सांसद किरण खेर और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन ने अहम भूमिका निभाई थी। सभी गुटों ने हाईकमान को एक-दूसरे पर आरोप लगाते हुए शिकायतें भेज दी हैं।
कांग्रेस की एकजुटता रही कारगर
तीन पार्षदों के भाजपा में छलांग लगाने के बाद भी कांग्रेस की एकजुटता मेयर की कुर्सी कब्जाने में कामयाब रही। पार्षदों की संख्या 9 होने के बावजूद पवन बंसल और बीबी बहल ने अपने पार्षदों का मनोबल नहीं टूटने दिया और पार्टी के चंद नेताओं को विपक्ष की वोटों पर सेंध लगाने और नाराज मनोनीत पार्षदों को मनाने की जिम्मेवारी लगा दी। इन चंद नेताओं की टीम ने मेयर की कुर्सी जीतने की रणनीति तैयार की। पूर्व मेयर रविंद्र सिंह पाली, मुकेश बस्सी, सुभाष शर्मा, प्रदीप छाबड़ा, सुभाष चावला को अलग-अलग जिम्मेवारी दी गई थी।
पूनम शर्मा, नवनियुक्त मेयर के अनुसार लोगों से नरेंद्र मोदी का बुखार उतर गया है। शहर के लिए कांग्रेस विकास करती आई है और कांग्रेस ही करती रहेगी।
वहीं पवन बंसल, पूर्व केंद्रीय मंत्री भाजपा ने बताया कि केंद्र में सरकार बनने के बाद कांग्रेस के स्थानीय पार्षदों को तोड़ा लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस की एकजुटता ने मेयर का चुनाव जीता।